आरएसएस टिप्पणी मामले में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे को स्पेशल कोर्ट का दूसरा समन, 1 अगस्त को पेशी
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु की सांसदों-विधायकों के लिए गठित स्पेशल कोर्ट ने 21 जुलाई 2026 को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे को दूसरी बार व्यक्तिगत उपस्थिति का समन जारी किया है। यह समन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ी एक निजी शिकायत के संदर्भ में आया है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाद को भी इसी मामले में समन जारी करते हुए दोनों को 1 अगस्त को पेश होने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह शिकायत सिद्धापुरा निवासी तेजस गौड़ा ने दायर की है। उनका आरोप है कि प्रियांक खड़गे और मोहम्मद नलपाद के बयानों से आरएसएस की सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा है। शिकायत के अनुसार, खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए आरएसएस पर टिप्पणी की थी, जबकि नलपाद ने कथित तौर पर एक यूट्यूब चैनल पर दिए गए इंटरव्यू में संगठन के विरुद्ध अपमानजनक बातें कही थीं।
न्यायाधीश संदीप पाटिल की अध्यक्षता वाली इस कोर्ट ने पहले जारी किए गए समन के संबंध में पुलिस की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मंगलवार को ये नए समन जारी किए। गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब कोर्ट ने दोनों नेताओं को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
विवाद की जड़: आरएसएस पंजीकरण और पारदर्शिता की माँग
खड़गे और आरएसएस के बीच इस टकराव की मुख्य वजह खड़गे की यह माँग रही है कि संगठन खुद को विधिवत पंजीकृत कराए और अपने वित्तीय कामकाज का सार्वजनिक खुलासा करे। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संघ की संस्थागत स्वायत्तता और फंडिंग में पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
खड़गे ने माँग की थी कि आरएसएस अपनी पंजीकरण स्थिति, संगठनात्मक ढाँचा, आय-व्यय का विवरण और संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि संगठन के पंजीकृत न होने और 'गुरु दक्षिणा' के माध्यम से चंदा एकत्र करने से उसे कर और वित्तीय जाँच से बचने में सहूलियत मिलती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप
इस मामले ने कर्नाटक में तीखी राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। खड़गे ने दावा किया है कि उन्हें धमकी भरे फोन कॉल आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर दलित नेताओं को आरएसएस की विचारधारा के अधीन काम करने के लिए बाध्य किया जाता है — एक ऐसा आरोप जिसे भाजपा ने सिरे से नकारा है।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच पहले से ही कई मोर्चों पर टकराव जारी है। आलोचकों का कहना है कि यह मामला चुनावी ध्रुवीकरण की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
आगे की कार्यवाही
स्पेशल कोर्ट ने दोनों नेताओं को 1 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यदि वे इस बार भी उपस्थित नहीं होते, तो कोर्ट के पास आगे की कठोर कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। इस मामले का अगला पड़ाव तय करेगा कि क्या यह शिकायत मुकदमे तक पहुँचती है या पहले ही निपट जाती है।