सावन के अंतिम सोमवार पर महाकालेश्वर में भस्म आरती, हंसराज रघुवंशी ने किए बाबा के दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 24 अगस्त 2026 को श्रावण शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि और सावन के चौथे एवं अंतिम सोमवार पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में देशभर से हज़ारों श्रद्धालु उमड़े और इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।
भस्म आरती का विशेष आयोजन
मंदिर के पुजारी ने बताया कि सावन के अंतिम सोमवार पर प्रातः 2:30 बजे बाबा महाकालेश्वर मंदिर के पट खोले गए। इसके उपरांत बाबा को पंचामृत और फलों के रसों से स्नान कराया गया। तत्पश्चात भांग से बाबा का मनमोहक शृंगार किया गया और फिर महाआरती संपन्न हुई। पुजारी ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जो भक्त सावन माह में दर्शन नहीं कर पाए, वे इस अंतिम सोमवार को दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।
हंसराज रघुवंशी का भाव-विभोर अनुभव
भक्ति संगीत के प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी ने सावन के इस अंतिम सोमवार पर बाबा महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने कहा, 'आज बाबा महाकाल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भस्म आरती का अनुभव तो अलग ही होता है।' रघुवंशी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को भव्य श्रावण उत्सव आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि यदि जीवन में कठिनाइयाँ हों, तो एक बार बाबा महाकाल की शरण में अवश्य आएं।
संतों और अखाड़ों की उपस्थिति
सद्गुरु दयानंद महाराज ने इस अवसर पर सभी भक्तों को 'जय श्री महाकाल' और 'जय श्री केदार' का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सावन के इस शुभ चौथे और अंतिम सोमवार पर सभी लोग निरोगी, स्वस्थ और आनंदित रहें तथा बाबा महाकाल की कृपा सभी पर बनी रहे।
किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर सोनाक्षी महाराज ने बताया कि भस्म आरती में अनेक राजनेता, मंत्री और प्रसिद्ध हस्तियाँ सम्मिलित हुईं। जूना अखाड़ा और किन्नर अखाड़ा के सदस्य भी बड़ी संख्या में पहुँचे। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्था की सराहना की।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
दर्शन के लिए आईं महिला श्रद्धालु प्रमिला ने कहा कि सावन के अंतिम सोमवार पर भस्म आरती में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला और यह अनुभव अत्यंत दिव्य रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि महाकाल की भक्ति में आस्था का ज्वार सावन के अंत तक भी उतना ही प्रबल रहता है।
आगे का महत्व
सावन माह की समाप्ति के साथ ही भाद्रपद मास में भी शिव भक्ति का क्रम जारी रहेगा। महाकालेश्वर मंदिर — जो देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है — में वर्षभर भस्म आरती का आयोजन होता है, किंतु सावन माह में इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।