30 अक्टूबर 2026
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राजस्थान RAS अधिकारी पंकज ओझा को चार्जशीट, फेसबुक पर सांप्रदायिक पोस्ट का आरोप; ओझा ने किया खंडन

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राजस्थान RAS अधिकारी पंकज ओझा को चार्जशीट, फेसबुक पर सांप्रदायिक पोस्ट का आरोप; ओझा ने किया खंडन

सारांश

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ RAS अधिकारी पंकज ओझा को अक्टूबर 2025 की कथित सांप्रदायिक फेसबुक पोस्टों के लिए चार्जशीट थमाई है। ओझा का दावा है कि उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट वायरल किए गए और वे खुद पीड़ित हैं — यह मामला डिजिटल साक्ष्य और सिविल सेवकों की सोशल मीडिया जवाबदेही, दोनों सवाल एक साथ उठाता है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ RAS अधिकारी पंकज ओझा को आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया है।
आरोप: अक्टूबर 2025 में फेसबुक पर कथित जाति-आधारित, सांप्रदायिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्टें — 16, 19, 21, 22, 23, 24, 25 और 27 अक्टूबर को।
आचरण राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का उल्लंघन बताया गया।
ओझा को 15 दिनों के भीतर जवाब देना होगा; समय सीमा चूकने पर एकतरफा कार्रवाई का प्रावधान।
ओझा का दावा: पोस्टें फर्जी हैं, उन्होंने 27 जनवरी 2026 को 'राजकाज' पोर्टल पर जवाब दाखिल किया था और अशोक नगर थाने में शिकायत भी दर्ज है।

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी पंकज ओझा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की औपचारिक शुरुआत करते हुए उन्हें आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया है। कार्मिक विभाग ने उन पर अक्टूबर 2025 के दौरान फेसबुक पर कथित तौर पर जाति-आधारित, सांप्रदायिक एवं राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगाया है। ओझा ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे अपने विरुद्ध एक साजिश बताया है।

मुख्य घटनाक्रम

चार्जशीट के अनुसार, ओझा ने कथित तौर पर अपने फेसबुक अकाउंट 'आरएएस पंकज ओझा' के ज़रिये 16, 19, 21, 22, 23, 24, 25 और 27 अक्टूबर 2025 को आपत्तिजनक, भड़काऊ और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील सामग्री साझा की। उस समय वह गोपालन विभाग के निदेशक पद पर कार्यरत थे। फिलहाल वह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के रूप में तैनात हैं।

आरोप पत्र में यह भी उल्लेख है कि कतिपय पोस्टों में प्रधानमंत्री तथा विभिन्न राज्यों के वर्तमान व पूर्व मुख्यमंत्रियों के संदर्भ में कथित रूप से अपमानजनक और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया गया।

विभाग की कार्रवाई और नियमों का उल्लंघन

शिकायत मिलने के बाद कार्मिक विभाग ने 19 जनवरी 2026 को ओझा से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण माँगा था। विभाग का कहना है कि उस नोटिस का कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद चार्जशीट जारी कर उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने इस आचरण को राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का उल्लंघन बताया है। विभाग के अनुसार, ऐसी सामग्री सामाजिक और धार्मिक सौहार्द को प्रभावित करने के साथ-साथ सरकार व विभाग की छवि को भी नुकसान पहुँचाती है।

चार्जशीट में 25 अक्टूबर 2025 की एक कथित पोस्ट का विशेष उल्लेख है, जिसमें केंद्र सरकार की जाति-आधारित जनगणना नीति पर सवाल उठाया गया था। उस पोस्ट में लिखा बताया गया है: 'सिर्फ जाति आधारित जनगणना ही क्यों? जाति आधारित करदाताओं और जाति आधारित अपराधों का आँकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पता चल सके कि कौन कितना योगदान देता है।' विभाग ने इसे सरकारी नीति की आलोचना मानते हुए सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला करार दिया है।

