उत्तराखंड में त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर सख्ती, देहरादून से हरिद्वार तक छापेमारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड सरकार ने 25 अगस्त 2026 को आगामी त्योहारी सीजन — रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दिवाली — को देखते हुए राज्यभर में मिलावटखोरों और जमाखोरों के विरुद्ध व्यापक प्रवर्तन अभियान छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में सप्ताहभर की विशेष जाँच शुरू की गई है और डिविजनल कमिश्नरों को इस अभियान की सीधी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
पूरे उत्तराखंड में खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, नमूना संग्रह और मौके पर नष्टीकरण की कार्रवाई एक साथ चल रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एक्सपायर हो चुके, खराब और घटिया गुणवत्ता के खाद्य सामान को तत्काल नष्ट किया जाए। नियम उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कई मामलों में न्यायालय में अभियोजन भी शुरू किया गया है।
अधिकारी आवश्यक वस्तुओं — विशेषकर चीनी — की जमाखोरी और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं।
जिलेवार कार्रवाई का ब्यौरा
देहरादून में सोमवार को 11 खाद्य नमूने लिए गए। 1 अगस्त से अब तक जिले में 70 प्रतिष्ठानों की जाँच हो चुकी है और 48 नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। हरिद्वार में 47 प्रतिष्ठानों की जाँच की गई और 27 नमूने संग्रहीत किए गए।
नैनीताल में 10 दुकानों की जाँच हुई, 6 नमूने लिए गए और 10 किलो घटिया मिठाइयाँ मौके पर नष्ट कर दी गईं। पौड़ी में 10, बागेश्वर में 3, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में 2-2, टिहरी में 6 और उत्तरकाशी में 4 नमूने लिए गए। चंपावत में 21 स्थानों की जाँच की गई और 10 नमूने प्रयोगशाला को भेजे गए।
FSSAI की भूमिका और राष्ट्रीय ढाँचा
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) राज्य अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए देशभर में जीरो-टॉलरेंस नीति लागू कर रहा है। इसमें मोबाइल टेस्टिंग लैब और कड़े कानूनी दंड का सहारा लिया जा रहा है। रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (RBIS) के तहत डेयरी, मसाले और खाद्य तेल जैसी उच्च-जोखिम श्रेणियों को प्राथमिकता दी जाती है।
देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 से अधिक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी (MFTL) — जिन्हें 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' कहा जाता है — तत्काल जाँच के लिए सक्रिय हैं। नियामक कार्रवाई के तहत अब तक हजारों दोषियों पर जुर्माना लगाया जा चुका है, लाइसेंस रद्द किए गए हैं और सजाएँ सुनाई गई हैं।
कानूनी प्रावधान और दंड
प्रस्तावित नियमों के अनुसार गंभीर उल्लंघन पर ₹10 लाख तक का जुर्माना और आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब त्योहारी माँग के चलते मिठाइयों, दूध और खाद्य तेलों में मिलावट की आशंका परंपरागत रूप से बढ़ जाती है।
आगे क्या
अभियान अगले कई हफ्तों तक जारी रहने की संभावना है, क्योंकि त्योहारों का सिलसिला अक्टूबर-नवंबर तक चलेगा। प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों के परिणाम आने के बाद दोषी प्रतिष्ठानों पर और कार्रवाई अपेक्षित है।