16 सितंबर 2026
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डिजिटल अर्थव्यवस्था कराधान पर निर्मला सीतारमण: भारत व निवेश पर असर का गहन अध्ययन ज़रूरी

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डिजिटल अर्थव्यवस्था कराधान पर निर्मला सीतारमण: भारत व निवेश पर असर का गहन अध्ययन ज़रूरी

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बेंगलुरु में साफ संकेत दिया — डिजिटल कराधान कोई जल्दबाज़ी का मसला नहीं है। AI, रोबोटिक्स, गिग इकोनॉमी और वर्चुअल एसेट्स को लेकर नीति की जटिलता बढ़ रही है और 7 अक्टूबर की GST परिषद बैठक में GST 2.0 के तहत बड़े प्रक्रिया सुधारों की नींव पड़ सकती है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 16 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में ITRAF कार्यक्रम में डिजिटल अर्थव्यवस्था कराधान पर गहन अध्ययन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
क्लाउड सेवाओं, डिजिटल उत्पादों और डिजिटल सेवाओं पर कर का निर्धारण जटिल बताया; भारत के भावी निवेश पर असर के मूल्यांकन को प्राथमिकता देने का आग्रह।
वैश्विक टू-पिलर टैक्स वार्ताओं में भारत ने डिजिटल कंपनियों पर दो कर वापस लिए थे — वैश्विक समझौते में विश्वास बनाने के लिए।
भविष्य की कर नीति में AI, रोबोटिक्स, गिग इकोनॉमी, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर प्रमुख विषय होंगे।
GST परिषद की अगली बैठक 7 अक्टूबर 2026 को; GST 2.0 के तहत ई-इनवॉइसिंग सहित प्रक्रिया सुधारों पर चर्चा होगी।
GIFT सिटी को MRO, जहाज निर्माण और फिनटेक क्षेत्रों में ऑफशोर पूंजी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बताया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में स्पष्ट किया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कराधान से जुड़े किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले भारत, अन्य देशों और देश में भविष्य में आने वाले निवेश पर पड़ने वाले प्रभावों का सावधानीपूर्वक और गहन विश्लेषण किया जाना अनिवार्य है। इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन (ITRAF) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि क्लाउड सेवाओं, डिजिटल उत्पादों और डिजिटल सेवाओं की खपत पर यह तय करना सरल नहीं है कि कर कहाँ और किस पर लगे।

मुख्य वक्तव्य और वित्त मंत्री का आग्रह

सीतारमण ने कार्यक्रम में कहा, 'इस जटिलता का शांतिपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिए। भारत पर इसके प्रभाव, अन्य देशों पर इसके प्रभाव और सबसे महत्वपूर्ण, भारत में भविष्य में आने वाले निवेश पर इसके असर का भी गहराई से अध्ययन होना चाहिए।' उन्होंने ज़ोर दिया कि इस विषय को केवल भारत के कर राजस्व में संभावित नुकसान के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह व्यापक वैश्विक वार्ताओं का अभिन्न हिस्सा है।

वैश्विक टू-पिलर वार्ताओं में भारत का अनुभव

वित्त मंत्री ने वैश्विक टू-पिलर टैक्स वार्ताओं में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि इन वार्ताओं के दौरान भारत ने डिजिटल कंपनियों पर लगाए गए दो करों को वापस लिया था, ताकि उभरते वैश्विक समझौते के प्रति विश्वसनीयता बढ़ाई जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल कराधान पर आम सहमति अभी भी अधूरी है और कई देश अपने-अपने हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

भविष्य के कर नीति विमर्श के प्रमुख विषय

सीतारमण ने रेखांकित किया कि आने वाले समय में कर नीति की चर्चा में निम्नलिखित विषय केंद्रीय होंगे — महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति (Significant Economic Presence), वर्चुअल परमानेंट एस्टैब्लिशमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, गिग इकोनॉमी, वैश्विक गतिशीलता, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और डिजिटल लेनदेन में वस्तुओं व सेवाओं का वर्गीकरण। उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसे संस्थागत तंत्र के लिए तैयार है जो यह स्पष्ट करे कि डिजिटल लेनदेन को GST और आयकर कानूनों के तहत वस्तु माना जाए या सेवा।

उद्योग जगत से अपेक्षाएँ और GST 2.0

वित्त मंत्री ने कर विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे केवल कम कर दरों, छूटों और रियायतों की माँग तक सीमित न रहें — बल्कि उन प्रावधानों की पहचान करें जो अब कर प्रणाली के लिए उपयोगी नहीं रह गए, भले ही उनसे उद्योग को वर्तमान में लाभ मिल रहा हो। उन्होंने कहा, 'परामर्श का अर्थ केवल सभी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना नहीं होना चाहिए। यह तथ्यों, अनुभवों और विचारों पर आधारित एक वास्तविक प्रक्रिया होनी चाहिए।'

