मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फिजी उच्चायुक्त से मुलाकात, चुनावी सहयोग और प्रशिक्षण पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में फिजी गणराज्य के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी से मुलाकात की। इस बैठक में चुनाव प्रबंधन की बेहतरी और चुनावी कर्मचारियों के प्रशिक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने लोकतांत्रिक सहयोग को और प्रगाढ़ करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में क्या हुआ
चुनाव आयोग के अनुसार, दोनों पक्षों ने IICDEIM 2026 में तय की गई दृष्टि के अनुरूप लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर सहमति जताई। ज्ञानेश कुमार इंटरनेशनल आईडीईए के सदस्य देशों की परिषद के अध्यक्ष भी हैं, जो इस बैठक को केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय लोकतांत्रिक ढाँचे के भीतर स्थापित करता है। चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा की।
सहयोग के मुख्य बिंदु
दोनों देश चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में मिलकर काम करने और चुनावी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए एक साझा तंत्र विकसित करने पर सहमत हुए। यह बैठक भारत की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत विभिन्न लोकतांत्रिक देशों के साथ चुनावी प्रक्रियाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जा रहा है।
राजनयिक बैठकों की श्रृंखला
गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार की यह बैठक इस महीने की कई उच्चस्तरीय राजनयिक मुलाकातों में से एक है। इससे पहले वे मंगोलिया के राजदूत उल्जीत लुव्संजाव से मिले थे, जहाँ लोकतांत्रिक सहयोग और प्रशिक्षण पर चर्चा हुई। इसके अलावा कजाकिस्तान के राजदूत अज़ामत येस्करायेव के साथ भी चुनाव प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
इससे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने जॉर्जिया के राजदूत वख्तांग जाओशविली, उज्बेकिस्तान के राजदूत सरदोर रुस्तमबायेव और श्रीलंका की दूत महिशिनी कोलोन्ने से भी मुलाकात की थी। इन सभी बैठकों में चुनावी सहयोग और कर्मचारी प्रशिक्षण केंद्रीय विषय रहे।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत का चुनाव आयोग वैश्विक स्तर पर अपनी साख और प्रभाव को विस्तार देने में सक्रिय है। फिजी, मंगोलिया, कजाकिस्तान, जॉर्जिया, उज्बेकिस्तान और श्रीलंका — इन छह देशों के साथ एक ही महीने में बैठकें यह दर्शाती हैं कि भारत का चुनाव आयोग खुद को एक वैश्विक लोकतांत्रिक भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आगामी समय में इन साझेदारियों के ठोस परिणाम — जैसे संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम या तकनीकी सहायता समझौते — सामने आने की उम्मीद है।