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प्रियांक खड़गे ने मल्लिकार्जुन खड़गे के 'जहरीला सांप' बयान का समर्थन किया, असम के सीएम पर कटाक्ष

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प्रियांक खड़गे ने मल्लिकार्जुन खड़गे के 'जहरीला सांप' बयान का समर्थन किया, असम के सीएम पर कटाक्ष

सारांश

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे के 'जहरीला सांप' वाले बयान का समर्थन करते हुए भाजपा की जातिगत मानसिकता पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

प्रियांक खड़गे ने असम के मुख्यमंत्री सरमा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा की जातिगत मानसिकता को चुनौती दी गई।
मल्लिकार्जुन खड़गे की 'जहरीला सांप' टिप्पणी का समर्थन किया गया।
आरएसएस पर आरोप लगाया गया कि वह 'चातुर्वर्ण' मानसिकता को बढ़ावा देता है।
सरमा के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई।

बेंगलुरु, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सरमा पर गैर-जिम्मेदाराना और जाति-आधारित टिप्पणियां करने का आरोप लगाया।

प्रियांक खड़गे ने अपने पिता मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादास्पद 'जहरीला सांप' वाली टिप्पणी का भी समर्थन किया।

बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि भाजपा नेताओं के बीच जातिगत विशेषाधिकार की भावना गहराई से मौजूद है। उन्होंने इसका श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव को दिया।

खड़गे ने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़ने के बाद सीएम सरमा के विचारों में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि ऐसे विचारों ने सरमा के बयानों को प्रभावित किया है। असम के मुख्यमंत्री ब्राह्मण समुदाय से हैं, जिसके कारण उनकी सामाजिक स्थिति उन्हें आलोचना से सुरक्षित रखती है।

प्रियांक ने कहा कि दलितों और हाशिए पर पड़े समुदायों के नेताओं के खिलाफ सरमा के बयानों पर उनसे पर्याप्त जवाबदेही नहीं मांगी जाती।

उन्होंने आरएसएस पर 'चातुर्वर्ण' मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग इस विचारधारा पर सवाल उठाते हैं, उन्हें अक्सर निशाना बनाया जाता है।

खड़गे ने कहा कि भाजपा नेता विवादास्पद बयानों के समय खुद को 'परिपक्व समुदायों' का प्रतिनिधि बताते हैं, लेकिन वे 'चातुर्वर्ण' मानसिकता से बाहर नहीं निकलते।

प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए खड़गे ने पूछा कि क्या वे सरमा के बयानों का समर्थन करेंगे? उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता पर एक मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा हमलावर होना चिंताजनक है।

अपने पिता की पिछली टिप्पणी का बचाव करते हुए प्रियांक ने स्पष्ट किया कि मल्लिकार्जुन खड़गे की 'जहरीला सांप' वाली टिप्पणी एक रूपक थी, जिसका आशय समाज में नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं को लक्षित करना था।

उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसी विचारधाराओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए या उनका विरोध किया जाना चाहिए? भाजपा और आरएसएस की विचारधाराएं समाज के विभिन्न वर्गों (जिनमें अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग, दलित, आदिवासी और महिलाएं शामिल हैं) के विकास के लिए हानिकारक हैं।

प्रियांक ने कहा कि आरएसएस 'मनु स्मृति' के सिद्धांतों में विश्वास रखता है, जबकि कांग्रेस संविधान के साथ खड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा आरएसएस को समर्थन क्यों देती है?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन को अपने अस्तित्व के लिए किसी राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता नहीं है।

सोमवार को असम के श्रीभूमि जिले में एक चुनावी रैली में, खड़गे ने कुरान का हवाला देते हुए कहा था कि अगर किसी के सामने से कोई जहरीला सांप गुजरता है, तो उसे नमाज छोड़कर उस सांप को मार देना चाहिए।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि मैं कहूंगा कि नमाज तोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता। आरएसएस और भाजपा ही वह जहरीला सांप हैं।

वहीं, असम के मुख्यमंत्री सरमा ने जोरहाट में पत्रकारों को संबोधित करते हुए खड़गे पर तीखा हमला करते हुए उनके बयानों पर प्रश्न उठाए और कड़े शब्दों का प्रयोग किया।

सरमा ने कहा था, "खड़गे बुजुर्ग हो रहे हैं और एक 'पागल' की तरह बोल रहे हैं। आप पहले लोगों का अपमान करते हैं और फिर कहते हैं कि आप विदेश मंत्री से पुष्टि के लिए पूछेंगे?"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विवाद भाजपा की जातिगत राजनीति और कांग्रेस की वैकल्पिक विचारधारा के बीच बढ़ते तनाव को प्रकट करता है। प्रियांक खड़गे का बयान दर्शाता है कि राजनीतिक बयानबाजी का स्तर और भी ऊँचा जा सकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने किसके खिलाफ टिप्पणियाँ की?
प्रियांक खड़गे ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ टिप्पणियाँ की।
'जहरीला सांप' टिप्पणी का क्या अर्थ है?
यह टिप्पणी समाज में नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं के खिलाफ एक रूपक है।
आरएसएस पर खड़गे का क्या आरोप है?
खड़गे ने आरएसएस पर 'चातुर्वर्ण' मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
सरमा ने खड़गे के बयानों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
सरमा ने खड़गे के बयानों पर तीखा हमला किया और उन्हें 'पागल' कहा।
इस विवाद का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह विवाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जातिगत राजनीति और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उजागर करता है.
राष्ट्र प्रेस
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