पंकज ओझा का पक्ष

पंकज ओझा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा, 'मैंने कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं की। मेरे नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट प्रसारित किए गए। वास्तव में मैं खुद इस मामले का पीड़ित हूँ।'

ओझा के अनुसार, उन्होंने 29 दिसंबर 2025 को कार्मिक सचिव और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की माँग की थी। उन्होंने जयपुर पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई और अशोक नगर थाने में भी मामला दर्ज कराया गया, जो कथित तौर पर अभी जाँच के अधीन है।

ओझा ने यह भी दावा किया कि 27 जनवरी 2026 को उन्होंने राज्य सरकार के 'राजकाज' पोर्टल के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल किया था, जिसमें स्पष्ट किया था कि कथित पोस्टें फर्जी हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास जवाब जमा करने की रसीद भी मौजूद है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सिविल सेवकों के सोशल मीडिया आचरण को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि केंद्र और कई राज्य सरकारें पहले भी सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए कार्रवाई कर चुकी हैं। इस मामले में 'फर्जी स्क्रीनशॉट' का तर्क डिजिटल साक्ष्य की जाँच की अहमियत को उजागर करता है, जो किसी भी अनुशासनात्मक प्रक्रिया में निर्णायक होगी।

आगे क्या

पंकज ओझा को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो विभागीय जाँच आगे बढ़ेगी। साथ ही, अशोक नगर थाने में दर्ज शिकायत पर पुलिस जाँच भी समानांतर रूप से चल रही है। इस दोहरी प्रक्रिया — प्रशासनिक और आपराधिक — का नतीजा तय करेगा कि आरोपों में कितनी सत्यता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसी पर पूरा मामला टिका है। 'फर्जी स्क्रीनशॉट' का तर्क सुनने में आसान है, लेकिन इसे साबित करना उतना ही कठिन — और अगर साबित हो जाए, तो यह एक सरकारी अधिकारी को फँसाने की साजिश का गंभीर मामला बन जाता है। सरकार को डिजिटल फॉरेंसिक जाँच पहले करानी चाहिए थी, अनुशासनात्मक कार्रवाई बाद में।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकज ओझा को चार्जशीट क्यों दी गई?
राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने RAS अधिकारी पंकज ओझा पर अक्टूबर 2025 में फेसबुक पर कथित जाति-आधारित, सांप्रदायिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्टें साझा करने का आरोप लगाते हुए चार्जशीट जारी की है। इसे राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का उल्लंघन माना गया है।
पंकज ओझा का इन आरोपों पर क्या कहना है?
ओझा ने सभी आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाए गए। उनके अनुसार वे स्वयं इस मामले के पीड़ित हैं और उन्होंने अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है जो जाँच के अधीन है।
ओझा को जवाब देने के लिए कितना समय दिया गया है?
कार्मिक विभाग ने चार्जशीट जारी कर पंकज ओझा को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। समय सीमा में जवाब न मिलने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्या ओझा ने पहले भी कोई जवाब दाखिल किया था?
ओझा का दावा है कि उन्होंने 27 जनवरी 2026 को राज्य सरकार के 'राजकाज' पोर्टल के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल किया था और उनके पास जमा करने की रसीद भी है। हालाँकि कार्मिक विभाग का कहना है कि 19 जनवरी 2026 के स्पष्टीकरण नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला।
किन पोस्टों को आपत्तिजनक माना गया?
चार्जशीट के अनुसार अक्टूबर 2025 में 'आरएएस पंकज ओझा' फेसबुक अकाउंट से साझा की गई कई पोस्टों में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्रियों के लिए कथित असंसदीय भाषा और जाति-सांप्रदायिक सामग्री थी। 25 अक्टूबर 2025 की एक कथित पोस्ट में जाति-आधारित जनगणना नीति पर सवाल उठाए गए थे, जिसे सरकारी नीति की आलोचना मानकर नियमों का उल्लंघन बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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