दिशा सालियान मामला: आदित्य ठाकरे ने एक्स पर कहा — 'कभी नहीं मिला', राजनीतिक षड्यंत्र का लगाया आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने 16 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये स्पष्ट किया कि वे दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उनसे कोई परिचय था। ठाकरे ने आरोप लगाया कि पिछले 6 वर्षों से बिना किसी सबूत के उनका नाम इस मामले से जोड़ा जा रहा है, जो राजनीतिक द्वेष और चरित्र हनन की मंशा से प्रेरित है।
आदित्य ठाकरे का पक्ष
ठाकरे ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा — 'अफवाहों का धुंध फैलाना बंद करने के लिए एक बार फिर से केवल और केवल तथ्य बता रहा हूं। मैं दिशा सालियान से कभी नहीं मिला हूं और न ही उनसे मेरी कोई पहचान थी।' उन्होंने कहा कि राजनीतिक मंशा से और व्यक्तिगत द्वेष के कारण जानबूझकर उनका नाम जोड़ा जाता रहा है, जबकि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से उनका कोई सबूत या संबंध नहीं है।
ठाकरे ने यह भी कहा कि 'शोर मचाकर टीवी चैनलों पर की जाने वाली झूठी चर्चाएं और मीडिया ट्रायल सत्य को नहीं बदल सकते।' उन्होंने माँग की कि आधिकारिक एजेंसियाँ बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के नए सिरे से निष्पक्ष जाँच करें।
दिशा सालियान के पिता और वकील के आरोप
कथित तौर पर दो दिन पहले दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने दावा किया कि उनके पास आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, सचिन वाजे, परमबीर सिंह और रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
उनके वकील निलेश ओझा ने आरोप लगाया कि दिशा के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुराचार के बाद हत्या की गई, और इसका कारण यह बताया गया कि उनके पास 'आदित्य ठाकरे गैंग' की ड्रग्स और बाल तस्करी से जुड़ी कथित जानकारी थी, जो उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को दी थी। ओझा ने यह भी कहा कि दिशा का मोबाइल फोन 9 से 17 जून 2020 तक कथित आरोपियों के कब्जे में रहा। ये सभी आरोप अभी तक अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।
सीबीआई एफआईआर और जाँच की स्थिति
वकील निलेश ओझा के अनुसार, सीबीआई ने सतीश सालियान के बयान के आधार पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। ओझा ने कहा कि 'बयान से यह स्थापित होता है कि दिशा सालियान के साथ जघन्य अपराध किए गए।' हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और सभी आरोप 'कथित' की श्रेणी में हैं।
गौरतलब है कि दिशा सालियान की मृत्यु जून 2020 में हुई थी — जो उसी महीने हुई जिसमें अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का निधन हुआ। तब से यह मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले को बार-बार उछाला जाना विपक्षी नेताओं को कमज़ोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे न्याय की माँग बताता है।
ठाकरे ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा — 'सत्य के लिए, अन्याय के खिलाफ, देशवासियों को साथ लेकर हमारी लड़ाई जारी रहेगी।' यह मामला अब सीबीआई जाँच के दायरे में आने के बाद और अधिक कानूनी एवं राजनीतिक पेचीदगियों की तरफ बढ़ता दिख रहा है।