महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: त्रिपुंड-चंद्रमा से सजे बाबा, मावे-ड्राईफ्रूट का विशेष शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 26 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा के दिव्य शृंगार से सुसज्जित बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लग गई थीं।
कपाट खुलने का दिव्य क्षण
शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। जैसे ही भक्तों को दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद बाबा के दर्शन हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अभिषेक और शृंगार की विधि
कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। तत्पश्चात मावे और ड्राईफ्रूट से उनका विशेष शृंगार किया गया और मस्तक पर त्रिपुंड एवं चंद्रमा सजाने के बाद भस्म रमाई गई। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई।
भस्म आरती की विशेषता
जानकारी के अनुसार, परंपरागत रूप से महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है। इस अलौकिक दर्शन के लिए आम जनमानस से लेकर विशिष्ट हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, ताकि व्यवस्था सुचारु बनी रहे। आगामी पर्वों पर भी इसी तरह के भव्य आयोजन की परंपरा जारी रहेगी।