26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: त्रिपुंड-चंद्रमा से सजे बाबा, मावे-ड्राईफ्रूट का विशेष शृंगार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: त्रिपुंड-चंद्रमा से सजे बाबा, मावे-ड्राईफ्रूट का विशेष शृंगार

सारांश

ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। त्रिपुंड, चंद्रमा, मावे और ड्राईफ्रूट से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देर रात से ही श्रद्धालु कतारबद्ध रहे। पंचामृत अभिषेक और मंत्रोच्चार के बीच 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा परिसर गूँज उठा।

मुख्य बातें

26 जून 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा का विशेष शृंगार किया गया; मावे और ड्राईफ्रूट से भी अलंकरण हुआ।
दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक के बाद भस्म आरती संपन्न हुई।
अब भस्म आरती में कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है, न कि श्मशान की राख का।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 26 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा के दिव्य शृंगार से सुसज्जित बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लग गई थीं।

कपाट खुलने का दिव्य क्षण

शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। जैसे ही भक्तों को दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद बाबा के दर्शन हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

अभिषेक और शृंगार की विधि

कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। तत्पश्चात मावे और ड्राईफ्रूट से उनका विशेष शृंगार किया गया और मस्तक पर त्रिपुंड एवं चंद्रमा सजाने के बाद भस्म रमाई गई। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई।

भस्म आरती की विशेषता

जानकारी के अनुसार, परंपरागत रूप से महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है। इस अलौकिक दर्शन के लिए आम जनमानस से लेकर विशिष्ट हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, ताकि व्यवस्था सुचारु बनी रहे। आगामी पर्वों पर भी इसी तरह के भव्य आयोजन की परंपरा जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की नीतियाँ केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बनाई जा रही हैं। गौरतलब है कि भस्म में श्मशान राख से औषधीय भस्म की ओर हुआ बदलाव परंपरा और आधुनिक स्वास्थ्य-चेतना के बीच संतुलन का उदाहरण है। मंदिर प्रशासन की चुनौती यह है कि बढ़ती भीड़ के बावजूद इस अनुभव की आध्यात्मिक गहराई और अनुशासन बना रहे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें भगवान महाकाल को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। यह देश की सबसे प्रसिद्ध और दुर्लभ धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
जानकारी के अनुसार, पहले श्मशान की राख उपयोग में लाई जाती थी, किंतु अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव परंपरा को आधुनिक स्वास्थ्य-मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर परंपरा और पवित्रता के अनुपालन के लिए लागू किया गया है।
26 जून 2026 को किस अवसर पर भस्म आरती आयोजित हुई?
यह भस्म आरती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी के पावन अवसर पर शुक्रवार, 26 जून 2026 को संपन्न हुई। इस तिथि का हिंदू पंचांग में विशेष धार्मिक महत्व है।
महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
बाबा महाकाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक के बाद मावे और ड्राईफ्रूट से शृंगार किया जाता है। मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्रमा सजाने के बाद भस्म रमाई जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले