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क्या सीएम योगी ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया?

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क्या सीएम योगी ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया?

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने का बड़ा निर्णय लिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा में अनियमितताओं और ठगी की शिकायतों के आधार पर लिया है। जानें इस महत्वपूर्ण कदम के पीछे की कहानी और भविष्य की संभावनाएं।

मुख्य बातें

सीएम योगी का निर्णय अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
परीक्षा में अनियमितता और धांधली की शिकायतें गंभीर थीं।
एसटीएफ ने ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ा।
परीक्षा का पुनः आयोजन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
सरकार की यह पहल शिक्षा क्षेत्र में सुधार का संकेत है।

लखनऊ, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण बनाने के लिए कृतसंकल्पित है। अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद के लिए आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली की शिकायतें आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर एसटीएफ यूपी को सूचनाएं मिलीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने गोपनीय जांच के आदेश दिए।

जांच में एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों- महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ लखनऊ के थाना विभूतिखंड में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पूछताछ में मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को धन लेकर उपलब्ध कराए थे। एसटीएफ की गहन विवेचना से उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई।

जांच के दौरान अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों और व्यक्तियों के नाम भी सामने आए। आयोग से प्राप्त डाटा के मिलान में यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा सुनिश्चित किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा क्यों निरस्त की गई?
यह परीक्षा अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली की शिकायतों के चलते निरस्त की गई।
क्या इस परीक्षा का पुनः आयोजन होगा?
हाँ, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि परीक्षा का आयोजन शीघ्र और निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा।
एसटीएफ ने क्या कार्रवाई की?
एसटीएफ ने जांच के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो ठगी में शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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