25 अगस्त 2026
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उत्तराखंड में त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर सख्ती, देहरादून से हरिद्वार तक छापेमारी

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उत्तराखंड में त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर सख्ती, देहरादून से हरिद्वार तक छापेमारी

सारांश

रक्षा बंधन से दिवाली तक के त्योहारी सीजन से पहले उत्तराखंड सरकार ने मिलावटखोरों और जमाखोरों के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान छेड़ा है। देहरादून में 70, हरिद्वार में 47 और चंपावत में 21 प्रतिष्ठानों की जाँच हो चुकी है। FSSAI की 305 मोबाइल लैब और ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान इस अभियान को दाँत दे रहा है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड सरकार ने 25 अगस्त 2026 को त्योहारी सीजन से पहले राज्यव्यापी मिलावट-विरोधी अभियान शुरू किया।
देहरादून में 1 अगस्त से अब तक 70 प्रतिष्ठानों की जाँच, 48 नमूने प्रयोगशाला को भेजे गए।
हरिद्वार में 47 , चंपावत में 21 और नैनीताल में 10 प्रतिष्ठानों की जाँच; नैनीताल में 10 किलो घटिया मिठाई नष्ट।
अधिकारी चीनी की जमाखोरी और घरेलू LPG सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग पर भी नजर रख रहे हैं।
FSSAI की देशभर में 305 से अधिक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब सक्रिय; गंभीर उल्लंघन पर ₹10 लाख तक जुर्माना और आजीवन कारावास का प्रावधान।

उत्तराखंड सरकार ने 25 अगस्त 2026 को आगामी त्योहारी सीजन — रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दिवाली — को देखते हुए राज्यभर में मिलावटखोरों और जमाखोरों के विरुद्ध व्यापक प्रवर्तन अभियान छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में सप्ताहभर की विशेष जाँच शुरू की गई है और डिविजनल कमिश्नरों को इस अभियान की सीधी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

पूरे उत्तराखंड में खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, नमूना संग्रह और मौके पर नष्टीकरण की कार्रवाई एक साथ चल रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एक्सपायर हो चुके, खराब और घटिया गुणवत्ता के खाद्य सामान को तत्काल नष्ट किया जाए। नियम उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कई मामलों में न्यायालय में अभियोजन भी शुरू किया गया है।

अधिकारी आवश्यक वस्तुओं — विशेषकर चीनी — की जमाखोरी और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं।

जिलेवार कार्रवाई का ब्यौरा

देहरादून में सोमवार को 11 खाद्य नमूने लिए गए। 1 अगस्त से अब तक जिले में 70 प्रतिष्ठानों की जाँच हो चुकी है और 48 नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। हरिद्वार में 47 प्रतिष्ठानों की जाँच की गई और 27 नमूने संग्रहीत किए गए।

नैनीताल में 10 दुकानों की जाँच हुई, 6 नमूने लिए गए और 10 किलो घटिया मिठाइयाँ मौके पर नष्ट कर दी गईं। पौड़ी में 10, बागेश्वर में 3, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में 2-2, टिहरी में 6 और उत्तरकाशी में 4 नमूने लिए गए। चंपावत में 21 स्थानों की जाँच की गई और 10 नमूने प्रयोगशाला को भेजे गए।

FSSAI की भूमिका और राष्ट्रीय ढाँचा

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) राज्य अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए देशभर में जीरो-टॉलरेंस नीति लागू कर रहा है। इसमें मोबाइल टेस्टिंग लैब और कड़े कानूनी दंड का सहारा लिया जा रहा है। रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (RBIS) के तहत डेयरी, मसाले और खाद्य तेल जैसी उच्च-जोखिम श्रेणियों को प्राथमिकता दी जाती है।

देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 से अधिक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी (MFTL) — जिन्हें 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' कहा जाता है — तत्काल जाँच के लिए सक्रिय हैं। नियामक कार्रवाई के तहत अब तक हजारों दोषियों पर जुर्माना लगाया जा चुका है, लाइसेंस रद्द किए गए हैं और सजाएँ सुनाई गई हैं।

कानूनी प्रावधान और दंड

प्रस्तावित नियमों के अनुसार गंभीर उल्लंघन पर ₹10 लाख तक का जुर्माना और आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब त्योहारी माँग के चलते मिठाइयों, दूध और खाद्य तेलों में मिलावट की आशंका परंपरागत रूप से बढ़ जाती है।

आगे क्या

अभियान अगले कई हफ्तों तक जारी रहने की संभावना है, क्योंकि त्योहारों का सिलसिला अक्टूबर-नवंबर तक चलेगा। प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों के परिणाम आने के बाद दोषी प्रतिष्ठानों पर और कार्रवाई अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दर्जनों नमूने — प्रभावशाली लगते हैं, पर जब तक प्रयोगशाला परिणाम सार्वजनिक नहीं होते और दंड की वसूली सुनिश्चित नहीं होती, यह अभियान केवल दिखावटी सख्ती बनकर रह सकता है। FSSAI का RBIS ढाँचा सही दिशा में है, लेकिन राज्यस्तरीय क्षमता — प्रयोगशालाएँ, अभियोजन तंत्र — अक्सर कमजोर कड़ी साबित होती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में मिलावट-विरोधी अभियान क्यों शुरू किया गया है?
रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले खाद्य पदार्थों में मिलावट और जमाखोरी की आशंका बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में सप्ताहभर का विशेष प्रवर्तन अभियान शुरू किया है।
अब तक कितने प्रतिष्ठानों की जाँच हुई और कितने नमूने लिए गए?
1 अगस्त से अब तक देहरादून में 70 प्रतिष्ठानों की जाँच और 48 नमूने, हरिद्वार में 47 प्रतिष्ठान और 27 नमूने, तथा चंपावत में 21 स्थानों की जाँच और 10 नमूने लिए जा चुके हैं। नैनीताल में 10 किलो घटिया मिठाइयाँ मौके पर नष्ट की गई हैं।
मिलावटखोरी पर क्या कानूनी दंड का प्रावधान है?
प्रस्तावित नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन पर ₹10 लाख तक का जुर्माना और आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। अब तक हजारों दोषियों पर जुर्माना लगाया जा चुका है और लाइसेंस रद्द किए गए हैं।
FSSAI इस अभियान में क्या भूमिका निभा रहा है?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। देशभर में 305 से अधिक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी (फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स) तैनात हैं, जो मौके पर तत्काल जाँच करती हैं। FSSAI का रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम डेयरी, मसाले और खाद्य तेल जैसी उच्च-जोखिम श्रेणियों को प्राथमिकता देता है।
क्या केवल खाद्य मिलावट पर ही कार्रवाई हो रही है?
नहीं, अधिकारी चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और घरेलू LPG सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग पर भी निगरानी रख रहे हैं। नियम उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कई मामलों में न्यायालय में अभियोजन भी शुरू किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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