महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग-चंदन और आभूषणों से बाबा का दिव्य शृंगार, सावन में उमड़े श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 4 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष षष्ठी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भांग, चंदन और बहुमूल्य आभूषणों से सजे बाबा के दिव्य शृंगार के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सावन के पवित्र माह में देशभर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक का सिलसिला जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के उपरांत ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और इसके बाद दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। तत्पश्चात भांग, चंदन और आभूषणों से बाबा का दिव्य शृंगार किया गया।
भस्म आरती का अलौकिक दृश्य
मंदिर के पुजारियों द्वारा महाआरती संपन्न कराई गई। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वेद-मंत्रों का संगम वातावरण को अलौकिक बना रहा था। गौरतलब है कि भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।
आम जनता पर असर
बीती रात से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारबद्ध होने लगे थे। सावन के महीने में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है, जिससे मंदिर प्रशासन को व्यवस्था संभालने में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।
काशी विश्वनाथ में भी भारी भीड़
वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सावन के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्तों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए स्पर्श दर्शन अस्थायी रूप से बंद किया गया है। सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुँचकर पूजा-अर्चना की थी।
क्या होगा आगे
सावन माह के शेष सोमवारों और विशेष तिथियों पर महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।