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शहजाद पूनावाला का पलटवार: आरएसएस पर कांग्रेस के आरोप निराधार, इंडी गठबंधन महज अवसरवाद

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शहजाद पूनावाला का पलटवार: आरएसएस पर कांग्रेस के आरोप निराधार, इंडी गठबंधन महज अवसरवाद

सारांश

BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने RSS पंजीकरण पर कांग्रेस के आरोपों को कानूनी रूप से निराधार बताया और पूछा — 2004–2014 की UPA सरकार ने प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया? साथ ही इंडी गठबंधन को वैचारिक नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य अवसरवाद करार दिया।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने 16 जून को RSS पंजीकरण विवाद पर कांग्रेस के आरोपों को 'बेबुनियाद' और 'राजनीति से प्रेरित' बताया।
पूनावाला ने कहा कि भारतीय कानून में किसी संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
ABVP, सेवा भारती, विद्या भारती और भारतीय मजदूर संघ जैसे RSS-संबद्ध संगठन विधिवत पंजीकृत बताए गए।
कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे को 'कर्नाटक के राहुल गांधी' कहते हुए उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक अंकों की खोज बताया।
SP, कांग्रेस और AIMIM के गठबंधन को वोट बैंक की अवसरवादी राजनीति करार दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने 16 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियों पर कड़ा प्रतिवाद किया। पूनावाला ने कहा कि विपक्ष दशकों से RSS को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है, जबकि संगठन के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोप कानूनी और तथ्यात्मक दृष्टि से निराधार हैं। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव के इंडी गठबंधन संबंधी हालिया बयान पर भी निशाना साधते हुए विपक्षी एकता को 'अवसरवाद की राजनीति' करार दिया।

आरएसएस पंजीकरण विवाद: कानूनी पक्ष

पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को देश के कानून की पर्याप्त जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान या किसी वैधानिक प्रावधान के तहत किसी संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। उनके अनुसार, RSS से संबद्ध संगठन — जैसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), सेवा भारती, विद्या भारती और भारतीय मजदूर संघ — विधिवत पंजीकृत हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

पूनावाला ने कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रियंक खड़गे 'कर्नाटक के राहुल गांधी' हैं — जिस प्रकार कांग्रेस नेता राहुल गांधी RSS पर अनर्गल आरोप लगाते हैं, उसी शैली में प्रियंक खड़गे भी राजनीतिक अंक बटोरने के लिए बयानबाजी करते हैं।

कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल

पूनावाला ने तर्क दिया कि यदि कांग्रेस को वास्तव में RSS की गतिविधियाँ अवैध लगती थीं, तो 2004 से 2014 तक केंद्र में उनकी सरकार के दौरान संगठन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि दशकों की सत्ता में रहने के बाद भी कांग्रेस ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, जो यह दर्शाता है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं, न कि किसी वास्तविक कानूनी चिंता से। उनके अनुसार, विभिन्न राष्ट्रीय नेताओं ने समय-समय पर RSS के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की है।

इंडी गठबंधन पर BJP का हमला

अखिलेश यादव के इंडी गठबंधन संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूनावाला ने विपक्षी एकजुटता की नींव पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि SP, कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एक ही वोट बैंक की राजनीति करती हैं। उनके अनुसार, ये दल राजनीतिक ज़रूरत पड़ने पर एकजुट हो जाते हैं और जब अलग-अलग लड़ना फायदेमंद लगता है, तो एक-दूसरे पर निशाना साधने लगते हैं।

पूनावाला ने कहा कि इंडी गठबंधन के दलों के बीच बार-बार सार्वजनिक मतभेद उभरना यह साबित करता है कि यह गठबंधन किसी स्थायी वैचारिक आधार पर नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य हितों पर टिका है।

जनता की समझ पर BJP का दावा

पूनावाला ने दावा किया कि जनता विपक्षी गठबंधनों की असलियत को भलीभाँति समझ चुकी है और विकास तथा सुशासन की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडी गठबंधन के भीतर आंतरिक खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं और कई राज्यों में सीट-बँटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। आने वाले समय में विपक्षी एकता की परीक्षा राज्य विधानसभा चुनावों में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि UPA के दस वर्षों में RSS पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि RSS के पंजीकरण का सवाल केवल कानूनी नहीं, पारदर्शिता का भी है — और उस बहस को 'अनर्गल आरोप' कहकर खारिज करना उसे समाप्त नहीं करता। इंडी गठबंधन की आंतरिक दरारें वास्तविक हैं, लेकिन BJP की अपनी NDA के भीतर भी सहयोगियों से तनाव की खबरें समय-समय पर आती रही हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह बयानबाजी मतदाताओं को प्रभावित करती है, या दोनों पक्षों की 'अपनी-अपनी गैलरी' के लिए है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहजाद पूनावाला ने RSS पंजीकरण पर क्या कहा?
पूनावाला ने कहा कि भारतीय कानून के तहत किसी संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, इसलिए RSS पर यह आरोप निराधार है। उन्होंने यह भी बताया कि RSS से जुड़े ABVP, सेवा भारती और भारतीय मजदूर संघ जैसे संगठन विधिवत पंजीकृत हैं।
पूनावाला ने कांग्रेस के 2004–2014 के कार्यकाल का ज़िक्र क्यों किया?
उन्होंने तर्क दिया कि यदि RSS की गतिविधियाँ वाकई अवैध होतीं, तो कांग्रेस अपने 10 वर्षों के केंद्रीय शासन में संगठन पर प्रतिबंध लगा सकती थी। उनके अनुसार ऐसा न करना यह दर्शाता है कि ये आरोप राजनीतिक हैं, न कि कानूनी।
प्रियंक खड़गे को 'कर्नाटक के राहुल गांधी' क्यों कहा गया?
पूनावाला ने यह व्यंग्यात्मक तुलना इसलिए की क्योंकि उनके अनुसार प्रियंक खड़गे भी राहुल गांधी की तरह RSS पर बिना ठोस आधार के आरोप लगाते हैं। उनका कहना था कि यह राजनीतिक अंक बटोरने की कोशिश है।
BJP ने इंडी गठबंधन को अवसरवादी क्यों बताया?
पूनावाला ने कहा कि SP, कांग्रेस और AIMIM एक ही वोट बैंक की राजनीति करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर साथ आते हैं, अन्यथा एक-दूसरे पर निशाना साधते हैं। उनके अनुसार गठबंधन के भीतर बार-बार उभरने वाले मतभेद इसके अवसरवादी चरित्र को उजागर करते हैं।
RSS से जुड़े कौन-से संगठन पंजीकृत हैं?
पूनावाला के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), सेवा भारती, विद्या भारती और भारतीय मजदूर संघ RSS से संबद्ध प्रमुख संगठन हैं जो विधिवत पंजीकृत हैं। ये संगठन शिक्षा, सेवा और श्रम क्षेत्रों में सक्रिय बताए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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