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दिशा सालियान केस: किला कोर्ट में CBI जांच की निगरानी को लेकर याचिका, 18 नवंबर को सुनवाई

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दिशा सालियान केस: किला कोर्ट में CBI जांच की निगरानी को लेकर याचिका, 18 नवंबर को सुनवाई

सारांश

दिशा सालियान केस में वकील नीलेश ओझा ने मुंबई के किला कोर्ट में CBI जांच को अदालती निगरानी में कराने की याचिका दाखिल की है। 18 नवंबर को सुनवाई तय। पिता सतीश सालियान ने राष्ट्रपति और सभी सांसदों को भी पत्र लिखकर मामले को संसद में उठाने की अपील की है।

मुख्य बातें

दिशा सालियान के वकील नीलेश ओझा ने 2 नवंबर 2026 को मुंबई किला कोर्ट में CBI जांच की न्यायिक निगरानी के लिए आवेदन दाखिल किया।
आवेदन में माँग है कि CBI नियमित स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे; अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित।
वकील का आरोप — कथित तौर पर 11 प्रत्यक्षदर्शी मौजूद होने और उच्च न्यायालय के आदेश में 'मिनी चार्जशीट' जैसे तथ्य होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं।
पिता सतीश सालियान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा-राज्यसभा के सभी सांसदों को पत्र लिखकर मामला संसद में उठाने की अपील की।
वकील ओझा ने देशभर के नागरिकों से CBI कार्यालय तक मार्च में शामिल होने की भी अपील की है।

मुंबई के किला कोर्ट में 2 नवंबर 2026 को दिशा सालियान मृत्यु मामले में एक अहम आवेदन दाखिल किया गया, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को न्यायालय की प्रत्यक्ष निगरानी में कराने की माँग की गई है। दिशा के वकील नीलेश ओझा ने बताया कि इस आवेदन पर 18 नवंबर 2026 को अगली सुनवाई निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि जांच की गति असंगत रूप से धीमी रही है और अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

आवेदन में क्या माँग की गई

वकील नीलेश ओझा के अनुसार, आवेदन में माँग की गई है कि CBI को अपनी जांच की स्थिति और प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष नियमित रूप से प्रस्तुत करनी हो। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से जांच एजेंसी को अपनी कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकेगा।

ओझा ने दावा किया कि यदि जांच में कोई कमी पाई जाती है, तो अदालत CBI को कानून, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने का निर्देश देने में सक्षम होगी।

जांच में कथित चूक

ओझा के अनुसार, मामले में कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। इनमें आदित्य ठाकरे की गिरफ्तारी न होना और उनके पक्ष की ओर से बताए गए गवाहों के बयान दर्ज न किए जाना प्रमुख हैं।

ओझा ने यह भी दावा किया कि उच्च न्यायालय के एक आदेश में मामले से जुड़े ऐसे तथ्य दिए गए हैं जिन्हें उन्होंने 'मिनी चार्जशीट' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि उस आदेश के आधार पर कथित तौर पर करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए थी। वकील का यह भी आरोप है कि CBI के पास 11 प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी है, फिर भी कोई गिरफ्तारी नहीं की गई।

सतीश सालियान का संसद से अपील

दिशा के पिता सतीश सालियान ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के साथ-साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी पत्र भेजा है। पत्र में उनसे इस मामले को संसद के भीतर और बाहर उठाने का अनुरोध किया गया है।

पत्र में सवाल उठाया गया है कि जब मामले में कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से जुड़े साक्ष्य मौजूद होने का दावा किया जा रहा है, तो कथित प्रभावशाली आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि आम नागरिकों और कथित हाई-प्रोफाइल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गति में अंतर दिखता है।

CBI मार्च की अपील

ओझा ने देशभर के नागरिकों से CBI कार्यालय तक मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि इस मार्च के ज़रिए एजेंसी से यह सवाल किया जाएगा कि कथित साक्ष्य और गवाहों की जानकारी होने के बावजूद आदित्य ठाकरे और अन्य कथित आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई।

गौरतलब है कि दिशा सालियान की मौत का मामला वर्षों से विवादों में रहा है और इसे लेकर न्यायिक और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब 18 नवंबर 2026 की सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल जांच की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहता — वह संस्थागत जवाबदेही का सवाल बन जाता है। राष्ट्रपति और सांसदों को पत्र लिखना परिवार की कानूनी थकान का संकेत है, और 18 नवंबर की सुनवाई यह तय करेगी कि अदालत इस दबाव को वैधानिक रूप देने को तैयार है या नहीं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिशा सालियान केस में किला कोर्ट में क्या याचिका दाखिल की गई है?
दिशा के वकील नीलेश ओझा ने मुंबई के किला कोर्ट में CBI जज के समक्ष आवेदन दाखिल किया है, जिसमें माँग की गई है कि CBI की जांच अदालत की प्रत्यक्ष निगरानी में हो और एजेंसी नियमित स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। इस पर 18 नवंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है।
दिशा सालियान केस में अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
वकील नीलेश ओझा का आरोप है कि CBI के पास कथित तौर पर 11 प्रत्यक्षदर्शी और पेन ड्राइव समेत अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं, फिर भी आदित्य ठाकरे सहित किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। उनका कहना है कि उच्च न्यायालय के एक आदेश में दिए गए तथ्यों के आधार पर करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए थी।
सतीश सालियान ने राष्ट्रपति और सांसदों को पत्र क्यों लिखा?
दिशा के पिता सतीश सालियान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा-राज्यसभा के सभी सांसदों को पत्र लिखकर इस मामले को संसद के भीतर और बाहर उठाने की अपील की है। उनका आरोप है कि कथित प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में आम नागरिकों की तुलना में भेदभाव किया जा रहा है।
अदालती निगरानी में CBI जांच से क्या बदलेगा?
यदि अदालत आवेदन स्वीकार करती है, तो CBI को नियमित स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करनी होगी। इससे जांच एजेंसी जवाबदेह होगी और अदालत आवश्यकता पड़ने पर SOP व सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्देश दे सकती है।
CBI मार्च की अपील क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
वकील नीलेश ओझा ने देशभर के नागरिकों से CBI कार्यालय तक मार्च में शामिल होने की अपील की है। इस मार्च का उद्देश्य एजेंसी से यह सार्वजनिक सवाल पूछना है कि कथित साक्ष्य और गवाह होने के बावजूद आदित्य ठाकरे और अन्य कथित आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।
राष्ट्र प्रेस
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