दिशा सालियन केस: सीबीआई एफआईआर के बाद BJP विधायक राम कदम का उद्धव ठाकरे पर हमला, जांच में देरी पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राम कदम ने 15 सितंबर 2026 को दिशा सालियन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। कदम ने सवाल किया कि जब दिशा के पिता बार-बार न्याय की गुहार लगाते रहे, तब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने इस मामले में ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
राम कदम ने कहा कि दिशा सालियन के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की हत्या की गई और मृत्यु से पूर्व उसके साथ मारपीट व ज्यादती की गई। पिता ने गैंगरेप की आशंका भी जाहिर की थी। बावजूद इसके, कदम के अनुसार, तत्कालीन सरकार ने इन गंभीर आरोपों पर कोई संज्ञान नहीं लिया और न ही जांच सीबीआई को सौंपी गई।
कदम ने एक स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए दावा किया कि पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद एक व्यक्ति ने दिशा के शरीर पर अलग-अलग चोट और खरोंच के निशान होने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों के मद्देनज़र मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए थी।
राजनीतिक संलिप्तता पर सवाल
राम कदम ने यह भी पूछा कि यदि मामले में किसी राजनेता, अभिनेता या अधिकारी की संलिप्तता नहीं थी, तो तत्कालीन उद्धव सरकार को सीबीआई जांच कराने में संकोच क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि अब सीबीआई की एफआईआर में आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के नाम सामने आने के बाद मामले को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि यह मामला वर्षों से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। दिशा सालियन की मृत्यु जून 2020 में हुई थी और तब से उनके पिता लगातार सीबीआई जांच की मांग करते आ रहे थे।
सुप्रिया सुले पर पलटवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राम कदम ने पूछा कि क्या वह न्यायपालिका से ऊपर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा एफआईआर न्यायालय के निर्देश पर दर्ज की गई है और न्यायिक आदेश का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। कदम ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
मराठा आरक्षण पर फडणवीस का बचाव
राम कदम ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर भी बात की और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बचाव किया। उन्होंने कहा कि फडणवीस सरकार ने मराठा समुदाय की लगभग सभी मांगें पूरी की हैं। कुछ मांगों पर चर्चा जारी है, जबकि कुछ ऐसी भी हैं जिन्हें स्वीकार करने के बावजूद अदालत में कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार झूठे वादे करने या जनता को गुमराह करने में विश्वास नहीं रखती।
आगे क्या होगा
सीबीआई की एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर गर्माता दिख रहा है। जांच एजेंसी की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखना अहम होगा। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही कई मोर्चों पर उठापटक के दौर से गुजर रही है।