दिशा सालियान मामला: राम कदम का आरोप — उद्धव सरकार ने जानबूझकर दबाई CBI जाँच
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राम कदम ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में आरोप लगाया कि दिशा सालियान की मौत के मामले को उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्रित्व काल में जानबूझकर दबाया गया था। यह बयान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद संजय राउत की उस टिप्पणी के जवाब में आया, जिसमें राउत ने सीबीआई (CBI) द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने को ठाकरे परिवार के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया था।
राम कदम का पलटवार
कदम ने संजय राउत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'संजय राउत को कम से कम अपना बचाव करने के लिए ऐसे तर्क देने चाहिए जिनका कोई आधार हो। उस समय आप गहरी नींद में सो रहे थे, जब दिशा के पिता बार-बार कह रहे थे कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि परेशान किए जाने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी? उस समय आप जांच कराने को तैयार नहीं थे और आपकी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी थी।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अदालत के आदेश के बाद सीबीआई ने इस पुराने मामले में एफआईआर दर्ज की है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है।
स्टिंग ऑपरेशन और दबाए गए साक्ष्य के दावे
राम कदम ने यह भी दावा किया कि एक स्टिंग ऑपरेशन में पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद एक कर्मचारी ने बताया था कि दिशा सालियान के शरीर पर खरोंच के निशान पाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया और उस पार्टी में शामिल लोगों की पहचान भी सामने नहीं आने दी गई।
कदम के अनुसार, दिशा के पिता की बार-बार की गई सीबीआई जाँच की माँग को भी ठुकरा दिया गया था। उन्होंने कहा, 'अब कोर्ट ने सीबीआई जाँच के आदेश दिए तो आपको (संजय राउत को) मिर्ची लग गई।' गौरतलब है कि ये सभी आरोप अभी तक कथित हैं और जाँच एजेंसी की रिपोर्ट आना बाकी है।
संजय राउत का रुख
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सीबीआई एफआईआर को बालासाहेब ठाकरे के परिवार को बदनाम करने की 'राजनीतिक साजिश' बताया है। राउत का कहना है कि यह कदम विपक्ष को घेरने और महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल मचाने की कोशिश है। हालाँकि, कदम ने इस तर्क को 'आधारहीन' करार दिया।
मराठा मार्च पर अनुमति विवाद
इसी प्रेस वार्ता में राम कदम ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल के मुंबई मार्च को पुलिस की अनुमति न मिलने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन इसके लिए समय का चुनाव महत्वपूर्ण है।
कदम ने तर्क दिया कि गणपति उत्सव के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु लालबागचा राजा और सिद्धिविनायक के दर्शन के लिए मुंबई आते हैं, ऐसे में मार्च से यातायात और आम नागरिकों की भावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'क्या मुंबई में मराठा नहीं रहते?' — जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे मार्च के विरोध में नहीं, बल्कि उसके समय पर सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या होगा
दिशा सालियान मामले में सीबीआई जाँच अब औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है और इसके आने वाले हफ्तों में और नए खुलासे होने की संभावना है। महाराष्ट्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।