लखनऊ विश्वविद्यालय में पेपरलीक और यौन उत्पीड़न: जूलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित, FIR दर्ज

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लखनऊ विश्वविद्यालय में पेपरलीक और यौन उत्पीड़न: जूलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित, FIR दर्ज

सारांश

लखनऊ विश्वविद्यालय में वायरल ऑडियो ने बड़ा तूफान खड़ा कर दिया — जूलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर पर पेपरलीक के बदले यौन शोषण के प्रयास का आरोप है। ICC के सामने खुद गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करना स्वीकारने के बाद निलंबन और जेल, अब बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है।

मुख्य बातें

लखनऊ विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.
परमजीत सिंह को 20 मई को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने अंतरिम रिपोर्ट में उन्हें चार गंभीर आरोपों में प्रथमदृष्टया दोषी पाया।
आरोपी ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के सामने गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकार की।
हुसैनगंज थाने में पेपर लीक की एफआईआर दर्ज; पुलिस ने कैंपस से हिरासत में लेकर अगले दिन जेल भेजा।
विश्वविद्यालय ने 15 दिनों में लिखित स्पष्टीकरण माँगा; संतोषजनक जवाब न मिलने पर बर्खास्तगी संभव।
रिपोर्ट में UGC 2015 विनियमों और विशाखा गाइडलाइंस के उल्लंघन का उल्लेख।

लखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) के जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को 20 मई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जब बीएससी थर्ड ईयर की एक छात्रा के साथ उनकी बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया और हुसैनगंज पुलिस स्टेशन में पेपर लीक मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई।

चार गंभीर आरोप, अंतरिम रिपोर्ट में प्रथमदृष्टया दोषी

तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट में डॉ. परमजीत सिंह को प्रथमदृष्टया चार गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया है। इनमें छात्रा को पेपर लीक का लालच देकर यौन शोषण का प्रयास, शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन, मानसिक उत्पीड़न और गोपनीय परीक्षा जानकारी साझा करना शामिल हैं।

जाँच में सामने आया कि आरोपी शिक्षक ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष स्वयं गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकार की। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2015 के विनियमों और विशाखा गाइडलाइंस के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।

कैंपस में प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई

ऑडियो वायरल होते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने कैंपस में जोरदार प्रदर्शन किया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुँची। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की तहरीर पर हुसैनगंज थाने में पेपर लीक की एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने डॉ. परमजीत सिंह को कैंपस से हिरासत में लेकर अगले दिन जेल भेज दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि आरोपी के आचरण से संस्थान की साख, सामाजिक प्रतिष्ठा और अकादमिक निष्ठा को गंभीर क्षति पहुँची है। प्रशासन ने डॉ. परमजीत सिंह को आरोप पत्र जारी कर 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनकी सेवा समाप्ति यानी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि महिला सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

आम जनता और छात्रों पर असर

यह मामला लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत संवेदनशील साबित हो रहा है। छात्रों में व्यापक आक्रोश है और कई छात्र संगठन शिक्षक की तत्काल बर्खास्तगी की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में उच्च शिक्षण संस्थानों में परीक्षा पारदर्शिता और महिला सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है।

आगे क्या होगा

डॉ. परमजीत सिंह के पास 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने का अवसर है। समय पर संतोषजनक उत्तर न मिलने पर विश्वविद्यालय बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसके साथ ही पुलिस द्वारा पेपर लीक मामले में आपराधिक जाँच भी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी कार्रवाई के लिए ऑडियो के वायरल होने की प्रतीक्षा करनी पड़ी। विशाखा गाइडलाइंस और UGC 2015 विनियमों के बावजूद यदि शिकायत तंत्र स्वतः सक्रिय नहीं होता, तो प्रश्न उठता है कि ये नियम कागज़ों से बाहर कितने जीवित हैं। बर्खास्तगी आवश्यक है, लेकिन पर्याप्त नहीं — असली जवाबदेही तब होगी जब विश्वविद्यालय यह बताए कि सूचना लीक कहाँ तक पहुँची और कितने परीक्षार्थी प्रभावित हुए।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ विश्वविद्यालय में डॉ. परमजीत सिंह पर क्या आरोप हैं?
डॉ. परमजीत सिंह पर बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा को पेपर लीक का लालच देकर यौन शोषण का प्रयास, शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन, मानसिक उत्पीड़न और गोपनीय परीक्षा जानकारी साझा करने के चार गंभीर आरोप हैं। तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने अंतरिम रिपोर्ट में उन्हें प्रथमदृष्टया दोषी पाया है।
डॉ. परमजीत सिंह को निलंबित क्यों किया गया?
बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा के साथ उनकी बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने आपात बैठक में उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया। आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष उन्होंने स्वयं गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकार की, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
क्या डॉ. परमजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया है?
हाँ, पुलिस ने उन्हें कैंपस से हिरासत में लिया और अगले दिन जेल भेज दिया। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की तहरीर पर हुसैनगंज थाने में पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय आगे क्या कार्रवाई करेगा?
विश्वविद्यालय ने डॉ. परमजीत सिंह को आरोप पत्र जारी कर 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो उनकी सेवा समाप्ति यानी बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
इस मामले में विशाखा गाइडलाइंस की क्या भूमिका है?
अनुशासन समिति की रिपोर्ट में UGC के 2015 के विनियमों और विशाखा गाइडलाइंस के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। ये दिशानिर्देश कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम और निवारण के लिए अनिवार्य संस्थागत तंत्र निर्धारित करते हैं, जिनका पालन सभी विश्वविद्यालयों के लिए बाध्यकारी है।
राष्ट्र प्रेस
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