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डिजिटल युग में आंखों के स्वास्थ्य का संकट: आयुर्वेद से पाएं राहत

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डिजिटल युग में आंखों के स्वास्थ्य का संकट: आयुर्वेद से पाएं राहत

सारांश

क्या आप जानते हैं कि डिजिटल उपकरणों की अत्यधिक उपयोग से आपकी आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है? इस लेख में, हम आयुर्वेद के माध्यम से आंखों के तनाव को कम करने के सरल उपाय बताएंगे।

मुख्य बातें

डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
आंखों की सेहत के लिए आयुर्वेदिक उपाय लाभकारी हैं।
पाचन का स्वास्थ्य आंखों की रोशनी से जुड़ा हुआ है।
रात में स्क्रीन से दूरी बनाना आवश्यक है।
पलकों को नियमित रूप से झपकाना आंखों के लिए फायदेमंद है।

नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान की जीवनशैली इस प्रकार बदल चुकी है कि हर कार्य अब कंप्यूटर या मोबाइल पर निर्भर हो गया है। सुबह उठते ही मोबाइल स्क्रीन से लेकर रात में सोने से पहले तक, डिजिटल उपकरणों की रोशनी हमारी आंखों और मस्तिष्क पर निरंतर दबाव डालती है।

घंटों तक स्क्रीन देखना हमारी आंखों पर तनाव उत्पन्न करता है और सिर में भारीपन का अनुभव कराता है। इसके परिणामस्वरूप नींद और भोजन की आदतें भी प्रभावित होती हैं। यदि यह समस्या लंबे समय तक चलती है, तो आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

डिजिटल युग में शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक तनाव का स्तर बढ़ गया है, जिसका मुख्य कारण हमारी खराब जीवनशैली और अत्यधिक डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता है। इससे न केवल बेवजह तनाव का अनुभव होता है, बल्कि आंखों में जलन, सिरदर्द, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। हालांकि, आयुर्वेद में इन सभी समस्याओं का समाधान संभव है। कुछ सरल उपायों से आंखों के तनाव को कम किया जा सकता है।

काम करते समय हम अक्सर पलकों को झपकाना भूल जाते हैं, जिसके कारण आंखों में पानी की कमी और सूखापन बढ़ता है। इसलिए, कोशिश करें कि पलकों को नियमित रूप से झपकाते रहें और स्क्रीन को लगातार न देखें। इससे आंखों को कम नुकसान होता है और तनाव भी घटता है। आयुर्वेद के अनुसार, रात के समय कफ का स्तर बढ़ता है, और इस दौरान शरीर को आराम देने की आवश्यकता होती है। मोबाइल स्क्रीन पर देर रात तक ध्यान केंद्रित करने से नींद में बाधा आती है और मस्तिष्क मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, यह कफ और पित्त का असंतुलन उत्पन्न करता है। इसलिए, रात के समय स्क्रीन से दूरी बनाए रखें।

कम ही लोग जानते हैं कि आंखों का स्वास्थ्य पाचन से भी जुड़ा हुआ है। यदि पाचन कमजोर है, तो आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ता है, क्योंकि आंखों को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता। लगातार स्क्रीन देखने से मानसिक तनाव बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और भोजन ठीक से नहीं पचता। इसलिए, अपने पाचन का ध्यान रखें।

आंखों की थकान को कम करने के लिए त्रिफला के पानी से आंखों की सफाई, घी से पोषण और ठंडे पानी से आंखों को धोने के उपाय भी कारगर हैं। ये उपाय आंखों के तनाव को कम करने में सहायता करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि डिजिटल उपकरणों की बढ़ती निर्भरता ने हमारे स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता है ताकि हम अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे सकें। आयुर्वेद का ज्ञान इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संसाधन है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंखों के तनाव को कम करने के लिए कौन से आयुर्वेदिक उपाय हैं?
त्रिफला के पानी से आंखों की सफाई, घी से पोषण और ठंडे पानी से आंखों को धोने से तनाव कम होता है।
क्या पाचन का आंखों पर असर होता है?
हां, कमजोर पाचन आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकता है क्योंकि आंखों को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता।
राष्ट्र प्रेस
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