प्रियांक खड़गे का RSS पर हमला: पारदर्शिता, कानूनी रजिस्ट्रेशन और जवाबदेही की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने 16 जून 2025 की देर रात एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत पोस्ट के ज़रिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके प्रमुख मोहन भागवत पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने RSS की राजनीतिक जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी रजिस्ट्रेशन की मांग करते हुए कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती।
वायरल वीडियो पर खड़गे का स्पष्टीकरण
खड़गे ने सबसे पहले उस भ्रम को दूर किया जो मोहन भागवत के एक वायरल वीडियो को लेकर फैला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पत्र 15 जून को भेजा गया था, जबकि भागवत की वह बातचीत 13-14 जून की थी — यानी वह वीडियो उनके पत्र का जवाब नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, "यह वीडियो मेरे पत्र के उत्तर में नहीं था — तारीखें खुद यह साबित करती हैं।"
राजनीतिक प्रभाव और जवाबदेही का विरोधाभास
खड़गे ने स्वीकार किया कि RSS को सांस्कृतिक संगठन के रूप में कार्य करने का पूर्ण अधिकार है, लेकिन उन्होंने एक केंद्रीय विरोधाभास उठाया — कि एक संगठन व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करे और साथ ही यह दावा भी करे कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) स्वयं RSS को अपना वैचारिक जनक मानती है — जो इस दावे को और कमज़ोर करता है।
वित्तीय नेटवर्क और सरकारी सुरक्षा पर सवाल
खड़गे ने RSS के विस्तार पर विशेष ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, संगठन देश-विदेश में 2,500 से अधिक संबद्ध संगठनों के नेटवर्क के ज़रिए चंदा जुटाता है और विभिन्न राजधानियों में मुख्यालय संचालित करता है। इसके अतिरिक्त, RSS प्रमुख को एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइसेंस (ASL) प्रोटोकॉल मिलता है और अन्य पदाधिकारियों को भी करदाताओं के धन से सुरक्षा दी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब संगठन की कानूनी स्थिति को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है।
रजिस्ट्रेशन के तर्क पर पलटवार
खड़गे ने RSS के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि जैसे किसी धर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं होता, वैसे ही RSS का भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि RSS किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता — यह मात्र 100 वर्ष पुराना संगठन है और उस पर सामान्य कानूनी मानदंड लागू होने चाहिए। उनके अनुसार, "कानून के तहत औपचारिक मान्यता मिलने से यह विरोधाभास हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।"
भागवत की 'जवाब देने की बाध्यता नहीं' वाली टिप्पणी पर आपत्ति
खड़गे ने अपनी पोस्ट में सबसे तीखी प्रतिक्रिया भागवत की उस कथित टिप्पणी पर जताई जिसमें कहा गया था कि RSS किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने लिखा, "संवैधानिक लोकतंत्र में किसी भी संस्था को विशेषाधिकार नहीं मिलता। अहंकार छोड़िए, कानून का पालन कीजिए।" गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष RSS की संस्थागत जवाबदेही को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहा है। खड़गे ने स्पष्ट किया कि उन्हें RSS की किसी भी सांस्कृतिक, सामाजिक या कानूनी गतिविधि पर आपत्ति नहीं है — मांग केवल पारदर्शिता की है।