24 अगस्त 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा: युवाओं और 500 बीएलओ से सीधा संवाद करेंगे

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा: युवाओं और 500 बीएलओ से सीधा संवाद करेंगे

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपनी 'तपोभूमि' लखनऊ में हैं — और यह दौरा महज औपचारिकता नहीं है। 1,500 छात्र, 500 बीएलओ और ईएलसी 2.0 का नया डिजिटल ढाँचा: यूपी के निर्वाचन तंत्र को जमीनी स्तर से पुनर्जीवित करने की यह कोशिश अगले विधानसभा चुनाव की आहट में और भी अहम हो जाती है।

मुख्य बातें

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार 24-25 अगस्त को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं।
24 अगस्त को 120 विधानसभा क्षेत्रों के 440 संस्थानों से करीब 1,500 विद्यार्थी क्षेत्रीय सम्मेलन में शामिल होंगे।
25 अगस्त को लखनऊ और आसपास के जिलों के करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों से सीधा संवाद होगा।
भारत निर्वाचन आयोग ईएलसी 2.0 के तहत स्कूलों-कॉलेजों में डिजिटल और अनुभवात्मक निर्वाचन साक्षरता मंच स्थापित करेगा।
ज्ञानेश कुमार ने 1979 और 1981 में यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं में प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था।
क्षेत्रीय सम्मेलन लखनऊ , मेरठ और वाराणसी — तीन चरणों में आयोजित होगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधिमंडल 24-25 अगस्त को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर है, जिसका मुख्य उद्देश्य युवा मतदाताओं में चुनावी साक्षरता बढ़ाना और जमीनी स्तर पर निर्वाचन तंत्र को सुदृढ़ करना है। लखनऊ पहुँचते ही ज्ञानेश कुमार ने इस शहर को अपनी 'तपोभूमि' बताया, जहाँ उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई और जिससे उनका गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'लखनऊ मेरी तपोभूमि रही है, यहाँ मेरी शिक्षा भी हुई है। हम उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को संदेश देने के लिए आए हैं। खासतौर से बूथ-लेवल अधिकारियों, जो लोकतंत्र की आधारशिला हैं, से संवाद होगा। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और स्कूलों में भी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और पूरी प्रक्रिया को समझाने के लिए कार्यक्रम होंगे।'

गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार ने वर्ष 1979 में हाईस्कूल और 1981 में इंटरमीडिएट की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईस्कूल में करीब 10 लाख और इंटरमीडिएट में करीब 6 लाख विद्यार्थियों के बीच यह उपलब्धि उन्होंने हासिल की थी।

कार्यक्रम का विस्तृत कार्यक्रम

24 अगस्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज के अवध सभागार में विद्यार्थियों से संवाद करेंगे — यही वह संस्थान है जहाँ उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई थी। इसके बाद वे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में ईएलसी 2.0 और ईसीआईनेट पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

यह क्षेत्रीय सम्मेलन उत्तर प्रदेश में तीन चरणों में — लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में — आयोजित किया जाएगा। लखनऊ चरण में 20 जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और मीडिया नोडल अधिकारी भाग लेंगे। 120 विधानसभा क्षेत्रों के 440 शैक्षणिक संस्थानों से करीब 1,500 विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य और संस्थान प्रमुख इसमें शामिल होंगे।

ईएलसी 2.0: नई पीढ़ी के लिए नया मंच

भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2018 में एसवीईईपी कार्यक्रम के अंतर्गत निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों और निर्वाचन प्रक्रिया से परिचित कराना था। अब डिजिटल युग की माँग और युवाओं की बदलती भागीदारी को देखते हुए इसे ईएलसी 2.0 के रूप में नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में क्लबों को वर्षभर सक्रिय, अनुभवात्मक और डिजिटल रूप से सक्षम मंच बनाने पर जोर दिया जाएगा।

