सोनू सूद ने किए कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन, ट्रेन से पहुंचे गुवाहाटी

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सोनू सूद ने किए कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन, ट्रेन से पहुंचे गुवाहाटी

सारांश

अभिनेता सोनू सूद ने आम श्रद्धालु की तरह ट्रेन से सफर कर गुवाहाटी के कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन किए। मंदिर प्रबंधन ने पारंपरिक स्वागत किया और फैंस ने इंस्टाग्राम वीडियो को खूब सराहा।

मुख्य बातें

अभिनेता सोनू सूद ने असम के गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन किए।
वे आम यात्रियों की तरह ट्रेन से मंदिर पहुंचे और यात्रा का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया।
मंदिर प्रबंधन समिति ने उन्हें अंगवस्त्र और माता का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
कामाख्या मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है, जो नीलांचल पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर हर वर्ष जून में तीन दिन बंद रहता है — इस दौरान अंबुबाची मेले की परंपरा निभाई जाती है।

अभिनेता सोनू सूद असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने इस आध्यात्मिक यात्रा की झलक अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के ज़रिए साझा की, जिसमें वे आम श्रद्धालुओं की तरह ट्रेन से सफर करते नज़र आए।

मंदिर में पूजा-अर्चना

वीडियो में देखा जा सकता है कि सोनू सूद ने मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में काफी समय बिताया। वीडियो में अभिनेता कहते हैं, 'नमस्कार दोस्तों, आज हम जा रहे हैं मां कामाख्या देवी मंदिर। वहां पर हम माता रानी के दर्शन करेंगे।' वीडियो पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, 'जय मां कामाख्या देवी।'

भव्य स्वागत और प्रशंसकों का उत्साह

मंदिर परिसर में सोनू सूद को अपने बीच पाकर वहां मौजूद श्रद्धालु और प्रशंसक उत्साहित नज़र आए। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया और उन्हें अंगवस्त्र तथा माता का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। फैंस ने अभिनेता के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

कामाख्या मंदिर का धार्मिक महत्व

नीलांचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख और अत्यंत पूजनीय स्थल है। यह मंदिर धार्मिक आस्था, तंत्र साधना और देवी उपासना के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां माता सती का 'योनि' भाग गिरा था, इसलिए इसे शक्ति साधना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

गौरतलब है कि मुख्य मंदिर में देवी की कोई मूर्ति या तस्वीर नहीं है — यहां भूमि में योनि के आकार की एक प्राकृतिक दरार है, जिसमें निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है और उसे फूलों से ढका जाता है। यह मंदिर अंबुबाची मेले और दस महाविद्याओं की साधना के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।

अंबुबाची मेला और मंदिर की परंपरा

हर वर्ष जून माह में मंदिर लगभग तीन दिनों के लिए बंद रहता है। मान्यता है कि इस अवधि में माता रजस्वला होती हैं। चौथे दिन मंदिर के कपाट पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं, जब बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए उमड़ते हैं। सोशल मीडिया पर सोनू सूद की इस धार्मिक यात्रा की फैंस जमकर सराहना कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कोविड काल के बाद से उनकी पहचान बन चुकी है। हालांकि, मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पहलू को नज़रअंदाज़ करती है कि इस तरह की हाई-प्रोफाइल यात्राएं तीर्थस्थलों पर पर्यटन और भीड़ प्रबंधन को भी प्रभावित करती हैं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनू सूद कामाख्या देवी मंदिर कब और कैसे पहुंचे?
सोनू सूद असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या देवी मंदिर में आम यात्रियों की तरह ट्रेन से सफर कर पहुंचे। उन्होंने इस यात्रा का वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर 20 मई को साझा किया।
कामाख्या देवी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
कामाख्या देवी मंदिर गुवाहाटी की नीलांचल पहाड़ी पर स्थित देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह तंत्र साधना, देवी उपासना और अंबुबाची मेले के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
अंबुबाची मेला क्या है और यह कब होता है?
अंबुबाची मेला हर वर्ष जून माह में आयोजित होता है, जब मंदिर लगभग तीन दिनों के लिए बंद रहता है। मान्यता है कि इस अवधि में माता रजस्वला होती हैं और चौथे दिन कपाट खुलने पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर प्रबंधन ने सोनू सूद का स्वागत कैसे किया?
मंदिर प्रबंधन समिति ने सोनू सूद का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। उन्हें अंगवस्त्र और माता का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कामाख्या मंदिर में देवी की मूर्ति क्यों नहीं है?
कामाख्या मंदिर में देवी की कोई मूर्ति या तस्वीर नहीं है। यहां भूमि में योनि के आकार की एक प्राकृतिक दरार है जिसमें निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है और उसे फूलों से ढका जाता है, जिसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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