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डिजिटल स्क्रीन से थकी आँखों के लिए आयुर्वेद के ५ आसान उपाय, जानें कैसे रखें नज़र दुरुस्त

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डिजिटल स्क्रीन से थकी आँखों के लिए आयुर्वेद के ५ आसान उपाय, जानें कैसे रखें नज़र दुरुस्त

सारांश

मोबाइल और स्क्रीन के बढ़ते उपयोग से आँखों की तकलीफ़ें आम होती जा रही हैं। आयुर्वेद के पादाभ्यंग, पामिंग और त्राटक जैसे सदियों पुराने उपाय डिजिटल युग में भी प्रासंगिक बने हुए हैं — बशर्ते इन्हें सही तरीके से अपनाया जाए।

मुख्य बातें

आयुर्वेद के अनुसार आँखों की समस्याओं के तीन मुख्य कारण हैं — अत्यधिक उपयोग, अनियमित जीवनशैली और मौसमी बदलाव ।
पादाभ्यंग (गुनगुने तेल से पैरों की मालिश) आँखों की थकान कम करने में सहायक मानी जाती है।
पामिंग — हथेलियों से बंद आँखें ढकना — नेत्र-तनाव घटाने की सरलतम तकनीक है।
त्राटक और हल्की धूप में बैठना पारंपरिक नेत्र-अभ्यास हैं; विशेषज्ञ मार्गदर्शन में करें।
लगातार दर्द, धुंधलापन या जलन होने पर नेत्र-चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य है।

स्क्रीन टाइम में तेज़ी से हो रही वृद्धि के बीच आँखों की आयुर्वेदिक देखभाल आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। मोबाइल, कंप्यूटर और टेलीविज़न के लगातार उपयोग से आँखों में थकान, जलन, सूखापन और दृष्टि से जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं। आयुर्वेद में आँखों को शरीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग माना गया है और परंपरागत ग्रंथों में इन्हें स्वस्थ रखने के लिए कई व्यावहारिक उपाय सुझाए गए हैं।

आयुर्वेद के अनुसार आँखों की समस्याओं के मूल कारण

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार आँखों की तकलीफ़ के पीछे मुख्यतः तीन कारण होते हैं — आँखों का अत्यधिक या गलत उपयोग, अनियमित जीवनशैली, और मौसमी बदलाव। इन तीनों कारणों से बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और प्राकृतिक उपायों को अपनाने की सलाह दी जाती है।

पादाभ्यंग और ठंडे पानी से राहत

आयुर्वेद में पादाभ्यंग — अर्थात् गुनगुने तेल से पैरों की नियमित मालिश — को आँखों की थकान कम करने में सहायक बताया गया है। माना जाता है कि पैरों के तलवों में स्थित नाड़ी-बिंदु आँखों से जुड़े होते हैं, इसलिए यह अभ्यास समग्र नेत्र-स्वास्थ्य में योगदान देता है। इसके अतिरिक्त दिन में कई बार ठंडे पानी के छींटे आँखों पर मारने से तत्काल ताज़गी और राहत मिलती है।

पामिंग और नेत्र-व्यायाम

आयुर्वेद एवं योग परंपरा में पामिंग को सरलतम नेत्र-विश्राम तकनीक माना जाता है — आँखें बंद कर गर्म हथेलियों से उन्हें ढककर कुछ मिनट आराम करने से आँखों का तनाव घटता है। इसी प्रकार आँखों को धीरे-धीरे दाएँ-बाएँ और ऊपर-नीचे घुमाना नेत्र-मांसपेशियों को सक्रिय रखने में सहायक हो सकता है।

त्राटक और सूर्य-प्रकाश अभ्यास

पारंपरिक योग-पद्धति में त्राटक — मोमबत्ती की लौ या किसी एक बिंदु पर एकाग्र दृष्टि टिकाना — और सुबह की हल्की धूप में बैठना आँखों के लिए उपयोगी माने जाते हैं। हालाँकि इन अभ्यासों को किसी जानकार के मार्गदर्शन में ही करने की सलाह दी जाती है।

बचाव के उपाय और विशेषज्ञ परामर्श

आँखों को दीर्घकालिक नुकसान से बचाने के लिए लंबे समय तक स्क्रीन देखने से परहेज़, पर्याप्त नींद और पढ़ते समय उचित रोशनी व सही दूरी बनाए रखना ज़रूरी है। हर २०-२०-२० नियम — यानी हर २० मिनट बाद २० फ़ीट दूर किसी वस्तु को २० सेकंड तक देखना — को आधुनिक नेत्र-विशेषज्ञ भी उपयोगी मानते हैं। यदि धुंधला दिखना, लगातार दर्द या जलन जैसी शिकायतें बनी रहें तो किसी योग्य नेत्र-चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए — घरेलू उपाय पेशेवर चिकित्सा के विकल्प नहीं हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि इनमें से अधिकांश दावों के पक्ष में बड़े पैमाने पर नैदानिक प्रमाण सीमित हैं। पादाभ्यंग और पामिंग जैसे अभ्यास आराम दे सकते हैं, पर ये डायबिटिक रेटिनोपैथी या ग्लूकोमा जैसी गंभीर स्थितियों का विकल्प नहीं हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर परंपरागत ज्ञान और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा के बीच की इस महीन रेखा को नज़रअंदाज़ कर देती है। पाठकों के हित में यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि घरेलू उपाय पेशेवर नेत्र-परीक्षण की जगह नहीं ले सकते।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद में आँखों की देखभाल के लिए कौन-से मुख्य उपाय बताए गए हैं?
आयुर्वेद में पादाभ्यंग (पैरों की तेल-मालिश), पामिंग, त्राटक और ठंडे पानी से आँखें धोना मुख्य नेत्र-देखभाल उपाय माने जाते हैं। ये अभ्यास आँखों की थकान और तनाव कम करने में सहायक बताए जाते हैं।
पामिंग क्या है और इसे कैसे करें?
पामिंग एक सरल नेत्र-विश्राम तकनीक है जिसमें आँखें बंद कर गर्म हथेलियों से उन्हें कुछ मिनट ढका जाता है। इससे आँखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और स्क्रीन से होने वाला तनाव कम होता है।
डिजिटल स्क्रीन से आँखों को नुकसान क्यों होता है?
लगातार स्क्रीन देखने से आँखें कम झपकती हैं, जिससे सूखापन, जलन और थकान होती है। आयुर्वेद के अनुसार यह आँखों का 'अत्यधिक और गलत उपयोग' की श्रेणी में आता है, जो नेत्र-दोष का एक प्रमुख कारण है।
आँखों में लगातार दर्द या धुंधलापन हो तो क्या करें?
लंबे समय तक आँखों में दर्द, धुंधला दिखना या जलन बनी रहे तो तुरंत किसी योग्य नेत्र-चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय गंभीर नेत्र-रोगों का विकल्प नहीं हैं।
त्राटक अभ्यास आँखों के लिए कैसे फ़ायदेमंद है?
त्राटक एक पारंपरिक योग अभ्यास है जिसमें मोमबत्ती की लौ या किसी बिंदु पर एकाग्र दृष्टि टिकाई जाती है। इसे आँखों की एकाग्रता और मांसपेशियों की सक्रियता के लिए उपयोगी माना जाता है, हालाँकि इसे किसी जानकार के मार्गदर्शन में करने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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