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विवेक राजदान: सचिन तेंदुलकर संग वनडे डेब्यू, 2 टेस्ट और 3 वनडे का छोटा करियर — फिर 'टूटा है गाबा का घमंड' से बनी अमर पहचान

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विवेक राजदान: सचिन तेंदुलकर संग वनडे डेब्यू, 2 टेस्ट और 3 वनडे का छोटा करियर — फिर 'टूटा है गाबा का घमंड' से बनी अमर पहचान

सारांश

मैदान पर करियर महज 2 टेस्ट और 3 वनडे तक सिमटा, लेकिन विवेक राजदान ने कमेंट्री बॉक्स से वह पल दिया जो गाबा की जीत के साथ हमेशा याद किया जाएगा — 'टूटा है गाबा का घमंड'। 25 अगस्त को जन्मदिन पर जानिए उनकी पूरी कहानी।

मुख्य बातें

विवेक राजदान का जन्म 25 अगस्त, 1969 को नई दिल्ली में हुआ।
उन्होंने 18 दिसंबर, 1989 को सचिन तेंदुलकर के साथ पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया।
सियालकोट टेस्ट में 79 रन देकर 5 विकेट — यह उनका सर्वश्रेष्ठ और अंतिम टेस्ट प्रदर्शन रहा।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 29 मैचों में 67 विकेट और 700 रन ; लिस्ट-ए में 18 मैचों में 14 विकेट ।
2020-21 गाबा टेस्ट में उनकी कमेंट्री लाइन 'टूटा है गाबा का घमंड' क्रिकेट प्रेमियों के बीच अमर हो गई।

भारत के पूर्व तेज गेंदबाज विवेक राजदान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भले ही बहुत कम मैच खेले, लेकिन कमेंट्री बॉक्स में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया जो लाखों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में दर्ज है। 18 दिसंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए वनडे मुकाबले में उन्होंने सचिन तेंदुलकर के साथ एक साथ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया — क्रिकेट इतिहास का एक यादगार संयोग।

प्रारंभिक जीवन और घरेलू क्रिकेट

25 अगस्त, 1969 को नई दिल्ली में जन्मे विवेक राजदान को बचपन से ही क्रिकेट का गहरा शौक था। तेज गेंदबाज के रूप में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग छाप छोड़ी। 29 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 67 विकेट चटकाए और बल्ले से भी 700 रन जोड़े। लिस्ट-ए क्रिकेट में 18 मुकाबलों में उनके नाम 14 विकेट दर्ज हैं। यह संतुलित प्रदर्शन ही था जिसने उन्हें राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नज़र में ला खड़ा किया।

अंतरराष्ट्रीय करियर: संक्षिप्त पर यादगार

घरेलू क्रिकेट में निरंतर अच्छे प्रदर्शन के बाद 1989 में विवेक को भारतीय टीम में जगह मिली। पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्हें पहली बार विश्व मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। पहले टेस्ट में वे कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ सके, लेकिन सियालकोट में खेले गए टेस्ट में उन्होंने 79 रन देकर 5 विकेट लेकर सबका ध्यान खींचा। दुर्भाग्यवश, यह उनका आखिरी टेस्ट मैच साबित हुआ।

वनडे क्रिकेट में राजदान ने भारत के लिए 3 मैच खेले और 1 विकेट हासिल किया। इस सीरीज के बाद वे धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर होते चले गए और राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी नहीं हो सकी। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर थी।

कमेंट्री की दुनिया में नई पहचान

खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद विवेक राजदान ने कमेंटेटर की भूमिका में एक नई पारी शुरू की। उनकी आवाज़ और क्रिकेट की गहरी समझ ने उन्हें इस क्षेत्र में भी अलग मुकाम दिलाया। 2020-21 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज के दौरान उनकी कमेंट्री चर्चा का विषय बनी।

'टूटा है गाबा का घमंड' — एक अमर पल

गाबा टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक जीत के अंतिम क्षणों में विवेक राजदान के मुँह से निकले शब्द — 'टूटा है गाबा का घमंड' — क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए बस गए। गाबा का मैदान उस समय 32 वर्षों से ऑस्ट्रेलिया का अजेय किला माना जाता था, और भारत की उस जीत को जिस भावनात्मक शब्दों में राजदान ने बयान किया, वह कमेंट्री इतिहास में अमर हो गई। यह पंक्ति आज भी सोशल मीडिया पर बार-बार साझा की जाती है, जो उनकी भाषाई पकड़ और खेल के प्रति जुनून का प्रमाण है।

विवेक राजदान की यात्रा यह साबित करती है कि क्रिकेट में योगदान केवल मैदान पर रनों और विकेटों से नहीं मापा जाता — कभी-कभी सही वक्त पर कहे गए सही शब्द भी इतिहास बन जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ 'टूटा है गाबा का घमंड' जैसी एक पंक्ति ने उन्हें करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का चहेता बना दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि खेल से जुड़ाव केवल मैदान तक सीमित नहीं होता — सही शब्द, सही भावना और सही क्षण मिलकर इतिहास रचते हैं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवेक राजदान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कितने मैच खेले?
विवेक राजदान ने भारत के लिए कुल 2 टेस्ट और 3 वनडे मैच खेले। टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सियालकोट में पाकिस्तान के खिलाफ 79 रन देकर 5 विकेट था, जबकि वनडे में उन्होंने कुल 1 विकेट लिया।
विवेक राजदान ने सचिन तेंदुलकर के साथ डेब्यू कब किया?
विवेक राजदान और सचिन तेंदुलकर दोनों ने 18 दिसंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ एक ही वनडे मैच में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। यह भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक उल्लेखनीय संयोग है।
'टूटा है गाबा का घमंड' कमेंट्री किस मैच में आई?
यह प्रसिद्ध कमेंट्री 2020-21 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई टेस्ट सीरीज के गाबा टेस्ट के अंतिम क्षणों में विवेक राजदान ने की थी। भारत ने उस मैच में ऑस्ट्रेलिया को उसके अजेय गढ़ में हराया था, और राजदान के यह शब्द क्रिकेट प्रेमियों के बीच अमर हो गए।
विवेक राजदान का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड कैसा रहा?
विवेक राजदान ने 29 प्रथम श्रेणी मैचों में 67 विकेट लिए और बल्ले से 700 रन भी बनाए। लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 18 मैचों में 14 विकेट चटकाए। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें 1989 में भारतीय टीम में जगह मिली।
विवेक राजदान का जन्म कब और कहाँ हुआ?
विवेक राजदान का जन्म 25 अगस्त, 1969 को नई दिल्ली में हुआ। बचपन से क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव था और उन्होंने तेज गेंदबाज के रूप में अपना करियर बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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