सम्मेलन में विद्यार्थियों को मतदाता पंजीकरण, मतदान और मतगणना प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी लाइव डेमो के जरिए दी जाएगी। साथ ही ईसीआईनेट के डिजिटल तंत्र और नए ईएलसी पोर्टल के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों को ईएलसी 2.0 से जोड़ने की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी।

बीएलओ से सीधा संवाद

दौरे के दूसरे दिन 25 अगस्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मॉर्स हॉल में लखनऊ और आसपास के जिलों के करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधा संवाद करेंगे। बीएलओ मतदाता और निर्वाचन तंत्र के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं — मतदाता सूची को अद्यतन रखने, पात्र मतदाताओं को जोड़ने, घर-घर संपर्क करने और जमीनी सत्यापन में उनकी भूमिका अत्यंत निर्णायक होती है।

आम जनता और युवाओं पर असर

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि यह दो दिवसीय कार्यक्रम विद्यार्थियों और भावी मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ देने के साथ ही बीएलओ के जमीनी अनुभवों और सुझावों को सीधे आयोग तक पहुँचाने का अवसर देगा। इससे निर्वाचन प्रक्रिया को और प्रभावी, सुगम और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में आकार लेने लगी हैं और युवा मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाना आयोग की प्राथमिकता बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ईएलसी 2.0 जैसे कार्यक्रम क्या वास्तव में युवा मतदाताओं की भागीदारी में मापनीय बदलाव ला पाते हैं। ईएलसी का पहला संस्करण 2018 से चल रहा है, फिर भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में युवा मतदाता पंजीकरण राष्ट्रीय औसत से नीचे रहा है। बीएलओ से सीधे संवाद की पहल सराहनीय है, किंतु जब तक इन अधिकारियों की जवाबदेही और संसाधन-समर्थन नहीं बढ़ता, जमीनी सत्यापन की गुणवत्ता में स्थायी सुधार संदिग्ध रहेगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा किस उद्देश्य से है?
यह दो दिवसीय दौरा युवा मतदाताओं में चुनावी साक्षरता बढ़ाने, ईएलसी 2.0 कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और बूथ लेवल अधिकारियों से सीधा संवाद करने के लिए है। आयोग का लक्ष्य निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जन-सहभागी बनाना है।
ईएलसी 2.0 क्या है और यह पुराने ईएलसी से कैसे अलग है?
ईएलसी 2.0, निर्वाचन साक्षरता क्लब का उन्नत डिजिटल संस्करण है, जिसे भारत निर्वाचन आयोग ने 2018 में एसवीईईपी कार्यक्रम के तहत शुरू किया था। नए संस्करण में स्कूलों और कॉलेजों में वर्षभर सक्रिय, अनुभवात्मक और डिजिटल रूप से सक्षम मंच बनाने पर जोर है, जिसमें ईसीआईनेट पोर्टल के माध्यम से संस्थानों को जोड़ा जाएगा।
लखनऊ के क्षेत्रीय सम्मेलन में कितने लोग भाग लेंगे?
लखनऊ चरण में 20 जिलों के अधिकारियों के साथ-साथ 120 विधानसभा क्षेत्रों के 440 शैक्षणिक संस्थानों से करीब 1,500 विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य और संस्थान प्रमुख भाग लेंगे।
बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से संवाद कब और कहाँ होगा?
25 अगस्त को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मॉर्स हॉल में लखनऊ और आसपास के जिलों के करीब 500 बीएलओ से मुख्य निर्वाचन आयुक्त सीधा संवाद करेंगे। बीएलओ मतदाता सूची अद्यतन रखने और जमीनी सत्यापन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
ज्ञानेश कुमार का लखनऊ से क्या व्यक्तिगत जुड़ाव है?
ज्ञानेश कुमार ने लखनऊ को अपनी 'तपोभूमि' बताया है, जहाँ उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। उन्होंने 1979 में हाईस्कूल और 1981 में इंटरमीडिएट की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था — क्रमशः करीब 10 लाख और 6 लाख विद्यार्थियों के बीच।
राष्ट्र प्रेस
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