4 अगस्त 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग-चंदन और आभूषणों से बाबा का दिव्य शृंगार, सावन में उमड़े श्रद्धालु

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग-चंदन और आभूषणों से बाबा का दिव्य शृंगार, सावन में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

सावन की षष्ठी तिथि पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक आयोजन हुआ। भांग, चंदन और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध रहे। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी भीड़ के कारण स्पर्श दर्शन बंद किया गया।

मुख्य बातें

4 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष षष्ठी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग, चंदन और आभूषणों से दिव्य शृंगार किया गया; पंचामृत अभिषेक भी हुआ।
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जो बीती रात से ही कतारबद्ध थे।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
काशी विश्वनाथ मंदिर , वाराणसी में भी सावन पर भारी भीड़; स्पर्श दर्शन अस्थायी रूप से बंद।
सावन के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ दरबार में पूजा-अर्चना की।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 4 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष षष्ठी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भांग, चंदन और बहुमूल्य आभूषणों से सजे बाबा के दिव्य शृंगार के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सावन के पवित्र माह में देशभर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक का सिलसिला जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के उपरांत ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और इसके बाद दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। तत्पश्चात भांग, चंदन और आभूषणों से बाबा का दिव्य शृंगार किया गया।

भस्म आरती का अलौकिक दृश्य

मंदिर के पुजारियों द्वारा महाआरती संपन्न कराई गई। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वेद-मंत्रों का संगम वातावरण को अलौकिक बना रहा था। गौरतलब है कि भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।

आम जनता पर असर

बीती रात से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारबद्ध होने लगे थे। सावन के महीने में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है, जिससे मंदिर प्रशासन को व्यवस्था संभालने में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।

काशी विश्वनाथ में भी भारी भीड़

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सावन के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्तों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए स्पर्श दर्शन अस्थायी रूप से बंद किया गया है। सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुँचकर पूजा-अर्चना की थी।

क्या होगा आगे

सावन माह के शेष सोमवारों और विशेष तिथियों पर महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मंदिर प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन की गंभीर चुनौती भी खड़ी करती है। काशी विश्वनाथ में स्पर्श दर्शन बंद करना इसी दबाव का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पर्यटन में वृद्धि के बाद बुनियादी ढाँचे और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। मंदिर प्रशासनों को आस्था और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत उपायों की आवश्यकता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की एक अनूठी और प्राचीन परंपरा है, जिसमें भगवान महाकाल को भस्म (राख) अर्पित कर आरती की जाती है। यह आरती प्रतिदिन तड़के होती है और इसे देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। इसके अलावा आरती के लिए पूर्व पंजीकरण भी आवश्यक होता है।
सावन में महाकाल का दिव्य शृंगार कैसे किया जाता है?
सावन में बाबा महाकाल का भांग, चंदन और बहुमूल्य आभूषणों से विशेष शृंगार किया जाता है। इससे पहले जलाभिषेक और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस) से अभिषेक होता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन 2026 में स्पर्श दर्शन क्यों बंद है?
सावन के दौरान वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण स्पर्श दर्शन अस्थायी रूप से बंद किया गया है। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
सावन 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहाँ दर्शन किए?
सावन के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचे और बाबा के दरबार में पूजा-अर्चना की।
राष्ट्र प्रेस
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