सीईसी ज्ञानेश कुमार बोले: 'निष्पक्ष मतदाता सूची से ही निष्पक्ष चुनाव', अधिवक्ता सम्मेलन का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 31 मई 2025 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग के कानूनी ढाँचे और रणनीति को और सुदृढ़ करना है। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'निष्पक्ष मतदाता सूची से ही निष्पक्ष चुनाव होते हैं।'
सम्मेलन का विषय और उद्देश्य
इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में आयोजित इस एक दिवसीय सम्मेलन की थीम थी — 'ए ईयर ऑफ लीगल चैलेंजेस, एक्सपीरियंस, लर्निंग एंड द वे फॉरवर्ड'। यह आयोजन चुनाव आयोग और देशभर के कानूनी पेशेवरों के बीच संवाद, अनुभव-साझेदारी और रणनीतिक समन्वय के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा। सर्वोच्च न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों में आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं के साथ-साथ चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त का संबोधन
ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची की शुद्धता को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की बुनियाद बताते हुए कहा कि 'आज यही महत्त्वपूर्ण क्षण है, और भारत इसमें शामिल है।' उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) को मतदाता सूची प्रबंधन में जमीनी स्तर के 'योद्धा' बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।
उन्होंने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक मतदाता भागीदारी के लिए मतदाताओं को बधाई दी और इन चुनावों में उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा को भी रेखांकित किया। देशभर की अदालतों में आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के समर्पण की भी उन्होंने प्रशंसा की।
अन्य आयुक्तों की प्रतिक्रिया
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि यह एक दिवसीय सम्मेलन चुनाव आयोग और उसके कानूनी प्रतिनिधियों के बीच समन्वय को और प्रगाढ़ करेगा। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इसे उभरती कानूनी चुनौतियों पर विचार-विमर्श और प्रभावी कानूनी रणनीतियाँ तैयार करने का अवसर बताया, ताकि गतिशील चुनावी माहौल में चुनावी निष्पक्षता को बनाए रखा जा सके।
सम्मेलन में चर्चा के प्रमुख विषय
सम्मेलन के दौरान मतदाता सूची प्रबंधन, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदान और मतगणना प्रक्रियाओं तथा ईवीएम के प्रदर्शन पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा चुनाव कानूनों, न्यायिक प्रक्रियाओं, कानूनी सुधारों, संस्थागत समन्वय, मीडिया की भूमिका और चुनाव आयोग की प्रौद्योगिकी-आधारित पहलों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
यह सम्मेलन 2025 में आयोजित चुनाव आयोग सलाहकारों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अगली कड़ी है। इसमें पिछले वर्ष हुई प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ आयोग के कानूनी ढाँचे को और मज़बूत करने के लिए प्राथमिकताओं की पहचान की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के नियमित संवाद से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। आने वाले वर्षों में चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए यह कानूनी तैयारी निर्णायक भूमिका निभाएगी।