वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का प्रियांक खड़गे पर पलटवार — 'पहले आरएसएस का इतिहास पढ़ें'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 21 जून को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर तीखा पलटवार किया, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल उठाए थे। आलोक कुमार ने कहा कि खड़गे को आरएसएस के इतिहास को ठीक से पढ़ना चाहिए, अन्यथा ऐसे सवाल उठाना या तो अज्ञानता है या दुर्भावना।
खड़गे के पत्र पर विवाद क्यों
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के स्रोत, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे थे। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक विवाद तेज हो गया और वीएचपी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी।
वीएचपी का संवैधानिक तर्क
आलोक कुमार ने कहा, 'हमने उनसे पूछा है कि संविधान के किस प्रावधान में यह लिखा है कि किसी संगठन को काम करने के लिए रजिस्टर होना ज़रूरी है — ऐसी कोई कानूनी ज़रूरत नहीं है।' उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(सी) का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान हर भारतीय नागरिक को अपनी इच्छा से संगठन और संस्थाएँ बनाने का मौलिक अधिकार देता है। उनके अनुसार, खड़गे यह बताने में असमर्थ रहे कि किस कानून के तहत ऐसे संगठनों का पंजीकरण अनिवार्य है।
ऐतिहासिक संदर्भ और कांग्रेस की विरासत
वीएचपी अध्यक्ष ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगाने के बाद तत्कालीन सरकार ने संघ से अपना संविधान प्रस्तुत करने को कहा था, और आरएसएस ने ऐसा करने के बाद प्रतिबंध हटवाया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर 'श्रीगुरु जी' के निधन पर लोकसभा में श्रद्धांजलि दी थी और उन्हें 'अपने विचारों पर दृढ़ रहने वाला एक अद्भुत व्यक्तित्व' बताया था। इसके अलावा, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1962 में चीनी आक्रमण के दौरान संघ के कार्यों को देखते हुए 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में संघ को सम्मान के साथ शामिल किया था।
कर और वित्तीय पारदर्शिता पर वीएचपी का स्पष्टीकरण
आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि आरएसएस अपने सदस्यों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति से कोई पारिश्रमिक नहीं लेता। संगठन में केवल 'गुरु दक्षिणा' की परंपरा है, जो सिर्फ स्वयंसेवक ही दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि आरएसएस की आय कर योग्य नहीं है, और उच्च न्यायालय ने भी इसी स्थिति को बरकरार रखा है — इसीलिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की कोई बाध्यता नहीं है।
आलोक कुमार की सीधी चुनौती
वीएचपी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रियांक खड़गे या तो तथ्यों से अनभिज्ञ हैं, या जानते-बूझते दुर्भावनापूर्ण ढंग से दुष्प्रचार कर रहे हैं। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और संघ-परिवार के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी संवैधानिक और ऐतिहासिक दलीलें सार्वजनिक मंच पर रख रहे हैं।