1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सावन में महाकाल की भव्य भस्म आरती: भांग-चंदन से शृंगार, उज्जैन में उमड़े हजारों श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सावन में महाकाल की भव्य भस्म आरती: भांग-चंदन से शृंगार, उज्जैन में उमड़े हजारों श्रद्धालु

सारांश

सावन का पहला शनिवार और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — भांग, चंदन और मेवों से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रात से कतार में खड़े हजारों श्रद्धालु। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भीड़ इतनी उमड़ी कि स्पर्श दर्शन बंद करना पड़ा।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 1 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग, चंदन, मेवे और भस्म से शृंगार किया गया; पंचामृत अभिषेक भी हुआ।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य पोशाक है।
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भारी भीड़ के कारण स्पर्श दर्शन बंद रखा गया।
सावन के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ के दरबार में पूजा-अर्चना की।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया, शनिवार 1 अगस्त को बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती संपन्न हुई। सावन के पावन महीने में देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, और उज्जैन के इस विश्वविख्यात ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी हजारों भक्त रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। तत्पश्चात बाबा का भांग, चंदन, मेवे और भस्म से भव्य शृंगार किया गया।

मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। जैसे ही भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन प्राप्त हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों की टंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

भस्म आरती की परंपरा और नियम

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देशभर में अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। यह नियम मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू है।

गौरतलब है कि सावन माह में महाकाल की भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु देश के कोने-कोने से उज्जैन पहुँचते हैं, जिससे मंदिर प्रशासन को भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतज़ाम करने पड़ते हैं।

काशी विश्वनाथ में भी उमड़ी भीड़

सावन के अवसर पर वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भीड़ की अधिकता के कारण स्पर्श दर्शन फिलहाल बंद रखा गया है। सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुँचे और विधिवत पूजा-अर्चना की।

आम श्रद्धालुओं पर असर

भारी भीड़ के मद्देनज़र दोनों प्रमुख मंदिरों — महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ — में प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। वाराणसी में स्पर्श दर्शन बंद होने से कुछ श्रद्धालुओं को निराशा हुई, हालांकि झाँकी दर्शन की व्यवस्था जारी है।

सावन माह के शेष सोमवारों और विशेष तिथियों पर भी इसी प्रकार की भव्य आरती और अभिषेक की परंपरा जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में नज़रअंदाज़ किया जाता है। वाराणसी में स्पर्श दर्शन बंद होना भीड़ प्रबंधन की उस चुनौती को उजागर करता है जिससे मंदिर प्रशासन हर सावन जूझता है। मंदिरों में आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल दर्शन-बुकिंग की माँग बढ़ रही है, लेकिन पारंपरिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच का यह असंतुलन एक नीतिगत प्रश्न भी खड़ा करता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल की भस्म आरती क्या होती है और यह क्यों खास है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की एक अनूठी सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें भगवान महाकाल का चिता भस्म से शृंगार कर आरती की जाती है। यह देश के किसी अन्य शिव मंदिर में इस रूप में नहीं होती, इसीलिए इसे देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या पोशाक नियम हैं?
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की धार्मिक मर्यादा और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू है।
सावन में बाबा महाकाल का शृंगार किन चीज़ों से किया जाता है?
सावन में बाबा महाकाल का शृंगार भांग, चंदन, मेवे और भस्म से किया जाता है। इसके साथ ही दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक भी किया जाता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के दौरान स्पर्श दर्शन क्यों बंद है?
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने के कारण प्रशासन ने स्पर्श दर्शन बंद कर दिया है। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है, हालांकि झाँकी दर्शन की व्यवस्था जारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावन पर कहाँ दर्शन किए?
सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचे और बाबा के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले