दिग्विजय सिंह का RSS पर बड़ा बयान: 'लोकतंत्र में कोई संस्था जवाबदेही से ऊपर नहीं', प्रियंक खड़गे के सवालों का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने 17 जून 2026 को भोपाल में स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में कोई भी संस्था जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती। यह बयान कर्नाटक सरकार के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही को लेकर सरसंघचालक मोहन भागवत को लिखे गए पत्र के बाद आया है। दिग्विजय सिंह ने खड़गे के सवालों को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि ये मुद्दे संविधान और कानून के शासन से जुड़े हैं।
पुराने सवाल, नई चर्चा
दिग्विजय सिंह ने बताया कि ये वही सवाल हैं जो वे वर्षों से उठाते आए हैं। उन्होंने कहा कि 22 अक्टूबर 2021 को उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर RSS के पंजीयन, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय और कर अनुपालन की जाँच तथा पारदर्शिता की माँग की थी। उनके अनुसार, वह पत्र आज भी अनुत्तरित है।
उन्होंने तर्क दिया कि जब देश के सभी ट्रस्ट, सोसायटी, स्वयंसेवी संगठन और राजनीतिक दल वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन के दायरे में आते हैं, तो करोड़ों रुपये के लेन-देन करने वाले किसी बड़े संगठन पर समान नियम क्यों लागू नहीं होने चाहिए।
कोविड राहत कार्य पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने यह भी दावा किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान RSS द्वारा करोड़ों खाने के पैकेट और राशन का वितरण किया गया था, लेकिन इस पर खर्च हुए धन के स्रोत का आज तक कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बड़े पैमाने के कार्यों में वित्तीय पारदर्शिता अनिवार्य होनी चाहिए।
भागवत के बयान पर आपत्ति
दिग्विजय सिंह ने बताया कि 12 नवंबर 2025 को उन्होंने सरसंघचालक मोहन भागवत को पत्र लिखकर उनके एक बयान पर आपत्ति जताई थी, जिसमें RSS की अपंजीकृत स्थिति की तुलना हिंदू धर्म से की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संगठन की तुलना सनातन धर्म से करना उचित नहीं है और RSS को हिंदू धर्म का पर्याय नहीं माना जा सकता। उस पत्र में भी संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय स्रोतों और कर अनुपालन से जुड़े प्रश्न उठाए गए थे, जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
संविधान और पारदर्शिता का सवाल
दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि प्रियंक खड़गे द्वारा उठाए गए सवाल किसी व्यक्ति या संगठन के विरोध से नहीं, बल्कि संविधान, कानून के शासन और पारदर्शिता के सिद्धांत से प्रेरित हैं। उन्होंने एक बार फिर माँग की कि RSS अपना पंजीयन कराए और अपनी कानूनी स्थिति, संगठनात्मक ढाँचा, वित्तीय स्रोत, आय-व्यय तथा कर अनुपालन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करे।
आगे क्या होगा
यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस नेताओं के इन सवालों पर RSS की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि यह विवाद आगामी चुनावी मौसम में और गहरा हो सकता है, जबकि भाजपा (BJP) इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है।