टीवीके को समर्थन पर कांग्रेस का बचाव: 'तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान बचाना था मकसद'

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टीवीके को समर्थन पर कांग्रेस का बचाव: 'तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान बचाना था मकसद'

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के टीवीके समर्थन पर सियासी बवाल मचा है। सीएलपी नेता राजेश कुमार ने साफ किया — यह अवसरवाद नहीं, धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई है। विजय की पार्टी का कामराज से जुड़ाव और इंडिया गठबंधन की रणनीति — दोनों इस फैसले की असली वजह हैं।

मुख्य बातें

राजेश कुमार ने 7 मई को टीवीके को समर्थन देने के कांग्रेस के फैसले का बचाव किया।
कांग्रेस ने कहा कि यह कदम तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान की रक्षा और सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए उठाया गया।
टीवीके प्रमुख विजय ने सार्वजनिक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री के.
कामराज को अपनी वैचारिक प्रेरणा बताया है।
कांग्रेस ने चुनाव से पहले मिले अन्य राजनीतिक प्रस्तावों को ठुकराकर इंडिया गठबंधन के तहत धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ रहने का फैसला किया था।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह समर्थन राजनीतिक अवसरवाद नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिबद्धता है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को समर्थन देने के अपने फैसले पर उठ रहे राजनीतिक सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता और विधायक एस. राजेश कुमार ने गुरुवार, 7 मई को पार्टी के रुख का दृढ़ता से बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान की रक्षा और राज्य में सांप्रदायिक ताकतों को राजनीतिक प्रभाव हासिल करने से रोकने के एकमात्र उद्देश्य से लिया गया है।

राजनीतिक आरोपों को किया खारिज

तेज़ी से बदल रहे चुनाव बाद के राजनीतिक परिदृश्य में जारी विस्तृत बयान में राजेश कुमार ने उन आरोपों को सिरे से नकार दिया जिनमें कहा जा रहा था कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता किया है या राजनीतिक पद पाने की लालसा में यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि कुछ दल इस फैसले को जनादेश के साथ विश्वासघात के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।

राजेश कुमार ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्विरोध भी है — पार्टी ने तमिलनाडु में खुद एक सीट भी नहीं जीती, और अब वह एक नई पार्टी को वैधता दे रही है जिसका जनाधार अभी परखा नहीं गया। विजय की टीवीके ने धर्मनिरपेक्षता का दावा किया है, लेकिन चुनावी राजनीति में विचारधारा और व्यवहार के बीच की खाई अक्सर चौड़ी होती है। कांग्रेस के लिए असली सवाल यह है कि क्या यह समर्थन उसे तमिलनाडु में पुनर्जीवित करेगा, या वह एक बार फिर किसी और की राजनीतिक छाया में सिमट जाएगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन क्यों दिया?
कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान की रक्षा और सांप्रदायिक ताकतों को राजनीतिक प्रभाव हासिल करने से रोकने के लिए लिया गया है। सीएलपी नेता राजेश कुमार ने इसे राजनीतिक अवसरवाद नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिबद्धता बताया।
टीवीके क्या है और इसका नेतृत्व कौन करता है?
तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) तमिलनाडु की एक राजनीतिक पार्टी है जिसका नेतृत्व अभिनेता से नेता बने विजय करते हैं। पार्टी ने खुद को एक धर्मनिरपेक्ष आंदोलन के रूप में पेश किया है और विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज को अपनी वैचारिक प्रेरणा बताया है।
क्या कांग्रेस ने चुनाव से पहले अन्य राजनीतिक दलों के प्रस्ताव ठुकराए थे?
हाँ, राजेश कुमार के अनुसार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले कांग्रेस को कई राजनीतिक प्रस्ताव मिले थे। लेकिन पार्टी ने इंडिया गठबंधन के तहत धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ बने रहने का फैसला किया।
इस फैसले पर विरोधियों की क्या प्रतिक्रिया है?
कुछ राजनीतिक दलों ने कांग्रेस के इस कदम को जनादेश के साथ विश्वासघात और राजनीतिक अवसरवाद करार दिया है। हालांकि राजेश कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का रुख तमिलनाडु के व्यापक हितों और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता से प्रेरित है।
कांग्रेस का तमिलनाडु में आगे क्या रुख रहेगा?
राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सांप्रदायिकता के खिलाफ और सामाजिक न्याय तथा तमिलनाडु की जनता की भावनाओं की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। पार्टी का मुख्य उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ताकतों की एकजुटता बनाए रखना है।
राष्ट्र प्रेस
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