टीवीके-सीपीएम तनाव पर भाजपा का हमला: पूनावाला बोले- गठबंधन सत्ता की लालसा पर टिका, मिशन पर नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 20 मई को तमिलनाडु में नवगठित टीवीके सरकार और उसके सहयोगी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम के बीच उभरे विवाद पर तीखा हमला बोला। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि टीवीके, कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन किसी साझा विजन पर नहीं, बल्कि पद की लालसा, भ्रष्टाचार और कुर्सी बचाने की महत्वाकांक्षा पर टिका है।
विवाद की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में सरकार गठन के करीब दो हफ्ते बाद ही टीवीके और बाहर से समर्थन दे रही सीपीएम के बीच तनातनी सामने आई। एआईएडीएमके के बागी नेताओं को सरकार में शामिल करने की संभावना पर सीपीएम ने टीवीके को चेतावनी दी कि ऐसा हुआ तो वह अपना समर्थन वापस ले लेगी। इस घटनाक्रम ने गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर कर दिया है।
पूनावाला का सीधा हमला
पूनावाला ने कहा, 'वामपंथी पार्टियों ने टीवीके को धमकी दी है कि अगर आप एआईएडीएमके के लोगों को अपने साथ लेते हैं, तो हम आपका समर्थन नहीं करेंगे। टीवीके, कांग्रेस और वामपंथियों के बीच का यह गठबंधन किसी मिशन या विजन पर आधारित नहीं है। यह गठबंधन सिर्फ पद की लालसा, भ्रष्टाचार, कमीशन और अपनी-अपनी कुर्सियों को बचाने की महत्वाकांक्षा से प्रेरित है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जैसे ही कांग्रेस और वामपंथियों को यह एहसास हुआ कि टीवीके की सरकार में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, उन्होंने जोसेफ को अल्टीमेटम दे दिया। इससे जोसेफ विजय को भी पता चलेगा कि कांग्रेस और लेफ्ट के साथ गठबंधन करने पर कितनी कीमत चुकानी पड़ती है।'
कर्नाटक और अन्य राज्यों पर निशाना
पूनावाला ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ सत्ता के संतुलन को लेकर हुई बैठक पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'अभी केरल में कांग्रेस का 'टुकड़ा-टुकड़ा' अभियान खत्म हुआ है। 11 दिन के बाद सतीशन को मुस्लिम लीग के दबाव में मुख्यमंत्री बनाया। अब कर्नाटक कांग्रेस 'टुकड़ा-टुकड़ा' मोड़ में है।'
उन्होंने कहा, 'हर जगह चलन 'कांग्रेस बनाम कांग्रेस' है। ढाई-तीन साल से कर्नाटक में 'सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार' की लड़ाई चल रही है। हिमाचल में 'सुक्खू बनाम प्रतिभा' और राजस्थान में 'गहलोत बनाम पायलट' — यह साफ करता है कि कांग्रेस के लोग सिर्फ सत्ता की लड़ाई लड़ते हैं, जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं।'
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दक्षिण भारत में गठबंधन की राजनीति नई करवटें ले रही है। गौरतलब है कि टीवीके एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक शक्ति है और उसकी सरकार का शुरुआती दौर ही आंतरिक तनाव से जूझ रहा है। भाजपा इस विवाद को विपक्षी गठबंधनों की कमज़ोरी के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
आगे क्या
टीवीके सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह सीपीएम के समर्थन को बनाए रखते हुए अपने विस्तार की योजनाओं को कैसे आगे बढ़ाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संकट गठबंधन धर्म की परीक्षा है — और इसका नतीजा तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।