दिशा सालियान के पिता का आदित्य ठाकरे-अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
दिशा सालियान मौत मामले में 17 सितंबर 2026 को एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया, जब दिशा के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों नेताओं से 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी माँगने, अपने बयान वापस लेने और ₹500 करोड़ का हर्जाना अदा करने की माँग की गई है।
मानहानि नोटिस में क्या है माँग
सतीश सालियान ने अपने नोटिस में कहा है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख के कुछ सार्वजनिक बयानों से उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँचा है। नोटिस में तीन प्रमुख माँगें रखी गई हैं — विवादित बयानों को वापस लिया जाए, सार्वजनिक रूप से माफी माँगी जाए, और क्षतिपूर्ति के रूप में ₹500 करोड़ का हर्जाना दिया जाए। दोनों नेताओं की ओर से अब तक इस नोटिस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सीबीआई जाँच का पृष्ठभूमि संदर्भ
यह नोटिस ऐसे समय आया है जब दिशा सालियान मौत मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के हाथ में है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की और पुराने जाँच रिकॉर्ड, पुलिस कार्रवाई, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक तथा पोस्टमॉर्टम दस्तावेजों की नए सिरे से जाँच शुरू की है। इस एफआईआर में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और रिया चक्रवर्ती समेत कई नाम शामिल किए गए हैं।
दिशा सालियान कौन थीं और मामले की शुरुआत
दिशा सालियान अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके की एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी। शुरुआती जाँच में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना और कहा था कि हत्या या साजिश के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। हालाँकि, पिता सतीश सालियान शुरू से ही इस निष्कर्ष को चुनौती देते रहे और मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट तक ले गए।
आदित्य ठाकरे का पक्ष
आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान से किसी भी प्रकार का संबंध होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि वह दिशा से कभी नहीं मिले और उनका नाम राजनीतिक कारणों से इस मामले से जोड़ा जा रहा है। ठाकरे ने इसे अपनी छवि को नुकसान पहुँचाने की साजिश करार दिया है और माँग की है कि जाँच एजेंसियाँ बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के अपना काम करें।
आगे क्या होगा
अब दोनों नेताओं के पास 7 दिन का समय है, जिसके भीतर उन्हें नोटिस का जवाब देना होगा। यदि माफी और हर्जाना नहीं मिला, तो कथित तौर पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि CBI की जाँच और यह मानहानि नोटिस एक साथ आने से यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गरमा गया है। आने वाले हफ्तों में दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया और CBI की जाँच की दिशा इस मामले में अहम मोड़ तय करेगी।