मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पटना में लॉन्च किया ईएलसी 2.0, 15 लाख स्कूलों तक पहुँचेगी चुनावी साक्षरता
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त 2026 को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित 'चुनावी साक्षरता क्लब और ईसीआईनेट' सम्मेलन के दौरान ईएलसी 2.0 — यानी इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के नए और उन्नत संस्करण — का औपचारिक लोकार्पण किया। भारत निर्वाचन आयोग की इस पहल का लक्ष्य देश के 15 लाख स्कूलों, 1,500 विश्वविद्यालयों और 70 हज़ार उच्च शिक्षण संस्थानों में चुनावी जागरूकता को संस्थागत रूप देना है।
ईएलसी 2.0: नई पहल में क्या है खास
ईएलसी 2.0 के तहत स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संचालित चुनावी साक्षरता क्लबों को डिजिटल रूप से सक्षम और व्यवस्थित प्लेटफॉर्म के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। इसके लिए आयोग के ईसीआईनेट डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग होगा, जहाँ एक ही क्लिक पर निर्वाचक नामावली से लेकर मतदान तक की समस्त चुनाव-संबंधी सेवाएँ उपलब्ध होंगी।
ईसीआईनेट पर एक समर्पित ईएलसी पोर्टल विकसित कर पूरे देश में इन क्लबों का सुव्यवस्थित नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इन क्लबों के माध्यम से वर्षभर निरंतर गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी, ताकि युवा नागरिकों के साथ-साथ उनके परिवार, शिक्षण संस्थान और समुदायों में भी चुनावी जागरूकता का विस्तार हो।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त का संबोधन
ज्ञानेश कुमार ने सम्मेलन में कहा कि शैक्षणिक संस्थान चुनावी प्रक्रियाओं में जनविश्वास को सुदृढ़ करने, साक्षरता बढ़ाने और सजग लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में चुनाव संविधान, कानून और निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं और हर चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने कहा, 'युवा नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ना लोकतंत्र के भविष्य में निवेश है।' कार्यक्रम में ईएलसी का नया लोगो और टैगलाइन 'लोकतंत्र को जानें, लोकतंत्र को आगे बढ़ाएं' भी जारी की गई, जो पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है।
भारत का शैक्षिक इकोसिस्टम: आँकड़े जो बताते हैं क्षमता
आयोग के अनुसार, भारत का शैक्षिक नेटवर्क अत्यंत विशाल है। देश में लगभग 15 लाख स्कूल हैं, जिनमें करीब 25 करोड़ छात्र और एक करोड़ से अधिक शिक्षक हैं। उच्च शिक्षा में लगभग 1,500 विश्वविद्यालय और 70 हज़ार शिक्षण संस्थान हैं, जहाँ अनुमानित 4.33 करोड़ छात्र अध्ययनरत हैं। ईएलसी 2.0 इसी विशाल आधार का उपयोग कर तथ्य और अनुभव-आधारित चुनावी शिक्षा देने का माध्यम बनेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब युवा मतदाताओं की भागीदारी को लेकर चुनावी विमर्श में लगातार चर्चा होती रही है। गौरतलब है कि पहले के ईएलसी संस्करण में डिजिटल एकीकरण की कमी एक प्रमुख सीमा मानी जाती थी — ईएलसी 2.0 इसी अंतर को पाटने का प्रयास है।
बिहार दौरे में जमीनी तैयारियों का जायज़ा
पटना कार्यक्रम से पूर्व, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने 16-17 अगस्त की दो दिवसीय बिहार यात्रा के दौरान नालंदा के राजगीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने मधुबनी, वैशाली और नालंदा क्षेत्रों का भी दौरा कर जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों का मूल्यांकन किया।
आगे की राह
ईएलसी 2.0 का उद्देश्य केवल मतदाता पंजीकरण या मतदान प्रतिशत बढ़ाने तक सीमित नहीं है — यह भारत की चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता के प्रति दीर्घकालिक जागरूकता निर्मित करने की कोशिश है। ईसीआईनेट पोर्टल के माध्यम से इन क्लबों की गतिविधियों की निगरानी और मापन भी संभव होगा, जो इस पहल को पिछले प्रयासों से अलग बनाता है।