भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर ने जुटाया ₹11,700 करोड़ से अधिक फंड, 2025 के बाद आई निवेश में तेज़ी
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेज़ी से परिपक्व हो रहा है — ट्रैकक्सन टेक्नोलॉजीज की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश के सेमीकंडक्टर सेक्टर ने अब तक कुल 1.4 अरब डॉलर (लगभग ₹11,700 करोड़) की फंडिंग जुटाई है, जिसमें से आधी से अधिक पूँजी 2025 के बाद आई है। 15 सितंबर 2026 को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया कि देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में 3,557 कंपनियाँ शामिल हैं, जिनमें से 281 ने फंडिंग जुटाई है और 142 ने इक्विटी निवेश हासिल किया है।
मुख्य घटनाक्रम: सबसे बड़े फंडिंग राउंड
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक के दो सबसे बड़े फंडिंग राउंड सितंबर 2025 में हुए। आईएल जेआईएन इलेक्ट्रॉनिक्स ने 198 मिलियन डॉलर का प्राइवेट इक्विटी फंड जुटाया, जबकि टेसॉल्व सेमीकंडक्टर ने उसी महीने 150 मिलियन डॉलर का प्राइवेट इक्विटी राउंड पूरा किया। ये दोनों सौदे इस बात की पुष्टि करते हैं कि वैश्विक और घरेलू निवेशक भारत के चिप पारिस्थितिकी तंत्र को लेकर गंभीर हो चुके हैं।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बड़ी राशि वाले सौदों की संख्या में हाल के वर्षों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जो सेक्टर की बढ़ती परिपक्वता का संकेत देती है।
सबसे अधिक फंडिंग पाने वाले सेगमेंट
इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) इस सेक्टर में सर्वाधिक फंडिंग पाने वाला बिज़नेस सेगमेंट बनकर उभरा है। इसने 2025 से अब तक 313 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, जिनमें से 89 मिलियन डॉलर पिछले 12 महीनों में आए।
इसके बाद एम्बेडेड हार्डवेयर का स्थान है, जिसने 2025 से अब तक 51.9 मिलियन डॉलर जुटाए — और उल्लेखनीय बात यह है कि यह पूरी राशि पिछले 12 महीनों में ही हासिल हुई। पावर मैनेजमेंट इंटीग्रेटेड सर्किट और फैबलैस सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग भी निवेशकों का ध्यान खींचने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे।
बेंगलुरु सबसे बड़ा केंद्र, नोएडा-हैदराबाद भी आगे
भौगोलिक दृष्टि से, बेंगलुरु सेमीकंडक्टर कंपनियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहाँ 626 कंपनियाँ कार्यरत हैं — यह कुल इकोसिस्टम का लगभग 18 प्रतिशत है। इससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस सेक्टर की कुल इक्विटी फंडिंग में बेंगलुरु की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत रही है।
नोएडा, गुरुग्राम, कोच्चि और हैदराबाद भी उभरते सेमीकंडक्टर क्लस्टर के रूप में रिपोर्ट में चिह्नित किए गए हैं। यह भौगोलिक विविधीकरण दर्शाता है कि इकोसिस्टम अब केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहा।
अधिग्रहण और IPO में भी उछाल
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 में अब तक इस सेक्टर में 62 अधिग्रहण और 42 इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) हुए हैं — जो निवेशकों और उद्योग की परिपक्वता को दर्शाने वाले मज़बूत संकेत हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में अपनी घरेलू क्षमताओं को विस्तार देने पर बल दे रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में लगभग ₹1.9 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ तक पहुँच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल फोन उत्पादन ₹18,000 करोड़ से बढ़कर ₹6.27 लाख करोड़ हो गया, जबकि मोबाइल फोन निर्यात लगभग ₹1,500 करोड़ से उछलकर ₹2.59 लाख करोड़ पर आ गया — यह वृद्धि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव का प्रमाण है।
आने वाले वर्षों में, जैसे-जैसे फैब स्थापना और डिजाइन क्षमताएँ बढ़ेंगी, यह निवेश गतिविधि और तेज़ होने की उम्मीद है।