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आरएसएस पर आयकर नहीं लागू, हाईकोर्ट दे चुका है फैसला: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार

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आरएसएस पर आयकर नहीं लागू, हाईकोर्ट दे चुका है फैसला: वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार

सारांश

कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे के आरएसएस की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाने के बाद वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने पलटवार किया — हाईकोर्ट 1967-68 और 1975-76 में दो बार फैसला दे चुका है कि संघ की गुरुदक्षिणा आय म्युचुअलिटी के आधार पर आयकर से मुक्त है।

मुख्य बातें

वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि आरएसएस पर आयकर नहीं लागू होता — उच्च न्यायालय दो मामलों में यह फैसला दे चुका है।
1967-68 और 1975-76 में आयकर विभाग ने संघ की आय को कर-योग्य माना था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज किया।
न्यायालय ने 'म्युचुअलिटी' के सिद्धांत पर स्पष्ट किया कि स्वयंसेवकों की गुरुदक्षिणा आयकर के दायरे से बाहर है।
आलोक कुमार के अनुसार, भारत के किसी भी कानून में 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' के पंजीकरण की बाध्यता नहीं है।
मनमोहन सिंह सरकार के दस वर्षों में भी इस विषय पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।
प्रियंक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर पंजीकरण और आय-व्यय की जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की थी।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 16 जून 2025 को स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर आयकर लागू नहीं होता, क्योंकि उच्च न्यायालय इस विषय पर दो बार अपना फैसला सुना चुका है। यह बयान कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संघ के पंजीकरण, कानूनी दर्जे और आय-व्यय की जानकारी सार्वजनिक करने की माँग के बाद आया है।

पंजीकरण पर कानूनी स्थिति

आलोक कुमार ने कहा कि संघ भारत के सभी कानूनों का पूरी तरह पालन करता है और पंजीकरण को लेकर उठाए जा रहे सवालों का कोई कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार, आरएसएस कानूनी भाषा में 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' की श्रेणी में आता है और भारत के किसी भी कानून में इस प्रकार की संस्था के पंजीकरण की कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने प्रियंक खड़गे से यह स्पष्ट करने की माँग की कि किस कानून के तहत संघ का पंजीकरण अनिवार्य है।

आयकर और न्यायालय के फैसले

वर्ष 1967-68 और 1975-76 में आयकर विभाग के अधिकारियों ने संघ की आय को कर-योग्य माना था। संघ ने इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि संघ की आय केवल स्वयंसेवकों के योगदान से होती है। न्यायालय ने 'म्युचुअलिटी' के सिद्धांत के आधार पर स्पष्ट किया कि इस आय पर आयकर लागू नहीं होगा।

आलोक कुमार ने बताया कि न्यायालय के इस निर्णय के बाद सीडीवीटी ने भी आदेश जारी कर पुष्टि की थी कि स्वयंसेवकों द्वारा दी जाने वाली गुरुदक्षिणा, म्युचुअलिटी के आधार पर, आयकर के दायरे से बाहर है। गौरतलब है कि संघ में वर्ष में एक बार गुरुदक्षिणा का आयोजन होता है और यही संगठन की आय का एकमात्र स्रोत है — बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं से कोई धन नहीं लिया जाता।

मनमोहन सरकार के दौर का हवाला

आलोक कुमार ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल के दौरान भी इस विषय पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस से जुड़े नेता संघ की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रियंक खड़गे की माँग और राजनीतिक प्रतिक्रिया

कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संघ के पंजीकरण, उसके कानूनी स्वरूप और आय-व्यय से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की थी। इस पत्र के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। आलोक कुमार ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खड़गे को 'सस्ती राजनीति' करने से पहले तथ्यों की जाँच कर लेनी चाहिए थी।

आगे क्या होगा

यह विवाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय के पूर्व फैसलों को देखते हुए संघ की कानूनी स्थिति फिलहाल सुदृढ़ है, लेकिन राजनीतिक बहस थमने के आसार कम हैं। खड़गे के पत्र पर आरएसएस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' की श्रेणी में आने वाली बड़ी संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता का सवाल केवल आरएसएस तक सीमित नहीं है। मनमोहन सरकार के दस वर्षों में चुप्पी का हवाला देना राजनीतिक रूप से प्रभावी है, लेकिन यह तर्क पारदर्शिता की माँग को नैतिक रूप से खारिज नहीं करता। असली सवाल यह है कि क्या दशकों पुराने न्यायिक फैसले आज की जवाबदेही की अपेक्षाओं के लिए पर्याप्त हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएसएस पर आयकर क्यों नहीं लगता?
उच्च न्यायालय ने 1967-68 और 1975-76 के दो मामलों में फैसला दिया कि आरएसएस की आय केवल स्वयंसेवकों की गुरुदक्षिणा से होती है और 'म्युचुअलिटी' के सिद्धांत के आधार पर यह आयकर के दायरे से बाहर है। इसके बाद सीडीवीटी ने भी इसी निर्णय को पुष्ट करने वाला आदेश जारी किया था।
प्रियंक खड़गे ने आरएसएस से क्या माँगा है?
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संघ के पंजीकरण, उसके कानूनी स्वरूप और आय-व्यय से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की है। इस पत्र के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
क्या आरएसएस का पंजीकरण अनिवार्य है?
वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार, भारत के किसी भी कानून में 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' श्रेणी की संस्था के पंजीकरण की कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने खड़गे से यह स्पष्ट करने को कहा कि किस कानून के तहत पंजीकरण अनिवार्य है।
आरएसएस की आय का स्रोत क्या है?
आलोक कुमार के अनुसार, आरएसएस की आय का एकमात्र स्रोत स्वयंसेवकों द्वारा वर्ष में एक बार दी जाने वाली गुरुदक्षिणा है। संघ बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं से कोई धन नहीं लेता।
क्या पहले भी आरएसएस की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठे हैं?
हाँ, 1967-68 और 1975-76 में आयकर विभाग ने संघ की आय को कर-योग्य माना था, लेकिन उच्च न्यायालय ने दोनों बार संघ के पक्ष में फैसला सुनाया। आलोक कुमार ने यह भी बताया कि मनमोहन सिंह सरकार के दस वर्षों में इस विषय पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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