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क्या शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है? सीईसी ज्ञानेश कुमार

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क्या शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है? सीईसी ज्ञानेश कुमार

सारांश

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देवघर में कहा कि शुद्ध मतदाता सूची ही लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने इस मुद्दे पर बीएलओ के साथ संवाद करते हुए लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। जानिए इस संवाद में उन्होंने क्या कहा।

मुख्य बातें

शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है।
बीएलओ को लोकतंत्र के अदृश्य नायक कहा गया।
एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी और सरल है।
कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित नहीं रहना चाहिए।
भारत निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक पहचान पत्र उपलब्ध कराए हैं।

देवघर/दुमका, ५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है और इसमें किसी भी गैर-नागरिक का नाम होना संविधान के खिलाफ है।

ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को झारखंड के देवघर और दुमका जिले में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर्स) से संवाद के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया फिलहाल देश के १२ राज्यों में शुरू की गई है, जिसे आने वाले समय में पूरे देश में लागू किया जाएगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र का अगला पर्व ‘आम चुनाव’ शुद्ध मतदाता सूची के साथ ही मनाया जाएगा। दो दिवसीय दौरे पर देवघर-दुमका आए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बूथ लेवल ऑफिसर्स के साथ संवाद के दौरान चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सरल है, जिसमें जिला स्तर पर तैयार सूची के बाद भी दावा (क्लेम) और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति उस चरण में शामिल नहीं हो पाता तो उसे निरीक्षण और अपील के लिए लगभग एक महीने का अतिरिक्त समय मिलता है। इसी क्रम में भविष्य में झारखंड में भी एसआईआर लागू किया जाएगा।

सीईसी ज्ञानेश कुमार ने देवघर के तपोवन स्थित श्रीश्री मोहनानंद विद्यालय में आयोजित बीएलओ संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे लोकतंत्र का आधार शुद्ध मतदाता सूची है, वैसे ही शुद्ध मतदाता सूची का आधार उसे तैयार करने वाले बीएलओ हैं। उन्होंने बीएलओ को लोकतंत्र के 'अदृश्य नायक' बताते हुए कहा कि आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।

उन्होंने एसआईआर में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कई बार डोर-टू-डोर सत्यापन के दौरान बीएलओ के पास पहचान पत्र नहीं होते थे, जिससे लोगों में संशय रहता था। अब भारत निर्वाचन आयोग की ओर से उन्हें आधिकारिक पहचान पत्र उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दो दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने झारखंड में चुनावी व्यवस्थाओं की तैयारियों को करीब से देखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब भी राज्य में गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की घोषणा होगी, उसे पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। यह आवश्यक है कि सभी भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार का पूर्णतः लाभ मिले। इसके लिए बीएलओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुद्ध मतदाता सूची का क्या महत्व है?
शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है, जिससे सभी पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार मिलता है।
बीएलओ की भूमिका क्या होती है?
बीएलओ का कार्य मतदाता सूची को सही बनाना और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धिकरण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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