विश्वकर्मा जयंती 2026: देश के 6 प्रमुख विश्वकर्मा मंदिर जहाँ कारीगर और इंजीनियर लेते हैं आशीर्वाद
सारांश
मुख्य बातें
भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर 15 सितंबर 2026 को पूरे भारत में श्रद्धालु, कारीगर और इंजीनियर मंदिरों में उमड़ेंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का आदि वास्तुकार और दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है। इस दिन देशभर में कारखानों, दफ्तरों और घरों में मशीनों, औजारों व वाहनों की पूजा की जाती है।
गुवाहाटी: दुनिया का सबसे पुराना विश्वकर्मा मंदिर
असम के गुवाहाटी में स्थित विश्वकर्मा मंदिर को दुनियाभर में भगवान विश्वकर्मा का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। यह मंदिर मां कामाख्या देवी मंदिर के तल भाग में बना हुआ है। वर्ष 1965 में कामाख्या मंदिर के पुजारियों ने महावीर प्रसाद के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया था। प्रतिवर्ष 17 सितंबर को यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। यह पर्व विशेष रूप से देश के पूर्वी राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
फगवाड़ा, पंजाब: सर्वशक्तिमान विश्वकर्मा मंदिर
पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा (बंगा रोड, गोंसपुर) में सफेद संगमरमर से निर्मित भव्य सर्वशक्तिमान विश्वकर्मा मंदिर स्थित है। इस ऐतिहासिक मंदिर की नींव सन 1909 में पंडित नत्थू राम धीमान मंढाली वालों ने रखी थी। कपूरथला के महाराजा ने मंदिर निर्माण के लिए भूमि दान की, और सन 1911 में यहाँ भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति प्रतिष्ठित की गई। गौरतलब है कि इस मंदिर में पंजाब ही नहीं, देश-विदेश से भी कारीगर, इंजीनियर और शिल्पकला विशेषज्ञ दर्शन के लिए आते हैं।
नई दिल्ली: पहाड़गंज का ऐतिहासिक मंदिर
देश की राजधानी नई दिल्ली के पहाड़गंज में स्थित विश्वकर्मा मंदिर अत्यंत लोकप्रिय है। मान्यता है कि इस मंदिर की नींव स्वयं पांडवों ने रखी थी। महाभारत काल में जब युधिष्ठिर के आग्रह पर इंद्रप्रस्थ का निर्माण हुआ, तब इस स्थान का उपयोग विश्वकर्मा के पुत्र माने जाने वाले मय दानव द्वारा निर्माण कार्य हेतु किया गया था। मंदिर परिसर में एक अत्यंत प्राचीन और गहरा कुआँ है जिसका जल आज भी उपयोग में लाया जाता है, साथ ही एक पुराना पीपल का पेड़ भी यहाँ विद्यमान है। विश्वकर्मा जयंती पर यहाँ श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है।
जोधपुर और मुंबई: पंचमुखी रूप और कारीगरों की आस्था
राजस्थान के जोधपुर के डांगियावास क्षेत्र में स्थित पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर अपनी विशिष्ट प्रतिमा के लिए जाना जाता है। पंचमुखी विश्वकर्मा के पाँच दिव्य रूप सृजन, कला और निर्माण के विभिन्न आयामों का प्रतीक माने जाते हैं। यहाँ श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा को परिश्रम, ईमानदारी और हस्तकला का प्रेरणास्रोत मानते हुए अपने व्यवसाय में उन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं।
मुंबई के कांदिवली ईस्ट (हनुमान नगर, शिवाजी नगर रोड) स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर स्थानीय निवासियों, शिल्पकारों और कारीगरों की गहरी आस्था का केंद्र है। किराए के मकानों में रह रहे लोग यहाँ अपना घर बनाने की मन्नत माँगते हैं, जबकि लोहार, बढ़ई, इंजीनियर और औजारों से जीविका चलाने वाले लोग विशेष आशीर्वाद लेने यहाँ पहुँचते हैं।
मध्य प्रदेश: साल में दो बार जन्मोत्सव
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित विश्वकर्मा मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है — यहाँ वर्ष में दो बार जन्मोत्सव मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माघ माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा प्रकट हुए थे, इसीलिए यहाँ विशेष उत्सव आयोजित होता है। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश के सागर जिले के सदर क्षेत्र में भी श्री भगवान विश्वकर्मा का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में विश्वकर्मा समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान और शिल्प-परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में जुटा है।