सावन में महाकाल की भव्य भस्म आरती: भांग-चंदन से शृंगार, उज्जैन में उमड़े हजारों श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया, शनिवार 1 अगस्त को बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती संपन्न हुई। सावन के पावन महीने में देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, और उज्जैन के इस विश्वविख्यात ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी हजारों भक्त रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। तत्पश्चात बाबा का भांग, चंदन, मेवे और भस्म से भव्य शृंगार किया गया।
मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। जैसे ही भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन प्राप्त हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों की टंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा।
भस्म आरती की परंपरा और नियम
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देशभर में अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। यह नियम मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू है।
गौरतलब है कि सावन माह में महाकाल की भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु देश के कोने-कोने से उज्जैन पहुँचते हैं, जिससे मंदिर प्रशासन को भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतज़ाम करने पड़ते हैं।
काशी विश्वनाथ में भी उमड़ी भीड़
सावन के अवसर पर वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भीड़ की अधिकता के कारण स्पर्श दर्शन फिलहाल बंद रखा गया है। सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुँचे और विधिवत पूजा-अर्चना की।
आम श्रद्धालुओं पर असर
भारी भीड़ के मद्देनज़र दोनों प्रमुख मंदिरों — महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ — में प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। वाराणसी में स्पर्श दर्शन बंद होने से कुछ श्रद्धालुओं को निराशा हुई, हालांकि झाँकी दर्शन की व्यवस्था जारी है।
सावन माह के शेष सोमवारों और विशेष तिथियों पर भी इसी प्रकार की भव्य आरती और अभिषेक की परंपरा जारी रहेगी।