दिशा सालियान केस: सतीश सालियान का उद्धव ठाकरे पर सवाल — 'बेटे को काबू में क्यों नहीं रखा?'
सारांश
मुख्य बातें
दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद विवाद नई ऊँचाई पर पहुँच गया है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने 17 सितंबर 2026 को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने बेटे को गलत काम करने से क्यों नहीं रोकते। इसी बीच परिवार के वकील निलेश ओझा ने आदित्य ठाकरे और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजे जाने की घोषणा की है।
मुख्य घटनाक्रम
वकील निलेश ओझा ने बताया कि जब सतीश सालियान ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, तो आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने अपने एफिडेविट में दावा किया था कि यह मामला उनके खिलाफ एक राजनीतिक साजिश है और उनका इस केस से कोई संबंध नहीं। ओझा के अनुसार अदालत ने उनकी आपत्ति खारिज कर दी और उनके एफिडेविट को असत्य पाया गया।
वकील ओझा ने यह भी कहा कि सीबीआई के वकील ने स्वयं अदालत में बयान दिया, जिसके आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि आदित्य ठाकरे का एफिडेविट झूठा था। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए सीबीआई को नए सिरे से मामला दर्ज कर जाँच का आदेश दिया।
₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस
वकील निलेश ओझा के अनुसार आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को भेजे गए मानहानि नोटिस में 7 दिन के भीतर तीन शर्तें रखी गई हैं — सार्वजनिक माफी, सतीश सालियान के नाम ₹500 करोड़ का डीडी, और सभी प्रमुख मीडिया चैनलों पर 3 मिनट का माफीनामा वीडियो प्रसारित करना।
ओझा ने स्पष्ट किया कि यह नोटिस आपराधिक मामले से स्वतंत्र है — यानी मानहानि का निपटारा होने पर भी आपराधिक दायित्व से मुक्ति नहीं मिलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान नहीं हुआ तो संपत्ति कुर्की तक की कानूनी कार्रवाई संभव है।
सतीश सालियान का उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला
उद्धव ठाकरे ने एफआईआर दर्ज होने के बाद परिवार पर बदनामी फैलाने का आरोप लगाया था। इस पर सतीश सालियान ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, "आप अपने बेटे को कंट्रोल और काबू में क्यों नहीं रखते? आप उसे गलत काम क्यों करने देते हैं? जब कोई गलत काम करता है तो बदनामी तो होती ही है, खासकर जब वह इतने बड़े पद पर हो। उसे मंत्री क्यों बनाया? वो अंदर जाने वाले हैं, इसलिए बचाने की कोशिश की जा रही है।"
सतीश सालियान ने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे झूठ बोल रहे हैं और उनका मोबाइल टावर लोकेशन मलाड में मेल खा रहा है, जो उनके अनुसार एक ठोस सबूत है।
सीबीआई जाँच और न्यायिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इस मामले में इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को जाँच सौंपी थी और सीबीआई ने आदित्य ठाकरे को क्लीन चिट दी थी। अब उच्च न्यायालय के ताजा आदेश के बाद सीबीआई को नए सिरे से मामला दर्ज कर जाँच करने का निर्देश दिया गया है। यह मामला राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि इसमें एक प्रमुख क्षेत्रीय दल के नेता का नाम जुड़ा हुआ है।
आगे क्या होगा
मानहानि नोटिस पर 7 दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद कानूनी कार्रवाई का अगला चरण शुरू हो सकता है। सीबीआई की ताजा जाँच की दिशा और गति इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक एवं न्यायिक भविष्य तय करेगी। इस मामले में आने वाले हफ्ते कई नए मोड़ ला सकते हैं।