राजस्थान में 183 आरएएस अधिकारियों का तबादला, स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने 11 अगस्त को आगामी पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के 183 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए। कार्मिक विभाग द्वारा मंगलवार को जारी ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए और इसे चुनाव-पूर्व प्रशासनिक तैयारी की दिशा में राज्य का अब तक का सबसे बड़ा एकल फेरबदल माना जा रहा है।
फेरबदल की वजह
राज्य चुनाव आयोग ने पहले ही निर्देश दिए थे कि जो अधिकारी तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पद पर तैनात हैं, अथवा अपने गृह जिले में कार्यरत हैं, उन्हें तत्काल स्थानांतरित किया जाए। इन निर्देशों के अनुपालन में यह फेरबदल किया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
प्रमुख तबादले
2008 बैच के आरएएस अधिकारी योगेश कुमार श्रीवास्तव, जो मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के कार्यालय में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के पद पर कार्यरत थे, को अब जयपुर स्थित गंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड का महाप्रबंधक नियुक्त किया गया है। यह तबादला विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि श्रीवास्तव सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े हुए थे।
चर्चित आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा का भी तबादला किया गया है — दो महीनों में यह उनका दूसरा स्थानांतरण है। मीणा को दौसा में सहायक कलेक्टर (मुख्यालय) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह सवाई माधोपुर में प्रशासनिक सुधार और समन्वय विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत थीं।
इसके अलावा महावीर खराड़ी, अशोक कुमार IV, नरेश बुनकर, राजवीर सिंह चौधरी, अशोक कुमार शर्मा, आलोक जैन, आकाश रंजन, जगदीश प्रसाद गौड़, राजकुमार कसवा और ओम प्रकाश सहारन सहित कई अधिकारियों की पोस्टिंग बदली गई है।
किन पदों पर हुए बदलाव
तबादला सूची में कई जिलों, विभागों, विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों में तैनात अधिकारी शामिल हैं। अनेक अधिकारियों को उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम), अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि चुनाव-संवेदनशील पदों पर ऐसे अधिकारी न रहें जिनके स्थानीय राजनीतिक संबंध हों।
आगे क्या होगा
प्रशासनिक हलकों में आने वाले दिनों में आईएएस अधिकारियों के तबादले की एक अलग सूची जारी होने की भी उम्मीद है। यह संभावित फेरबदल राज्य सरकार की उस व्यापक कवायद का हिस्सा हो सकता है, जिसका लक्ष्य आचार संहिता लागू होने से पहले पूरे प्रशासनिक तंत्र को चुनाव के अनुकूल बनाना है। गौरतलब है कि आचार संहिता के जल्द लागू होने की उम्मीद के बीच सरकार के पास यह फेरबदल करने की सीमित समय-सीमा थी।