29 अक्टूबर 2026
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राजस्थान IAS शिखर अग्रवाल APO पर, ₹6.16 करोड़ में 40 विला-कॉटेज खरीद का मामला

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राजस्थान IAS शिखर अग्रवाल APO पर, ₹6.16 करोड़ में 40 विला-कॉटेज खरीद का मामला

सारांश

राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को APO पर रखा गया — एक ही कंपनी से ₹6.16 करोड़ में 40 विला-कॉटेज खरीद और उसी कंपनी को वापस लीज पर देने के आरोप हैं। IPS अधिकारी पंकज चौधरी ने कर्जत रिसॉर्ट में 50% हिस्सेदारी और ₹1,000 करोड़ से अधिक के लेनदेन की CBI जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को 29 अक्टूबर 2026 की देर रात APO पर रखा।
आरोप है कि ढाई वर्षों में एक निजी कंपनी से ₹6.16 करोड़ में 40 विला-कॉटेज खरीदे गए — अजबगढ़ (अलवर) में 20 विला और बुजरा (उदयपुर) में 20 कॉटेज।
इन संपत्तियों को उसी कंपनी को वापस लीज पर दिया गया; सालाना लीज भुगतान लगभग ₹2 करोड़ ।
आईपीएस पंकज चौधरी ने कर्जत (मुंबई के पास) में 400 कमरों के रिसॉर्ट प्रोजेक्ट में अग्रवाल की कथित 50% हिस्सेदारी का आरोप लगाया।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के हवाले से दावा — CBI जाँच में ₹1,000 करोड़ से अधिक के लेनदेन का खुलासा संभव।
अग्रवाल MSME विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर थे; सभी आरोप अभी सत्यापित नहीं।

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 की देर रात एपीओ (अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर) पर रख दिया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई उन गंभीर आरोपों के बाद हुई है, जिनके अनुसार पिछले ढाई वर्षों में एक ही निजी कंपनी से 40 विला-कॉटेज लगभग ₹6.16 करोड़ में खरीदे गए और बाद में उसी कंपनी को लीज पर दे दिए गए।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य के कार्मिक विभाग ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए यह आदेश जारी किया। एपीओ का अर्थ है कि संबंधित अधिकारी को उनके वर्तमान पद से हटा दिया गया है, लेकिन कोई नई नियुक्ति अभी तक नहीं दी गई है।

कथित तौर पर संपत्तियों की यह खरीद दो स्थानों पर हुई — अलवर जिले के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर जिले के बुजरा में 20 कॉटेज। रिपोर्टों के अनुसार इन संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी प्राइवेट कंपनी को वापस लीज पर दिया गया।

वित्तीय विवरण

अधिकारियों के मुताबिक बुजरा में प्रति कॉटेज ₹4 लाख सालाना और अजबगढ़ में प्रति विला ₹5 लाख सालाना की दर से लीज तय की गई। इस हिसाब से कुल वार्षिक लीज भुगतान लगभग ₹2 करोड़ बनता है।

गौरतलब है कि संपत्ति खरीद और उसी कंपनी को लीज पर वापस देने की यह संरचना वित्तीय अनुचितता के संदेह को जन्म देती है — एक ऐसा पैटर्न जिसकी जाँच में अक्सर आय से अधिक संपत्ति के मामले उजागर होते हैं।

शिखर अग्रवाल का प्रशासनिक कद

अग्रवाल राजस्थान सरकार में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा रहे थे। वे उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर थे। इसके अलावा वे औद्योगिक विकास और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े प्रमुख पदों पर भी रह चुके हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में उद्योग-निवेश से जुड़े सौदों की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठाए जाते रहे हैं।

अन्य आरोप और जाँच की माँग

आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने अग्रवाल पर अतिरिक्त आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मुंबई के पास कर्जत में एक प्राइवेट ग्रुप द्वारा एक बड़ा रिसॉर्ट प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है, जिसमें अग्रवाल की कथित तौर पर 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। चौधरी ने इसे लगभग 400 कमरों वाला अरबों रुपए के निवेश का प्रोजेक्ट बताया है।

चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि राजस्थान मुख्यमंत्री कार्यालय और उद्योग विभाग से जुड़े पदों पर अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान कुछ कंपनियों को बड़े सौदे मिले। उन्होंने इन लेनदेन और सौदों की परिस्थितियों की जाँच की माँग की है।

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों का हवाला देते हुए चौधरी ने दावा किया कि सीबीआई जाँच में ₹1,000 करोड़ से अधिक के वित्तीय लेनदेन का खुलासा हो सकता है। हालाँकि, ये सभी आरोप अभी तक आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

आगे क्या होगा

फिलहाल अग्रवाल को नई पोस्टिंग का इंतजार है। जाँच की माँगों और लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस मामले में राज्य स्तरीय या केंद्रीय एजेंसी द्वारा औपचारिक जाँच की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

न चार्जशीट। असली सवाल यह है कि ₹6.16 करोड़ की संपत्ति खरीद, उसी कंपनी को वापस लीज और MSME व उद्योग विभाग के प्रमुख पदों पर कार्यकाल के दौरान हुए सौदों की स्वतंत्र जाँच कब और किस एजेंसी से होगी। IPS अधिकारी का सार्वजनिक आरोप और सांसद का CBI जाँच का दावा दबाव बनाते हैं, लेकिन बिना औपचारिक FIR या जाँच आदेश के ये आरोप ही रहेंगे। राजस्थान में इससे पहले भी वरिष्ठ नौकरशाहों पर लगे आरोप बिना नतीजे के ठंडे बस्ते में जाते देखे गए हैं — यही पैटर्न इस मामले की असली परीक्षा है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल पर क्या आरोप हैं?
शिखर अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने ढाई वर्षों में एक निजी कंपनी से ₹6.16 करोड़ में 40 विला-कॉटेज खरीदे और उन्हें उसी कंपनी को लीज पर दे दिया। इसके अलावा IPS पंकज चौधरी ने कर्जत में एक रिसॉर्ट प्रोजेक्ट में उनकी 50% कथित हिस्सेदारी का भी आरोप लगाया है।
APO क्या होता है और इसका मतलब क्या है?
APO यानी अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर एक प्रशासनिक स्थिति है, जिसमें किसी अधिकारी को उनके मौजूदा पद से हटा दिया जाता है लेकिन नई नियुक्ति अभी तक नहीं दी जाती। यह निलंबन नहीं है — अधिकारी सेवा में बने रहते हैं, केवल कार्यभार नहीं रहता।
40 विला-कॉटेज कहाँ खरीदे गए और लीज की रकम क्या थी?
अलवर जिले के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर जिले के बुजरा में 20 कॉटेज खरीदे गए। अजबगढ़ में प्रति विला ₹5 लाख और बुजरा में प्रति कॉटेज ₹4 लाख सालाना की दर से लीज तय हुई, जिससे कुल वार्षिक लीज लगभग ₹2 करोड़ बनती है।
IPS पंकज चौधरी ने क्या अतिरिक्त आरोप लगाए हैं?
पंकज चौधरी ने दावा किया है कि मुंबई के पास कर्जत में एक प्राइवेट ग्रुप का लगभग 400 कमरों वाला रिसॉर्ट प्रोजेक्ट बन रहा है, जिसमें अग्रवाल की कथित 50% हिस्सेदारी है। उन्होंने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के हवाले से यह भी कहा कि CBI जाँच में ₹1,000 करोड़ से अधिक के लेनदेन सामने आ सकते हैं।
क्या इस मामले में CBI जाँच होगी?
अभी तक कोई आधिकारिक CBI जाँच आदेश जारी नहीं हुआ है। IPS अधिकारी पंकज चौधरी और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने जाँच की माँग की है, लेकिन राज्य सरकार ने केवल प्रशासनिक आधार पर APO की कार्रवाई की है।
राष्ट्र प्रेस
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