क्या श्री रंगनाथस्वामी मंदिर 108 वैष्णव दिव्य देशम में शामिल है? मंदिर की बनावट और वास्तुकला है बेहद खास!
सारांश
Key Takeaways
- श्री रंगनाथस्वामी मंदिर 108 वैष्णव दिव्य देशम में से एक है।
- इसकी वास्तुकला और निर्माण प्राचीन भारतीय कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
- मंदिर का गोपुरम 236 फीट ऊंचा है और 13 स्तरों वाला है।
- भक्तों के अनुसार, यह धरती का वैकुंड है।
- मंदिर का इतिहास दूसरे शताब्दी से जुड़ा है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण भारत के कई मंदिर अपनी आस्था, परंपरा और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें से एक है भगवान विष्णु को समर्पित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, जहां हाथी के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
यह मंदिर यूनेस्को द्वारा विशेष धरोहर का दर्जा प्राप्त कर चुका है, क्योंकि इसकी वास्तुकला और बनावट प्राचीन कला-शैली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले में स्थित यह श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, 108 वैष्णव दिव्य देशम में से एक है। कहा जाता है कि इनमें से 105 दक्षिण भारत में हैं, जबकि एक नेपाल और एक दिव्य लोक में। 108 वैष्णव दिव्य देशम की जानकारी तमिल ग्रंथों में भी मिलती है। इसे 'भूलोक वैकुंडम' का नाम भी दिया गया है। भक्तों का मानना है कि यह मंदिर धरती का वैकुंड है, जहां भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। यहां भगवान विष्णु की लेटी हुई प्रतिमा है, जिसका मुंह दक्षिण दिशा की ओर है।
यह मंदिर केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि इसकी बनावट और वास्तुकला के कारण भी अनूठा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है, जिसका गोपुरम भी सबसे बड़ा है। गोपुरम 13 स्तरों वाला 236 फीट ऊंचा है, जिस पर हिंदू देवी-देवताओं की छवियां अंकित की गई हैं। बाहर से यह मंदिर जितना रंगीन है, अंदर से उतना ही प्राचीन है। अंदर का निर्माण काले पत्थर से हुआ है, और स्तंभों पर भगवान विष्णु, हाथी और अन्य देवी-देवताओं की गहरी नक्काशी की गई है।
मंदिर का अस्तित्व दूसरी शताब्दी से माना जाता है, लेकिन पुरातात्विक शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ था। चोल, चेर, पांड्य, होयसला, विजयनगर राजाओं और मदुरै के नायक के शासनकाल में इसे कई परिवर्तन हुए। मंदिर में अलग-अलग शासनकाल और शिल्प शैली का प्रभाव साफ देखा जा सकता है। इसमें 7 बड़े परिसर हैं, जो इसे भव्य बनाते हैं। मंदिर परिसर में 21 रंगीन नक्काशीदार गोपुरम, 50 उप-मंदिर, 9 पवित्र कुंड और मुख्य देवता के गर्भगृह के ऊपर एक स्वर्णिम गुंबद है।
मंदिर में 1000 स्तंभों पर टिका बड़ा हॉल भी है, जिसमें देवी-देवताओं की रंगीन प्रतिमाएं बनी हैं। यह हॉल विजयनगर काल में बनाया गया था।