सीईसी ज्ञानेश कुमार लखनऊ पहुंचे, UP चुनाव 2027 की तैयारी में BLO-छात्रों से करेंगे संवाद
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का एक प्रतिनिधिमंडल 24 अगस्त 2026 को दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआती तैयारियों का जायजा लेने और जमीनी स्तर पर चुनावी मशीनरी की समीक्षा करना इस दौरे का मुख्य उद्देश्य है।
तपोभूमि की वापसी
लखनऊ पहुंचने पर पत्रकारों से बात करते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'लखनऊ मेरी तपोभूमि रही है, यहां मेरी शिक्षा भी हुई और उच्च शिक्षा के लिए हम आईआईटी चले गए। बहुत दिनों के बाद अपनी कर्मभूमि लखनऊ आया हूं।' उन्होंने कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को एक विशेष संदेश देने के इरादे से आया है।
बूथ स्तर अधिकारियों से संवाद
सीईसी ने स्पष्ट किया कि इस दौरे में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से विशेष रूप से बातचीत की जाएगी। उन्होंने BLO को 'लोकतंत्र की नींव' बताते हुए कहा कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और उससे जुड़ी अहम बातें समझाई जाएंगी। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश भर के विश्वविद्यालयों और स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
छात्रों-शिक्षकों से संवाद और क्षेत्रीय सम्मेलन
ज्ञानेश कुमार कॉल्विन तालुकदार कॉलेज के अवध ऑडिटोरियम में छात्रों से संवाद करेंगे — यह वही संस्थान है जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद वे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में चुनावी साक्षरता क्लब (ELC 2.0) और ECInet पर आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
यह क्षेत्रीय सम्मेलन तीन चरणों में क्रमशः लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में 20 जिलों के 120 विधानसभा क्षेत्रों के 440 संस्थानों से लगभग 1,500 छात्र, शिक्षक, प्रिंसिपल और शिक्षण संस्थानों के प्रमुख भाग लेंगे।
युवाओं को जोड़ने की रणनीति
ELC 2.0 कार्यक्रम का मुख्य ध्येय युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ना और उनमें चुनावी जागरूकता बढ़ाना है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा वाला राज्य है और यहां के युवा मतदाता 2027 के चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की तैयारी
यह दौरा ऐसे समय में आया है जब UP विधानसभा चुनाव 2027 में डेढ़ वर्ष से भी कम समय बचा है। निर्वाचन आयोग की इस पहल को चुनावी मशीनरी को पहले से सक्रिय करने और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।