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प्रियांक खड़गे का RSS पर हमला: पारदर्शिता, कानूनी रजिस्ट्रेशन और जवाबदेही की मांग

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प्रियांक खड़गे का RSS पर हमला: पारदर्शिता, कानूनी रजिस्ट्रेशन और जवाबदेही की मांग

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक्स पर RSS को सीधी चुनौती दी — 2,500 से अधिक संबद्ध संगठन, करदाताओं की सुरक्षा और BJP का वैचारिक जनक होने के बावजूद जवाबदेही से इनकार। उनका सवाल सीधा है: कानून सबके लिए एक है, तो RSS अपवाद क्यों?

मुख्य बातें

प्रियांक खड़गे ने 16 जून 2025 को एक्स पर पोस्ट कर RSS से कानूनी रजिस्ट्रेशन और वित्तीय पारदर्शिता की मांग की।
खड़गे ने स्पष्ट किया कि मोहन भागवत का वायरल वीडियो उनके पत्र का जवाब नहीं था — उनका पत्र 15 जून का था, भागवत की बातचीत 13-14 जून की थी।
RSS देश-विदेश में 2,500 से अधिक संबद्ध संगठनों के नेटवर्क से चंदा जुटाता है और RSS प्रमुख को ASL प्रोटोकॉल सुरक्षा मिलती है।
खड़गे ने RSS के 'धर्म जैसा रजिस्ट्रेशन नहीं' वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि RSS 100 साल पुराना संगठन है, कोई धर्म नहीं।
भागवत की कथित 'जवाब देने की बाध्यता नहीं' टिप्पणी पर खड़गे ने कहा — 'संवैधानिक लोकतंत्र में कोई संस्था विशेषाधिकार-प्राप्त नहीं होती।'

कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने 16 जून 2025 की देर रात एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत पोस्ट के ज़रिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके प्रमुख मोहन भागवत पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने RSS की राजनीतिक जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी रजिस्ट्रेशन की मांग करते हुए कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती।

वायरल वीडियो पर खड़गे का स्पष्टीकरण

खड़गे ने सबसे पहले उस भ्रम को दूर किया जो मोहन भागवत के एक वायरल वीडियो को लेकर फैला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पत्र 15 जून को भेजा गया था, जबकि भागवत की वह बातचीत 13-14 जून की थी — यानी वह वीडियो उनके पत्र का जवाब नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, "यह वीडियो मेरे पत्र के उत्तर में नहीं था — तारीखें खुद यह साबित करती हैं।"

राजनीतिक प्रभाव और जवाबदेही का विरोधाभास

खड़गे ने स्वीकार किया कि RSS को सांस्कृतिक संगठन के रूप में कार्य करने का पूर्ण अधिकार है, लेकिन उन्होंने एक केंद्रीय विरोधाभास उठाया — कि एक संगठन व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करे और साथ ही यह दावा भी करे कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) स्वयं RSS को अपना वैचारिक जनक मानती है — जो इस दावे को और कमज़ोर करता है।

वित्तीय नेटवर्क और सरकारी सुरक्षा पर सवाल

खड़गे ने RSS के विस्तार पर विशेष ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, संगठन देश-विदेश में 2,500 से अधिक संबद्ध संगठनों के नेटवर्क के ज़रिए चंदा जुटाता है और विभिन्न राजधानियों में मुख्यालय संचालित करता है। इसके अतिरिक्त, RSS प्रमुख को एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइसेंस (ASL) प्रोटोकॉल मिलता है और अन्य पदाधिकारियों को भी करदाताओं के धन से सुरक्षा दी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब संगठन की कानूनी स्थिति को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है।

रजिस्ट्रेशन के तर्क पर पलटवार

खड़गे ने RSS के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि जैसे किसी धर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं होता, वैसे ही RSS का भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि RSS किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता — यह मात्र 100 वर्ष पुराना संगठन है और उस पर सामान्य कानूनी मानदंड लागू होने चाहिए। उनके अनुसार, "कानून के तहत औपचारिक मान्यता मिलने से यह विरोधाभास हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।"

भागवत की 'जवाब देने की बाध्यता नहीं' वाली टिप्पणी पर आपत्ति

खड़गे ने अपनी पोस्ट में सबसे तीखी प्रतिक्रिया भागवत की उस कथित टिप्पणी पर जताई जिसमें कहा गया था कि RSS किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने लिखा, "संवैधानिक लोकतंत्र में किसी भी संस्था को विशेषाधिकार नहीं मिलता। अहंकार छोड़िए, कानून का पालन कीजिए।" गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष RSS की संस्थागत जवाबदेही को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहा है। खड़गे ने स्पष्ट किया कि उन्हें RSS की किसी भी सांस्कृतिक, सामाजिक या कानूनी गतिविधि पर आपत्ति नहीं है — मांग केवल पारदर्शिता की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 से अधिक संबद्ध संगठनों के नेटवर्क का उल्लेख इस बहस को ठोस ज़मीन देता है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि कांग्रेस शासित राज्यों में स्वयं कितने संगठनों की वित्तीय जाँच होती है — जवाबदेही की माँग तभी विश्वसनीय होती है जब वह चुनिंदा न हो।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने RSS से क्या मांग की है?
खड़गे ने RSS से कानूनी रजिस्ट्रेशन, वित्तीय पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही की मांग की है। उनका कहना है कि व्यापक सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव रखने वाले किसी भी संगठन को सार्वजनिक जवाबदेही से मुक्ति नहीं मिल सकती।
मोहन भागवत के वायरल वीडियो को लेकर खड़गे ने क्या स्पष्टीकरण दिया?
खड़गे ने कहा कि भागवत का वह वीडियो उनके पत्र का जवाब नहीं था, क्योंकि उनका पत्र 15 जून को भेजा गया था जबकि भागवत की वह बातचीत 13-14 जून की थी। उन्होंने इसे भ्रामक प्रचार बताया।
खड़गे ने RSS के 'धर्म जैसा रजिस्ट्रेशन नहीं' वाले तर्क को क्यों खारिज किया?
खड़गे के अनुसार RSS किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता — यह मात्र 100 वर्ष पुराना संगठन है। इसलिए धार्मिक संस्थाओं पर लागू होने वाला तर्क RSS पर नहीं चलता और उस पर सामान्य कानूनी मानदंड लागू होने चाहिए।
RSS के वित्तीय नेटवर्क पर खड़गे ने क्या सवाल उठाए?
खड़गे ने बताया कि RSS देश-विदेश में 2,500 से अधिक संबद्ध संगठनों के ज़रिए चंदा जुटाता है, विभिन्न राजधानियों में मुख्यालय चलाता है और उसके प्रमुख को ASL सुरक्षा प्रोटोकॉल मिलता है — जो करदाताओं के पैसे से वित्तपोषित है।
BJP और RSS के संबंध पर खड़गे ने क्या कहा?
खड़गे ने कहा कि BJP स्वयं RSS को अपना वैचारिक जनक मानती है, इसलिए RSS का यह दावा कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, विश्वसनीय नहीं है। उनके अनुसार यही विरोधाभास RSS पर जवाबदेही की मांग को और मज़बूत बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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