परविंदर झोटा हत्याकांड: हरसिमरत कौर बादल मानसा पहुँचीं, कांग्रेस-भाजपा ने भगवंत मान सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब सरकार चौतरफा आलोचनाओं के घेरे में आ गई है। 16 अक्टूबर 2026 को शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मानसा पहुँचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी इस हत्याकांड को लेकर राज्य में कानून-व्यवस्था की बदहाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
हरसिमरत कौर बादल की परिवार से मुलाकात और तीखी प्रतिक्रिया
पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि परिवार गहरे दुख से गुज़र रहा है और इस संकट की घड़ी में पूरा पंजाब उनके साथ खड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया, 'यह उम्मीद करना ही गलती थी कि नशे के आदी मुख्यमंत्री नशे की समस्या को खत्म कर पाएंगे। आज पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार के संरक्षण में नशा तस्करों के हौसले बुलंद हैं, और जो कोई भी आवाज उठाता है, उसे गोली मार दी जाती है। मैं इसके लिए सीधे तौर पर सरकार को ज़िम्मेदार ठहराती हूँ।'
उन्होंने यह भी कहा कि 'मुख्यमंत्री के सामने आवाज़ उठाने पर मोहनजीत के साथ जो हुआ, वह पंजाब ने देखा है; और वित्त मंत्री से चिट्टा (नशीला पदार्थ) की बिक्री रोकने की गुहार लगाने पर गुलजार को पुलिस की बर्बरता झेलनी पड़ी।' अकाली सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि जिस संदिग्ध का हथियार लाइसेंस पहले रद्द किया गया था, जो जेल की सज़ा काट चुका था और 2023 में वापस आया था तथा जिसके ठिकानों पर बार-बार छापेमारी हो चुकी थी, उसे 2024 में दोबारा हथियारों का लाइसेंस कैसे मिला। उन्होंने माँग की कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा नेता सुनील जाखड़ के गंभीर आरोप
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश नेता सुनील जाखड़ ने इस हत्याकांड से कथित तौर पर जुड़े एक ड्रग इंस्पेक्टर का मामला उठाते हुए कहा कि उसके लॉकर से ₹7.5 करोड़ की संपत्ति, ₹1.5 करोड़ नकद, आधा किलो सोना और मोहाली, पंजाब तथा राजस्थान में करोड़ों की संपत्तियाँ बरामद होने की खबरें हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं डीजीपी ने स्वीकार किया था कि इस इंस्पेक्टर के संबंध जेल में बंद एक ड्रग माफिया से थे और वह सीमा-पार व्यापार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शामिल था।
जाखड़ ने आगे आरोप लगाया कि डीजीपी के बयान के आधार पर उस इंस्पेक्टर के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय (ED) का मामला दर्ज होना चाहिए था, किंतु सरकार ने उसे जमानत दे दी, वापस सेवा में रख लिया और यहाँ तक कि मुख्यालय में एक विभाग का इंचार्ज भी बना दिया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है और लोग इस सरकार को बर्खास्त करने की माँग कर रहे हैं।
कांग्रेस की आलोचना: 'सरकार का कार्यकाल पूरा नहीं होगा'
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष परगट सिंह ने भी AAP सरकार पर कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'जिस तरह आज गैंगस्टर और फिरौती जैसे मामलों में हम पीड़ित परिवारों के पास जा रहे हैं, सरकार कहती है सब कुछ नियंत्रण में है, लेकिन पंजाब की जनता इनका असली चेहरा जान चुकी है। मुझे लगता है कि वर्तमान पंजाब सरकार का कार्यकाल भी पूरा नहीं हो पाएगा।'
पृष्ठभूमि: परविंदर सिंह झोटा कौन थे?
परविंदर सिंह झोटा मानसा जिले के एक सक्रिय एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट थे, जो पंजाब में नशे की समस्या के विरुद्ध आवाज़ उठाते रहे थे। उनकी हत्या ने राज्य में ड्रग माफिया और उसके कथित संरक्षणदाताओं पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। गौरतलब है कि पंजाब में नशे की लत एक दशक से अधिक समय से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रही है और AAP ने सत्ता में आने से पहले इसे खत्म करने का प्रमुख वादा किया था।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों के सुर एक साथ तीखे होने से मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है। तीनों बड़े दलों — अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस — की एकजुट माँगें इस मामले को सड़क से विधानसभा तक ले जाने का संकेत देती हैं। पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग जारी है।