प्रियंक खड़गे का मोहन भागवत को खुला पत्र: RSS की कानूनी स्थिति और वित्तीय पारदर्शिता पर 8 सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी है — लेकिन साथ ही RSS की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर 8 गंभीर सवाल भी उठाए हैं। बेंगलुरु से भेजे इस पत्र में खड़गे ने तर्क दिया कि देशभर में 60,000 से अधिक शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करने वाले संगठन को किसी निजी या अनौपचारिक संस्था की तरह नहीं चलाया जा सकता।
पत्र में क्या है — मुख्य घटनाक्रम
खड़गे ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की 2025-26 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार केवल कर्नाटक में RSS की 4,127 दैनिक शाखाएँ, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियाँ संचालित होती हैं। इसके अलावा 2,194 समाजोत्सवों में करीब 19.61 लाख लोगों की भागीदारी और 562 पथ संचलनों में 2.21 लाख से अधिक गणवेशधारी स्वयंसेवकों के शामिल होने का दावा ABPS की रिपोर्ट में किया गया है।
खड़गे के अनुसार इतने व्यापक पैमाने पर सार्वजनिक गतिविधियाँ चलाने वाले संगठन की कानूनी पहचान, आय के स्रोत और संवैधानिक अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए।
8 जानकारियाँ सार्वजनिक करने की माँग
पत्र में खड़गे ने RSS से निम्नलिखित जानकारियाँ सार्वजनिक करने की माँग की है:
(1) संगठन की कानूनी स्थिति; (2) संगठनात्मक ढाँचा; (3) पदाधिकारियों का विवरण; (4) चंदे और आय के स्रोत; (5) संपत्तियों और खर्च का ब्यौरा; (6) कर भुगतान की स्थिति; (7) बिना पंजीकरण के संचालन का कानूनी आधार; तथा (8) सार्वजनिक कार्यक्रमों और पथ संचलनों के लिए ली जाने वाली अनुमतियों और अनुपालन व्यवस्था की जानकारी।
कानूनी तर्क — 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं'
खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संगठन — चाहे वह कितना भी पुराना, बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो — कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि सफाई कर्मियों के संघ से लेकर धार्मिक संस्थाओं, ट्रस्टों, एनजीओ और कंपनियों तक सभी को पंजीकरण, ऑडिट और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करनी पड़ती है। उनका सवाल है कि RSS किस कानूनी आधार पर बिना औपचारिक पंजीकरण या 'बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स' के रूप में पंजीकृत हुए बिना कार्य कर रहा है।
शताब्दी वर्ष में पारदर्शिता की अपील
खड़गे ने RSS से अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन का पंजीकरण कराने, वित्तीय गतिविधियों का खुलासा करने और कानून के अनुरूप पूर्ण पारदर्शिता के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि RSS अपने अधिकृत पदाधिकारियों को इन मुद्दों पर चर्चा के लिए भेजे। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है और संगठन की सार्वजनिक उपस्थिति अपने उच्चतम स्तर पर है।
आगे क्या होगा
RSS की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पत्र कांग्रेस की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जो RSS और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संबंधों को लेकर जनता के बीच बहस छेड़ना चाहती है। आने वाले दिनों में RSS का जवाब और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।