टीवीके-सीपीएम तनाव पर भाजपा का हमला: पूनावाला बोले- गठबंधन सत्ता की लालसा पर टिका, मिशन पर नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
टीवीके-सीपीएम तनाव पर भाजपा का हमला: पूनावाला बोले- गठबंधन सत्ता की लालसा पर टिका, मिशन पर नहीं

सारांश

तमिलनाडु में सरकार बनते ही टीवीके और सीपीएम के बीच दरार — भाजपा ने इसे 'सत्ता की लालसा का गठबंधन' करार दिया। पूनावाला ने कर्नाटक और केरल में कांग्रेस के आंतरिक कलह को भी जोड़ते हुए कहा कि 'कांग्रेस बनाम कांग्रेस' देशभर का चलन बन चुका है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने 20 मई को टीवीके-सीपीएम विवाद पर विपक्षी गठबंधन को 'सत्ता की लालसा' से प्रेरित बताया।
तमिलनाडु में सरकार गठन के करीब दो हफ्ते बाद ही सीपीएम ने एआईएडीएमके बागियों को शामिल करने पर समर्थन वापसी की चेतावनी दी।
पूनावाला ने जोसेफ विजय को चेताया कि कांग्रेस और वामपंथियों के साथ गठबंधन की 'कीमत' चुकानी पड़ती है।
केरल में 11 दिन बाद मुस्लिम लीग के दबाव में सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का हवाला दिया गया।
कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम डी.के.
शिवकुमार , हिमाचल में सुक्खू बनाम प्रतिभा और राजस्थान में गहलोत बनाम पायलट — भाजपा ने इन्हें 'कांग्रेस बनाम कांग्रेस' के उदाहरण बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 20 मई को तमिलनाडु में नवगठित टीवीके सरकार और उसके सहयोगी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम के बीच उभरे विवाद पर तीखा हमला बोला। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि टीवीके, कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन किसी साझा विजन पर नहीं, बल्कि पद की लालसा, भ्रष्टाचार और कुर्सी बचाने की महत्वाकांक्षा पर टिका है।

विवाद की पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में सरकार गठन के करीब दो हफ्ते बाद ही टीवीके और बाहर से समर्थन दे रही सीपीएम के बीच तनातनी सामने आई। एआईएडीएमके के बागी नेताओं को सरकार में शामिल करने की संभावना पर सीपीएम ने टीवीके को चेतावनी दी कि ऐसा हुआ तो वह अपना समर्थन वापस ले लेगी। इस घटनाक्रम ने गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर कर दिया है।

पूनावाला का सीधा हमला

पूनावाला ने कहा, 'वामपंथी पार्टियों ने टीवीके को धमकी दी है कि अगर आप एआईएडीएमके के लोगों को अपने साथ लेते हैं, तो हम आपका समर्थन नहीं करेंगे। टीवीके, कांग्रेस और वामपंथियों के बीच का यह गठबंधन किसी मिशन या विजन पर आधारित नहीं है। यह गठबंधन सिर्फ पद की लालसा, भ्रष्टाचार, कमीशन और अपनी-अपनी कुर्सियों को बचाने की महत्वाकांक्षा से प्रेरित है।'

उन्होंने आगे कहा, 'जैसे ही कांग्रेस और वामपंथियों को यह एहसास हुआ कि टीवीके की सरकार में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, उन्होंने जोसेफ को अल्टीमेटम दे दिया। इससे जोसेफ विजय को भी पता चलेगा कि कांग्रेस और लेफ्ट के साथ गठबंधन करने पर कितनी कीमत चुकानी पड़ती है।'

कर्नाटक और अन्य राज्यों पर निशाना

पूनावाला ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ सत्ता के संतुलन को लेकर हुई बैठक पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'अभी केरल में कांग्रेस का 'टुकड़ा-टुकड़ा' अभियान खत्म हुआ है। 11 दिन के बाद सतीशन को मुस्लिम लीग के दबाव में मुख्यमंत्री बनाया। अब कर्नाटक कांग्रेस 'टुकड़ा-टुकड़ा' मोड़ में है।'

