पीएम विश्वकर्मा योजना से बदली ज़िंदगी: आगरा ब्रिक्स फोरम में लाभार्थियों ने सुनाई सफलता की कहानी
सारांश
मुख्य बातें
पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों ने 19 जून 2026 को आगरा में आयोजित प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम एवं तृतीय एसएमई वर्किंग ग्रुप की बैठक में अपनी पारंपरिक कला और शिल्पकारी का जीवंत प्रदर्शन किया। इस अवसर पर लाभार्थियों ने आयोजन स्थल पर स्टॉल भी लगाए और अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
लेदर कारीगर से डिजिटल उद्यमी तक का सफर
लाभार्थी सनी स्वामी, जो पिछले 10 वर्षों से लेदर उत्पाद — विशेषकर लेदर के खिलौने — बनाने के काम में हैं, ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पंजीकरण के बाद उन्हें प्रशिक्षण के दौरान टूलकिट के उपयोग का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया। उन्होंने कहा, 'विश्वकर्मा योजना से जुड़ने के बाद हमें ऑनलाइन सिस्टम पर एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिला, जिससे हम अपने काम को और आगे बढ़ा सकते हैं।' स्वामी के अनुसार टूलकिट मिलने से उनके उत्पादन की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आया है।
चन्नापटना के खिलौने अब राष्ट्रीय मंच पर
लाभार्थी अब्दुल खादर, जो बेंगलुरु से लगभग 60 किलोमीटर दूर चन्नापटना में परंपरागत लकड़ी के खिलौने बनाते हैं, ने बताया कि योजना के अंतर्गत उन्हें टूलकिट और ऋण दोनों मिले। साथ ही विभिन्न प्रकार के खिलौने बनाने का नया अनुभव भी प्राप्त हुआ। चन्नापटना की लकड़ी-शिल्प परंपरा सदियों पुरानी है और इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है — ऐसे में यह योजना इस विरासत को संरक्षित करने का भी माध्यम बन रही है।
ढोकरा कलाकार को मिला ₹1 लाख का ऋण, दिल्ली हाट तक पहुँचे उत्पाद
ढोकरा कलाकार अलीम जादूपाटिया ने बताया कि उन्हें पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़े डेढ़ वर्ष हो चुके हैं और इस अवधि में उन्हें हर स्तर पर लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत टूलकिट मिलने के साथ-साथ उन्हें दिल्ली हाट में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने का अवसर भी मिला। जादूपाटिया ने यह भी कहा कि इस तरह के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी से बाज़ार का विस्तार होता है। उन्हें योजना के तहत ₹1 लाख का ऋण प्राप्त हुआ, जिसे वे अपने जीवन में आए बदलाव की बुनियाद मानते हैं।
सोशल मीडिया से जानकारी, योजना से मिली नई पहचान
सॉफ्ट स्टोन स्कल्पचर (मुलायम पत्थर की नक्काशी) कलाकार पूजा झारिया ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। पूरी जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने आवेदन किया और प्रशिक्षण प्राप्त किया। झारिया को पहले चरण में ₹1 लाख का ऋण मिला, जिससे उनका व्यवसाय आगे बढ़ा। उन्होंने कहा, 'हाथों से बनाए उत्पाद जो कल तक लोकल में ही सीमित थे, उनकी पहचान अब दूसरे शहरों में भी हो रही है।' आगरा में पहली बार आने पर उन्होंने खुशी जताई और इस तरह के मंचों को कारीगरों के लिए अनिवार्य बताया।
आगे की राह
ब्रिक्स एमएसएमई फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि सरकार इस योजना को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। पारंपरिक शिल्पकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऋण सुविधा और प्रदर्शनी के अवसर मिलने से उनकी आय और बाज़ार पहुँच दोनों में विस्तार की संभावना है।