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वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का प्रियांक खड़गे पर पलटवार — 'पहले आरएसएस का इतिहास पढ़ें'

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वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का प्रियांक खड़गे पर पलटवार — 'पहले आरएसएस का इतिहास पढ़ें'

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के आरएसएस पर उठाए सवालों का वीएचपी ने संविधान और इतिहास की दलीलों से जवाब दिया। वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने नेहरू और इंदिरा गांधी के उदाहरण देते हुए कहा कि खड़गे की माँग या तो अज्ञानता है या दुर्भावना।

मुख्य बातें

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण और फंडिंग पर सवाल उठाए।
वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(सी) का हवाला देते हुए कहा कि किसी संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
CBDT के सर्कुलर और उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, आरएसएस की आय कर योग्य नहीं है और रिटर्न दाखिल करना ज़रूरी नहीं।
आलोक कुमार ने याद दिलाया कि पंडित नेहरू ने 1962 में चीन युद्ध के बाद 26 जनवरी परेड में संघ को शामिल किया था और इंदिरा गांधी ने लोकसभा में श्रीगुरु जी को श्रद्धांजलि दी थी।
वीएचपी ने खड़गे के रवैये को 'या तो अज्ञानता या दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार' करार दिया।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 21 जून को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर तीखा पलटवार किया, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल उठाए थे। आलोक कुमार ने कहा कि खड़गे को आरएसएस के इतिहास को ठीक से पढ़ना चाहिए, अन्यथा ऐसे सवाल उठाना या तो अज्ञानता है या दुर्भावना।

खड़गे के पत्र पर विवाद क्यों

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के स्रोत, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे थे। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक विवाद तेज हो गया और वीएचपी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी।

वीएचपी का संवैधानिक तर्क

आलोक कुमार ने कहा, 'हमने उनसे पूछा है कि संविधान के किस प्रावधान में यह लिखा है कि किसी संगठन को काम करने के लिए रजिस्टर होना ज़रूरी है — ऐसी कोई कानूनी ज़रूरत नहीं है।' उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(सी) का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान हर भारतीय नागरिक को अपनी इच्छा से संगठन और संस्थाएँ बनाने का मौलिक अधिकार देता है। उनके अनुसार, खड़गे यह बताने में असमर्थ रहे कि किस कानून के तहत ऐसे संगठनों का पंजीकरण अनिवार्य है।

ऐतिहासिक संदर्भ और कांग्रेस की विरासत

वीएचपी अध्यक्ष ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगाने के बाद तत्कालीन सरकार ने संघ से अपना संविधान प्रस्तुत करने को कहा था, और आरएसएस ने ऐसा करने के बाद प्रतिबंध हटवाया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर 'श्रीगुरु जी' के निधन पर लोकसभा में श्रद्धांजलि दी थी और उन्हें 'अपने विचारों पर दृढ़ रहने वाला एक अद्भुत व्यक्तित्व' बताया था। इसके अलावा, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1962 में चीनी आक्रमण के दौरान संघ के कार्यों को देखते हुए 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में संघ को सम्मान के साथ शामिल किया था।

कर और वित्तीय पारदर्शिता पर वीएचपी का स्पष्टीकरण

आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि आरएसएस अपने सदस्यों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति से कोई पारिश्रमिक नहीं लेता। संगठन में केवल 'गुरु दक्षिणा' की परंपरा है, जो सिर्फ स्वयंसेवक ही दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि आरएसएस की आय कर योग्य नहीं है, और उच्च न्यायालय ने भी इसी स्थिति को बरकरार रखा है — इसीलिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की कोई बाध्यता नहीं है।

आलोक कुमार की सीधी चुनौती

वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रियांक खड़गे या तो तथ्यों से अनभिज्ञ हैं, या जानते-बूझते दुर्भावनापूर्ण ढंग से दुष्प्रचार कर रहे हैं। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और संघ-परिवार के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी संवैधानिक और ऐतिहासिक दलीलें सार्वजनिक मंच पर रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कानूनी आधार पर यह कमज़ोर खड़ा दिखता है — संविधान का अनुच्छेद 19(1)(सी) और CBDT की स्थिति दोनों वीएचपी के तर्क को बल देते हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस की अपनी विरासत — नेहरू और इंदिरा गांधी के संघ के प्रति रुख — इस बहस में उसकी स्थिति को असहज बनाती है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस मुद्दे को विधायी जवाबदेही की माँग के रूप में आगे बढ़ाएगा या यह महज चुनावी बयानबाजी बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने आरएसएस को लेकर क्या सवाल उठाए थे?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के स्रोत, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े सवाल पूछे थे। इस पत्र पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
वीएचपी ने खड़गे के सवालों का क्या जवाब दिया?
वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(सी) हर भारतीय को संगठन बनाने का अधिकार देता है और किसी संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। उन्होंने खड़गे को इतिहास पढ़ने की नसीहत दी।
क्या आरएसएस को आयकर रिटर्न दाखिल करना ज़रूरी है?
आलोक कुमार के अनुसार, CBDT के सर्कुलर और उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार आरएसएस की आय कर योग्य नहीं है। इसलिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।
वीएचपी ने नेहरू और इंदिरा गांधी का उल्लेख क्यों किया?
वीएचपी ने यह दिखाने के लिए कि कांग्रेस के अपने नेताओं ने भी आरएसएस को सम्मान दिया था — पंडित नेहरू ने 1962 में 26 जनवरी परेड में संघ को शामिल किया था और इंदिरा गांधी ने लोकसभा में श्रीगुरु जी को श्रद्धांजलि दी थी। यह तर्क खड़गे की आलोचना को उनकी ही पार्टी की विरासत से काटने की कोशिश है।
1948 में आरएसएस पर प्रतिबंध और उसके हटने की क्या कहानी है?
1948 में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद सरकार ने संघ से अपना संविधान प्रस्तुत करने को कहा और आरएसएस ने ऐसा किया, जिसके बाद प्रतिबंध हटाया गया। वीएचपी अध्यक्ष के अनुसार, तब से संघ अपने संविधान के तहत ही संचालित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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