उन्होंने कहा, 'हर जगह चलन 'कांग्रेस बनाम कांग्रेस' है। ढाई-तीन साल से कर्नाटक में 'सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार' की लड़ाई चल रही है। हिमाचल में 'सुक्खू बनाम प्रतिभा' और राजस्थान में 'गहलोत बनाम पायलट' — यह साफ करता है कि कांग्रेस के लोग सिर्फ सत्ता की लड़ाई लड़ते हैं, जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं।'

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दक्षिण भारत में गठबंधन की राजनीति नई करवटें ले रही है। गौरतलब है कि टीवीके एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक शक्ति है और उसकी सरकार का शुरुआती दौर ही आंतरिक तनाव से जूझ रहा है। भाजपा इस विवाद को विपक्षी गठबंधनों की कमज़ोरी के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

आगे क्या

टीवीके सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह सीपीएम के समर्थन को बनाए रखते हुए अपने विस्तार की योजनाओं को कैसे आगे बढ़ाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संकट गठबंधन धर्म की परीक्षा है — और इसका नतीजा तमिलनाडु की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ विपक्षी गठबंधनों की आंतरिक दरारों को उजागर करना उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालाँकि, पूनावाला के बयान में तथ्य और राजनीतिक प्रचार का मिश्रण है — सीपीएम की चेतावनी वास्तविक है, लेकिन इसे 'भ्रष्टाचार और कमीशन' से जोड़ना बिना साक्ष्य के लगाया गया आरोप है। असली सवाल यह है कि क्या टीवीके जैसी नई पार्टी बहुदलीय गठबंधन की जटिलताओं को संभाल पाएगी — यह तमिलनाडु की राजनीतिक परिपक्वता की परीक्षा है, न केवल विपक्ष की कमज़ोरी का प्रमाण।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीवीके और सीपीएम के बीच विवाद किस बात पर हुआ?
तमिलनाडु में सरकार गठन के करीब दो हफ्ते बाद सीपीएम ने टीवीके को चेतावनी दी कि अगर एआईएडीएमके के बागी नेताओं को सरकार में शामिल किया गया, तो वह अपना बाहरी समर्थन वापस ले लेगी। यह विवाद गठबंधन की आंतरिक दरारों को उजागर करता है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस विवाद पर क्या कहा?
पूनावाला ने कहा कि टीवीके, कांग्रेस और वामपंथियों का गठबंधन किसी मिशन या विजन पर नहीं, बल्कि पद की लालसा, भ्रष्टाचार, कमीशन और कुर्सी बचाने की महत्वाकांक्षा पर आधारित है। उन्होंने जोसेफ विजय को चेताया कि इस गठबंधन की 'कीमत' चुकानी पड़ेगी।
पूनावाला ने कर्नाटक कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
पूनावाला ने कहा कि ढाई-तीन साल से कर्नाटक में 'सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार' की सत्ता-लड़ाई जारी है और अब खड़गे की बैठक से यह 'टुकड़ा-टुकड़ा' मोड़ में है। उन्होंने हिमाचल और राजस्थान के उदाहरण देते हुए इसे 'कांग्रेस बनाम कांग्रेस' का राष्ट्रव्यापी चलन बताया।
केरल के मुख्यमंत्री का जिक्र इस संदर्भ में क्यों आया?
पूनावाला ने कहा कि केरल में कांग्रेस के सतीशन को मुस्लिम लीग के दबाव में 11 दिन बाद मुख्यमंत्री बनाया गया। इसे उन्होंने गठबंधन की मजबूरी और कांग्रेस की कमज़ोरी के उदाहरण के रूप में पेश किया।
इस राजनीतिक विवाद का तमिलनाडु की सरकार पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि सीपीएम अपना समर्थन वापस लेती है, तो टीवीके सरकार के लिए विधानसभा में बहुमत बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संकट टीवीके के लिए गठबंधन प्रबंधन की पहली बड़ी परीक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले