दिशा सालियान केस: CBI की FIR के बाद संजय राउत बोले — ठाकरे परिवार को बदनाम करने की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 15 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर बालासाहेब ठाकरे के परिवार को बदनाम करने की सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। इस FIR के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर तेज़ हो गई है, जहाँ एक तरफ विपक्ष ने साजिश का आरोप लगाया है तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ दलों ने जाँच का स्वागत किया है।
राउत का आरोप: मीटिंग के बाद बदली FIR
संजय राउत ने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया था कि जब तक किसी के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते, तब तक उन्हें आरोपी नहीं माना जाएगा और उनके नाम FIR में शामिल नहीं किए जाएँगे। राउत ने कहा, 'दो दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री महाराष्ट्र आए थे और उनके साथ एक और नेता भी थे। वे दोनों आधे से एक घंटे तक एक ही कार में साथ रहे। उसके बाद, ये सभी नाम 16 पन्नों की एफआईआर में शामिल कर लिए गए।'
राउत ने इसे महाराष्ट्र के 'सबसे लोकप्रिय राजनीतिक परिवार' को निशाना बनाने की कोशिश बताते हुए कहा कि वे इस साजिश को बेनकाब करेंगे और लड़ाई जारी रखेंगे।
मंत्री बावनकुले का संयमित रुख
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'दिशा सालियान का मामला कोर्ट में है और CBI इसकी जाँच कर रही है। मेरे लिए इस बारे में ज़्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा।' यह रुख सत्ता पक्ष की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें जाँच एजेंसी को बोलने दिया जाए और नेता दूरी बनाए रखें।
JDU का स्वागत: सच सामने आएगा
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने पटना से CBI जाँच का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में 'प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों, फिल्मी हस्तियों और पुलिस अधिकारियों से जुड़े लोगों' के नाम चर्चा में रहे हैं। रंजन ने याद दिलाया कि दिशा सालियान के पिता ने बार-बार FIR दर्ज कर गंभीर जाँच की माँग की थी — और अब जब CBI उस दिशा में आगे बढ़ रही है, तो सच सामने आने की उम्मीद है।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में हुई थी — सुशांत सिंह राजपूत की मौत से ठीक छह दिन पहले। तब से यह मामला राजनीतिक विवादों में उलझा रहा है। कथित तौर पर हाई-प्रोफाइल नामों और घटनाओं के आपसी संबंध को लेकर सोशल मीडिया पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से तेज़ है और शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच तनाव बना हुआ है।
आगे की राह
CBI की 16 पन्नों की FIR में शामिल नामों और आरोपों का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। न्यायालय की निगरानी में चल रही इस जाँच की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। राजनीतिक बयानबाजी के बीच असली सवाल यह है कि जाँच एजेंसी किस हद तक स्वतंत्र रूप से काम कर पाती है।