उज्जैन में बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती संपन्न, पंचामृत अभिषेक और दिव्य शृंगार से गूंजा 'जय महाकाल'

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उज्जैन में बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती संपन्न, पंचामृत अभिषेक और दिव्य शृंगार से गूंजा 'जय महाकाल'

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 19 मई की तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। महानिर्वाणी अखाड़े ने पंचामृत अभिषेक और विशेष शृंगार के बाद बाबा को भस्म अर्पित की। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने 'जय महाकाल' के जयकारों के बीच बाबा के दिव्य दर्शन किए।

मुख्य बातें

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 19 मई, मंगलवार की तड़के भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
परंपरानुसार भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के कपाट खोले गए।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा जलाभिषेक और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से बाबा का अभिषेक किया गया।
बाबा के मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड , चंद्र और बेलपत्रों की माला से विशेष शृंगार किया गया।
भस्म अर्पण के बाद कर्पूर आरती और महाआरती संपन्न हुई; डमरू, शंख और घंटियों की ध्वनि से वातावरण शिवमय हुआ।
देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु देर रात से कतारों में खड़े रहे और बाबा के अलौकिक दर्शन किए।

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार, 19 मई की तड़के भव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के अलौकिक दर्शन किए। पंचामृत अभिषेक और विशेष शृंगार के बाद जब बाबा को भस्म अर्पित की गई, तो पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

मंदिर के कपाट खुलने की परंपरा

प्राचीन परंपरा के अनुसार सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के पश्चात मंदिर के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही शंखध्वनि, घंटियों की टंकार और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। देर रात से कतारों में खड़े श्रद्धालुओं ने जैसे ही बाबा के दर्शन किए, उनका उत्साह और आस्था दोनों चरम पर पहुँच गए।

पंचामृत अभिषेक और विशेष शृंगार

आरती से पूर्व महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा सबसे पहले बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से निर्मित पंचामृत से बाबा का विधिवत अभिषेक हुआ। अभिषेक के पश्चात बाबा का अत्यंत आकर्षक शृंगार किया गया — मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड और चंद्र अर्पित किए गए, साथ ही ताजे बेलपत्रों की माला धारण कराई गई। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन से गर्भगृह में उपस्थित भक्त भाव-विभोर हो उठे।

भस्म आरती का भव्य आयोजन

शृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा परंपरानुसार बाबा को भस्म अर्पित की गई। भस्म धारण करते ही बाबा का स्वरूप और भी मनोहारी हो गया। इसके बाद भगवान को विशेष पकवानों का भोग लगाया गया और फिर कर्पूर आरतीमहाआरती संपन्न हुई। आरती के दौरान डमरू, शंख और घंटियों की सम्मिलित ध्वनि से समूचा वातावरण शिवमय हो गया। भस्म आरती के इस दुर्लभ अवसर पर महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं — यही इस आरती की सबसे बड़ी महिमा मानी जाती है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

मंगलवार की इस भस्म आरती में देश के कोने-कोने से आए भक्तों के साथ विदेशी श्रद्धालु भी शामिल हुए। अनेक भक्त देर रात से ही मंदिर के बाहर कतारों में लग गए थे ताकि बाबा का पहला दर्शन मिल सके। मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित किए।

उज्जैन की धार्मिक पहचान

गौरतलब है कि उज्जैन भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का निवास स्थान है और इसे महाकाल की नगरी भी कहा जाता है। यहाँ की भस्म आरती देश-दुनिया में अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। प्रतिदिन तड़के होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव होती है, जो उन्हें बार-बार उज्जैन खींच लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान का केंद्र बिंदु है। यह आरती प्रतिदिन होती है, फिर भी हर बार हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ना यह दर्शाता है कि भारत में धार्मिक पर्यटन की माँग निरंतर बढ़ रही है। उज्जैन महाकाल लोक कॉरिडोर के विकास के बाद से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस प्राचीन परंपरा की प्रासंगिकता को आधुनिक संदर्भ में भी रेखांकित करती है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर की भस्म आरती क्या है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रतिदिन तड़के होने वाली एक अनूठी धार्मिक परंपरा है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। इस आरती के दौरान भक्तों को बाबा के निराकार से साकार रूप में दर्शन होते हैं, जो इसे देशभर में विशेष बनाता है।
भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक कैसे किया जाता है?
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — इन पाँच पवित्र द्रव्यों से बाबा महाकाल का अभिषेक किया जाता है। यह अभिषेक जलाभिषेक के बाद और भस्म अर्पण से पहले महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा संपन्न किया जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर के कपाट कब और कैसे खुलते हैं?
प्रतिदिन तड़के सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने की परंपरा के बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। कपाट खुलते ही शंखध्वनि, घंटियों और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठता है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए श्रद्धालु कब से कतार में लगते हैं?
भस्म आरती में दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर के बाहर कतारों में लग जाते हैं। देश-विदेश से आए भक्त बाबा की पहली झलक पाने के लिए घंटों प्रतीक्षा करते हैं।
महाकालेश्वर का शृंगार भस्म आरती में कैसा होता है?
भस्म आरती में बाबा महाकाल के मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड और चंद्र अर्पित किया जाता है तथा ताजे बेलपत्रों की माला धारण कराई जाती है। इसके बाद भस्म अर्पण से बाबा का स्वरूप और भी मनोहारी हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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