दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा का दावा — सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़, उद्धव ठाकरे पर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
दिशा सालियान मामले में 18 सितंबर 2026 को एक बड़ा खुलासा सामने आया, जब सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने मुंबई में गंभीर आरोप लगाए। ओझा ने दावा किया कि मामले से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई और 4 जून से 9 जून के बीच की वीडियो रिकॉर्डिंग कथित तौर पर डिलीट की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उद्धव ठाकरे आरोपी हैं, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक महत्वपूर्ण गवाह हैं।
सीसीटीवी फुटेज छेड़छाड़ के आरोप
वकील नीलेश ओझा ने दावा किया कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर बैकअप लेकर उसे सील किया था। इसके बावजूद, उनके अनुसार कुछ दिन बाद पूर्व पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषित किया था कि घटना के समय आदित्य ठाकरे और अन्य लोग वहाँ मौजूद नहीं थे।
ओझा ने सवाल उठाया कि यदि फुटेज पहले ही सील हो चुकी थी, तो उसके आधार पर यह दावा कैसे किया गया। उन्होंने बताया कि 2025 में उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान जब फोरेंसिक रिपोर्ट माँगी गई, तो पुलिस ने स्वीकार किया कि फुटेज की फोरेंसिक जाँच पहले हुई ही नहीं थी। इसके बाद जाँच के लिए फुटेज भेजी गई, और रिपोर्ट में कथित तौर पर डिलीटेड रिकॉर्डिंग की पुष्टि हुई।
ओझा ने यह भी दावा किया कि बाद में बैकअप वाली हार्ड डिस्क भी गायब हो गई।
सचिन वाझे की बहाली और उद्धव ठाकरे पर आरोप
ओझा के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे आदित्य ठाकरे के कथित गलत कामों को छिपाने के लिए सचिन वाझे को दोबारा पुलिस सेवा में बहाल कराया था। उनके अनुसार, वाझे उस समय एक कस्टोडियल डेथ मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर निलंबित थे और जमानत पर बाहर थे।
ओझा ने दावा किया कि दिशा सालियान की मौत से दो दिन पहले वाझे को सेवा में वापस लिया गया था, जो अदालत के आदेश के खिलाफ था। पूर्व पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह ने कथित तौर पर अपने बयान में कहा था कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की ओर से वाझे को बहाल करने का दबाव डाला गया था।
देवेंद्र फडणवीस की भूमिका
ओझा ने दावा किया कि महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मामले के महत्वपूर्ण गवाह हैं। उनके अनुसार, एंटीलिया मामले में सचिन वाझे की गिरफ्तारी के बाद जब उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, तब फडणवीस ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उद्धव ठाकरे ने उनसे वाझे को बहाल करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने अदालत के आदेश का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार किया था।
सीबीआई कार्रवाई की संभावना
वकील ओझा ने दावा किया कि उनकी ओर से सौंपे गए सबूतों के आधार पर सीबीआई परमबीर सिंह, शैलेंद्र नागरकर, अर्जुन राजाने, सचिन वाझे और आदित्य ठाकरे के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की तैयारी कर सकती है। हालाँकि, यह सभी दावे अभी वकील के बयान तक सीमित हैं और सीबीआई की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ओझा ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ साबित हो, तो संबंधित लोगों को हिरासत में लेकर आगे की जाँच की जा सकती है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब उच्च न्यायालय की निगरानी में है और फोरेंसिक रिपोर्ट के निष्कर्ष अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव पहले से ही तीखा है। गौरतलब है कि दिशा सालियान केस वर्षों से राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है और इस नए खुलासे के बाद एक बार फिर यह सुर्खियों में है।