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उज्जैन महाकाल मंदिर में गणेश स्वरूप में सजे बाबा, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

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उज्जैन महाकाल मंदिर में गणेश स्वरूप में सजे बाबा, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार का दिन विशेष रहा — बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया और भस्म आरती के साक्षी बनने हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से उमड़ पड़े। अधिकमास के कृष्ण पक्ष की तृतीय तिथि पर पूरा मंदिर परिसर शंखध्वनि, मंत्रोच्चार और 'जय महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान रहा।

मुख्य बातें

उज्जैन महाकाल मंदिर में 3 जून को ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की तृतीय तिथि पर हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए।
बुधवार होने के कारण बाबा को विशेष रूप से गणेश स्वरूप में सजाया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई।
पंचामृत — दूध, दही, घी, शक्कर और शहद — से अभिषेक किया गया।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-अंगवस्त्र और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।

उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में 3 जून को ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की तृतीय तिथि पर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बुधवार होने के कारण बाबा को विशेष रूप से गणेश स्वरूप में सजाया गया, और पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' तथा 'जय महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

रातभर कतार में डटे रहे भक्त

भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए श्रद्धालुओं ने मंगलवार देर रात से ही लंबी कतारों में लगना शुरू कर दिया था। घंटों प्रतीक्षा और रातभर लाइन में खड़े रहने के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। हर कोई अपने आराध्य देव की एक झलक पाने को आतुर नज़र आया।

परंपरागत विधि से खुले कपाट

परंपरानुसार, बुधवार तड़के वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। सबसे पहले बाबा को जल अर्पित कर स्नान करवाया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। गर्भगृह में मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया और भक्त भाव-विभोर नज़र आए।

गणेश आकार के बाद हुआ विशेष शृंगार

अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल को सबसे पहले गणेश आकार दिया गया, फिर उनका विशेष शृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिशूल बनाया गया और फूलों की माला पहनाई गई। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म अर्पित की गई। शंख, डमरू और घंटी की गूंज से वातावरण अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक हो उठा।

भस्म आरती की विशेष परंपराएँ

प्रत्येक दिन बाबा की भस्म आरती के बाद उनका शृंगार भिन्न-भिन्न रूपों में किया जाता है। इस दौरान भगवान महाकाल निराकार रूप में माने जाते हैं, इसलिए आरती के समय महिलाओं के लिए घूंघट करना अनिवार्य होता है। आरती में शामिल पुरुषों के लिए धोती और अंगवस्त्र तथा महिलाओं के लिए साड़ी पहनना आवश्यक है।

आस्था का अनूठा संगम

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती विश्व में अद्वितीय मानी जाती है। अधिकमास के दौरान यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है, और मंदिर प्रशासन भीड़ प्रबंधन तथा दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — हर रोज़ बदलता शृंगार और बुधवार का गणेश स्वरूप जैसी परंपराएँ श्रद्धालुओं को बार-बार खींच लाती हैं। अधिकमास जैसे विशेष कालखंडों में भीड़ का दबाव मंदिर प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था पर बढ़ जाता है, जो दर्शन-कतार प्रबंधन और सुरक्षा को निरंतर चुनौती देता है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज़ पर महाकाल लोक के विस्तार ने तीर्थाटन को नई गति दी है, लेकिन परंपरा और भीड़-प्रबंधन के बीच संतुलन साधना आगे की कसौटी है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल मंदिर में बुधवार को बाबा को गणेश स्वरूप में क्यों सजाया जाता है?
बाबा महाकाल की प्रत्येक दिन की भस्म आरती के बाद शृंगार अलग-अलग स्वरूपों में किया जाता है, और बुधवार का दिन परंपरागत रूप से गणेश स्वरूप को समर्पित होता है। इस दिन बाबा को पहले गणेश आकार दिया जाता है, फिर मस्तक पर त्रिशूल बनाकर फूलों की माला से शृंगार पूर्ण किया जाता है।
महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या ड्रेस कोड है?
भस्म आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए धोती और अंगवस्त्र पहनना अनिवार्य है, जबकि महिलाओं के लिए साड़ी पहनना आवश्यक है। आरती के समय भगवान महाकाल निराकार रूप में माने जाते हैं, इसलिए महिलाओं को घूंघट करना भी अनिवार्य होता है।
महाकाल मंदिर के कपाट सुबह कैसे खोले जाते हैं?
परंपरानुसार तड़के सुबह वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद बाबा को सबसे पहले जल से स्नान करवाया जाता है और फिर दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बने पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म कौन अर्पित करता है?
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में बाबा को भस्म पारंपरिक रूप से महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की जाती है। यह अनुष्ठान शंख, डमरू, घंटी की गूंज और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न होता है, जिससे संपूर्ण गर्भगृह दिव्य आध्यात्मिक वातावरण में डूब जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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