30 जुलाई 2026
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सावन के पहले सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर में उमड़े हजारों भक्त, भस्म आरती से गूंजा 'जय महाकाल'

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सावन के पहले सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर में उमड़े हजारों भक्त, भस्म आरती से गूंजा 'जय महाकाल'

सारांश

सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर आस्था के सैलाब में डूब गया। सुबह 3 बजे से खुले द्वार, पंचामृत अभिषेक, केसर स्नान और भस्म आरती के बीच हजारों भक्तों ने 'जय महाकाल' के जयघोष से पूरे परिसर को भक्तिमय कर दिया।

मुख्य बातें

30 जुलाई को सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में हजारों श्रद्धालु उमड़े।
मंदिर के द्वार सुबह 3 बजे खुले; पंचामृत अभिषेक , केसर स्नान और भस्म आरती की परंपरा संपन्न हुई।
भस्म आरती से पूर्व बाबा महाकाल को भांग से सजाने की सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई।
पंजाबी गायक दीप मनी ने भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया।
प्रशासन ने भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ कीं।

उज्जैन के विश्वविख्यात श्री महाकालेश्वर मंदिर में 30 जुलाई को सावन मास के पहले सोमवार पर हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के आयोजित भस्म आरती में भाग लेने के लिए देर रात से ही भक्त कतारों में खड़े थे और मंदिर परिसर 'जय महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा। भगवान शिव के इस पवित्र धाम में आस्था और भक्ति का ऐसा अपूर्व संगम देखने को मिला जो सावन की विशेष महत्ता को रेखांकित करता है।

मुख्य घटनाक्रम

परंपरा के अनुसार मंदिर के द्वार सुबह 3 बजे खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन प्रारंभ हुआ। पंचामृत अभिषेक — दही, दूध, शहद, चीनी और घी से — किया गया, जिसके बाद केसर स्नान और दिव्य शृंगार की प्रक्रिया संपन्न हुई। भस्म आरती से पूर्व बाबा को भांग से विशेष रूप से अलंकृत किया गया — यह सदियों पुरानी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।

भक्तों की आस्था और अनुभव

भस्म आरती में पहली बार शामिल हुए एक श्रद्धालु ने कहा कि अपने जन्मदिन पर बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करना उनके जीवन का सबसे अनमोल उपहार है। उन्होंने इस दिव्य अनुभव को शब्दों से परे बताते हुए कहा कि महाकाल की कृपा से उन्हें आत्मिक शांति की अनुभूति हुई। एक अन्य भक्त ने कहा कि सावन की शुरुआत के साथ ऐसा लग रहा है जैसे कोई बड़ा त्योहार आ गया हो।

著名 हस्तियों की उपस्थिति

इस अवसर पर पंजाबी गायक दीप मनी भी महाकालेश्वर मंदिर पहुँचे और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया। उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन को बेहद शांतिपूर्ण और दिव्य अनुभव बताया। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी चर्चित बना दिया।

प्रशासन की व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए। इन व्यवस्थाओं के चलते दर्शन और पूजा-अर्चना का क्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब सावन मास में महाकालेश्वर मंदिर में देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं, जिससे उज्जैन धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर की धार्मिक महत्ता

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और शैव परंपरा में इसका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। सावन मास में यहाँ आयोजित भस्म आरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से भक्त आते हैं। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है, इसलिए सावन के पहले सोमवार पर उमड़ी भीड़ इस मंदिर की अटूट धार्मिक आस्था का प्रमाण है। आने वाले सोमवारों पर भी भक्तों की ऐसी ही भारी उपस्थिति की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारी भीड़ प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे पर दबाव के सवाल भी उठते हैं। प्रशासन की व्यवस्थाएँ सराहनीय हैं, परंतु सावन के आगामी सोमवारों पर और अधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता स्पष्ट है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा है जिसमें भगवान शिव को चिता भस्म से अभिषेक किया जाता है। यह आरती प्रतिदिन तड़के होती है और सावन मास में इसका विशेष महत्व होता है।
सावन के पहले सोमवार पर महाकाल मंदिर में दर्शन का समय क्या था?
30 जुलाई को सावन के पहले सोमवार पर मंदिर के द्वार सुबह 3 बजे खोले गए। इसके बाद पंचामृत अभिषेक, केसर स्नान, दिव्य शृंगार और भस्म आरती का क्रम संपन्न हुआ।
महाकालेश्वर मंदिर धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। शैव परंपरा में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है और सावन मास में यहाँ देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
सावन के पहले सोमवार पर किन प्रमुख हस्तियों ने महाकाल मंदिर में दर्शन किए?
पंजाबी गायक दीप मनी ने सावन के पहले सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया। उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन को शांतिपूर्ण और दिव्य अनुभव बताया।
सावन में महाकाल मंदिर में भीड़ के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्थाएँ कीं?
मंदिर प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए, जिससे दर्शन और पूजा-अर्चना का क्रम सुचारु रूप से चलता रहा। आगामी सोमवारों पर भी इसी तरह की व्यवस्थाएँ जारी रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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