सावन के दूसरे सोमवार पर महाकालेश्वर में भस्म आरती, सोम प्रदोष पर बाबा महाकाल ने रखा स्वयं व्रत
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 10 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि — सावन के दूसरे सोमवार — पर बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर सोम प्रदोष का संयोग भी बना, जिससे यह दिन शिव भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। मंदिर परिसर में देश के कोने-कोने से आए हज़ारों श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार की भोर में रात 2:30 बजे भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया और बाबा को भांग तथा मेवों से सजाया गया। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात जैसे ही भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।
सोम प्रदोष का विशेष महत्व
महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित आकाश शर्मा ने बताया, 'आज सावन के पवित्र महीने का दूसरा सोमवार है और सोम प्रदोष भी है, इसलिए यह सभी शिव भक्तों के लिए बहुत शुभ दिन है।' उन्होंने विशेष रूप से यह भी बताया कि सोम प्रदोष होने की वजह से बाबा महाकाल को फलाहार का भोग लगाया गया, क्योंकि इस दिन बाबा महाकाल स्वयं व्रत रखते हैं — यह धार्मिक मान्यता इस पर्व को और भी विशिष्ट बनाती है।
श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव
साध्वी हर्षा नंद गिरी ने इस अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने कहा, 'आज का दिन अपने आप में बहुत खास और अहम है क्योंकि सावन का दूसरा सोमवार और प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं। अगर आप व्रत नहीं भी रखते हैं, तो भी माना जाता है कि आज सिर्फ पूजा-पाठ करने या भगवान के दर्शन करने से बहुत ज्यादा आध्यात्मिक पुण्य मिलता है।' साध्वी ने यह भी बताया कि यह उनके जीवन की पहली कांवड़ यात्रा थी, जो बाबा महाकाल की कृपा से संपन्न हुई।
मथुरा से आईं श्रद्धालु स्वरा कौशिक ने कहा कि सावन के दूसरे सोमवार पर भस्म आरती में शामिल होकर मन प्रफुल्लित हो गया। कनिष्ठा कलरेजा ने अपनी अनुभूति साझा करते हुए कहा कि भस्म आरती के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो बाबा साक्षात सामने विराजमान हों।
आम जनता और भक्तों पर असर
सावन और सोम प्रदोष के दुर्लभ संयोग ने इस वर्ष महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की। देश के विभिन्न राज्यों से भक्त उज्जैन पहुँचे। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष प्रबंध किए।
क्या होगा आगे
सावन माह में आने वाले शेष सोमवार और विशेष पर्वों पर भी महाकालेश्वर मंदिर में इसी प्रकार की भव्य भस्म आरती एवं विशेष शृंगार का आयोजन होता रहेगा। शिव भक्तों के लिए यह पूरा माह आस्था और साधना का अवसर बना रहेगा।