सीतारमण ने बताया कि GST परिषद की अगली बैठक 7 अक्टूबर को होगी, जिसमें GST 2.0 के तहत प्रक्रिया संबंधी सुधारों — विशेष रूप से ई-इनवॉइसिंग से जुड़े मुद्दों — पर विचार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली परिषद बैठक में दरों के युक्तिकरण पर ध्यान दिया गया था और प्रक्रिया सुधारों को अगली बैठक तक के लिए स्थगित रखा गया था।

FDI विस्तार, 'चीन प्लस वन' और GIFT सिटी

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि 2014 के बाद से सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमाओं का लगातार विस्तार किया है और अब अधिकांश निवेश स्वचालित मार्ग से आ रहे हैं — केवल सुरक्षा से जुड़े कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में ही प्रतिबंध लागू हैं। उन्होंने कहा कि 'चीन प्लस वन' रणनीति के तहत वैश्विक निवेशक अपनी आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता ला रहे हैं और भारत की मज़बूत व्यापक आर्थिक स्थिति उन्हें आकर्षित कर रही है।

सीतारमण ने GIFT सिटी की भूमिका को भी रेखांकित किया और बताया कि यह ऑफशोर पूंजी को भारत तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। MRO (रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहाल), जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में इसके बढ़ते योगदान को उन्होंने विशेष रूप से उजागर किया। आगामी GST परिषद बैठक और संस्थागत तंत्र की संभावित रूपरेखा यह तय करेगी कि डिजिटल कराधान पर भारत की नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक बड़ी नीतिगत दुविधा है — भारत ने टू-पिलर वार्ताओं में इक्वलाइज़ेशन लेवी जैसे कर छोड़ दिए, और बदले में वैश्विक समझौता अभी भी अधूरा है। इस बीच, डिजिटल कंपनियाँ भारतीय बाज़ार से अरबों कमा रही हैं। GST परिषद में 'प्रक्रिया सुधार' की बात तो हो रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि डिजिटल लेनदेन को वस्तु या सेवा मानने का संस्थागत तंत्र कब और किस रूप में आएगा। उद्योग जगत से 'उपयोगहीन प्रावधान हटाने' का आग्रह नई और साहसी अपेक्षा है — देखना यह होगा कि यह परामर्श महज औपचारिकता बनता है या असली नीति परिवर्तन की आधारशिला।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण ने डिजिटल अर्थव्यवस्था कराधान पर क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 16 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कर नीति बनाने से पहले भारत, अन्य देशों और भावी निवेश पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन और शांतिपूर्वक अध्ययन होना चाहिए। उन्होंने इसे केवल राजस्व नुकसान के नज़रिए से न देखने की सलाह दी।
भारत ने वैश्विक टू-पिलर टैक्स वार्ताओं में क्या कदम उठाया था?
भारत ने वैश्विक टू-पिलर टैक्स वार्ताओं के दौरान डिजिटल कंपनियों पर लगाए गए दो करों को वापस लिया था, ताकि उभरते वैश्विक समझौते के प्रति विश्वसनीयता और भरोसा बढ़ाया जा सके। सीतारमण ने इसका उल्लेख ITRAF कार्यक्रम में किया।
GST परिषद की अगली बैठक कब है और उसमें क्या होगा?
GST परिषद की अगली बैठक 7 अक्टूबर 2026 को होगी। इसमें GST 2.0 के तहत प्रक्रिया संबंधी सुधारों पर चर्चा होगी, जिनमें ई-इनवॉइसिंग से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
डिजिटल लेनदेन को वस्तु या सेवा मानने पर सरकार की क्या योजना है?
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार एक संस्थागत तंत्र बनाने के लिए तैयार है जो यह स्पष्ट करे कि डिजिटल लेनदेन को GST और आयकर कानूनों के तहत वस्तु माना जाए या सेवा। इस पर उद्योग जगत से सुझाव और प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया गया है।
GIFT सिटी और FDI के बारे में सीतारमण ने क्या कहा?
सीतारमण ने कहा कि 2014 के बाद से FDI सीमाओं का लगातार विस्तार हुआ है और अधिकांश निवेश अब स्वचालित मार्ग से आ रहे हैं। GIFT सिटी को ऑफशोर पूंजी आकर्षण का केंद्र बताया और MRO, जहाज निर्माण तथा फिनटेक क्षेत्रों में इसके बढ़ते योगदान को रेखांकित किया।
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