जी. सुधाकरन बने केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर, राज्यपाल आर्लेकर ने दिलाई शपथ

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जी. सुधाकरन बने केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर, राज्यपाल आर्लेकर ने दिलाई शपथ

सारांश

सीपीएम छोड़कर निर्दलीय जीते जी. सुधाकरन अब केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर बन गए हैं — यूडीएफ की 102 सीटों की प्रचंड बहुमत वाली नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण पड़ाव।

मुख्य बातें

सुधाकरन ने 20 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम के लोक भवन में केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शपथ दिलाई; मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन और कैबिनेट सदस्य मौजूद रहे।
सुधाकरन गुरुवार को 139 नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे; शुक्रवार को नए स्पीकर का चुनाव होगा।
यूडीएफ के पास 102 सीटें ; एलडीएफ सिमटकर 35 पर, BJP ने 3 सीटों से खाता खोला।
कांग्रेस नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन के स्थायी स्पीकर बनने की प्रबल संभावना।
सुधाकरन सीपीएम से अलग होकर अंबालापुझा से निर्दलीय जीते; यूडीएफ के समर्थन से विजयी हुए।

केरल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में अनुभवी विधायक जी. सुधाकरन ने 20 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम के लोक भवन में शपथ ग्रहण की। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई, जिस अवसर पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और उनके कैबिनेट सहयोगी भी उपस्थित रहे। सुधाकरन सीपीएम के पूर्व वरिष्ठ नेता हैं, जिन्होंने हाल के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।

प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारियाँ

गुरुवार को सुधाकरन विधानसभा में 139 नवनिर्वाचित विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। उनका यह कार्यकाल अस्थायी है — शुक्रवार को नए स्पीकर के चुनाव के साथ ही यह समाप्त हो जाएगा। गौरतलब है कि प्रोटेम स्पीकर की भूमिका संवैधानिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है, जो नई विधानसभा के गठन के समय सदन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नियुक्त की जाती है।

स्पीकर पद के लिए संभावित चेहरा

सत्ताधारी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के पास विधानसभा में 102 सीटें हैं, जो बहुमत से कहीं अधिक है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन के स्थायी स्पीकर चुने जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सीटें घटकर मात्र 35 रह गई हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 3 सीटों के साथ केरल विधानसभा में पहली बार खाता खोला है।

सुधाकरन का राजनीतिक सफर

सुधाकरन कभी दक्षिण केरल में सीपीएम के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते थे। वह दो बार मंत्री रह चुके हैं और वामपंथी शासन के दौरान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान रही। चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी की आधिकारिक लाइन के विरुद्ध जाकर अपने पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र अंबालापुझा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद यूडीएफ ने उन्हें अपना समर्थन दिया, जिससे वह विजयी हुए।

सीपीएम विधायकों पर नजर

प्रक्रियागत औपचारिकताओं से परे, राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा है कि जब सुधाकरन प्रोटेम स्पीकर की कुर्सी संभालेंगे, तब सदन के भीतर सीपीएम के विधायक किस रुख के साथ पेश आएंगे। सुधाकरन का पार्टी से अलग होकर यूडीएफ के समर्थन से जीतना, केरल की राजनीति में एक उल्लेखनीय बदलाव का संकेत है।

नई सरकार का गठन

इससे पहले सोमवार को वी.डी. सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। राज्यपाल आर्लेकर ने उन्हें और उनके 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई थी। अब विधायकों की शपथ और स्पीकर के चुनाव के साथ नई विधानसभा का औपचारिक कामकाज शुरू होने की दिशा में अंतिम कदम उठाए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल की बदलती राजनीतिक धारा का प्रतीक है — एक दशक से अधिक समय तक वाम गढ़ रहे राज्य में अब सीपीएम का एक पूर्व स्तंभ यूडीएफ की छत्रछाया में सदन की अध्यक्षता कर रहा है। यह उस व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जिसमें वामपंथ के भीतर से ही असंतोष उभरकर विपक्ष को मजबूत कर रहा है। सदन में सीपीएम के मात्र 35 विधायकों का रह जाना और BJP का पहली बार खाता खोलना यह संकेत देता है कि केरल की द्विध्रुवीय राजनीति में एक नई दरार पड़ रही है। असली परीक्षा यह होगी कि यूडीएफ अपनी प्रचंड बहुमत का उपयोग शासन सुधार के लिए करती है या केवल संख्या-बल का प्रदर्शन बनकर रह जाती है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी. सुधाकरन को केरल विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर क्यों बनाया गया?
राज्य कैबिनेट ने सोमवार को जी. सुधाकरन को प्रोटेम स्पीकर के रूप में नामित किया, क्योंकि नई विधानसभा के गठन के बाद स्थायी स्पीकर के चुनाव तक सदन संचालन के लिए एक अनुभवी विधायक की आवश्यकता थी। सुधाकरन दो बार मंत्री रह चुके हैं और अंबालापुझा से निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए हैं।
केरल विधानसभा का स्थायी स्पीकर कौन बनेगा?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन के स्थायी स्पीकर चुने जाने की प्रबल संभावना है। यूडीएफ के पास 102 सीटें हैं, जो बहुमत से काफी अधिक हैं, इसलिए उनका चुनाव लगभग तय माना जा रहा है।
प्रोटेम स्पीकर का कार्यकाल कब तक रहेगा?
जी. सुधाकरन का प्रोटेम स्पीकर के रूप में कार्यकाल शुक्रवार को नए स्थायी स्पीकर के चुनाव तक सीमित रहेगा। इससे पहले वह गुरुवार को 139 नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे।
केरल विधानसभा में अभी सीटों का क्या हाल है?
यूडीएफ के पास 102 सीटें हैं, जबकि एलडीएफ घटकर 35 सीटों पर आ गई है। भारतीय जनता पार्टी ने 3 सीटों के साथ केरल विधानसभा में पहली बार अपना खाता खोला है।
जी. सुधाकरन ने सीपीएम क्यों छोड़ी?
सुधाकरन ने पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ जाकर अपने पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र अंबालापुझा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने सीपीएम से नाता तोड़ लिया और यूडीएफ के समर्थन से चुनाव जीते।
राष्ट्र प्रेस
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