मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या, मजीठिया बोले— भगवंत मान सरकार दे इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मानसा में नशा विरोधी अभियान से जुड़े कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की सुबह एक मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर राज्य में नई बहस छेड़ दी है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस हत्या की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार से इस्तीफे की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, झोटा नशा विरोधी टास्क फोर्स से जुड़े थे और एक मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर चिट्टा (हेरोइन) की बिक्री का लाइव प्रसारण के दौरान खुलासा कर रहे थे। इसी दौरान मेडिकल स्टोर संचालक ने कथित तौर पर उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई। बताया गया है कि वह पिछले चार-पाँच वर्षों से नशे की तस्करी और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के विरुद्ध सक्रिय रूप से अभियान चलाते थे और स्थानीय लोगों को इस समस्या के खिलाफ एकजुट करते थे।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक खींचतान पहले से तेज है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने नशा उन्मूलन को अपने प्रमुख एजेंडे में रखा है, किंतु विपक्ष का आरोप है कि ज़मीनी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
मजीठिया और विपक्ष की प्रतिक्रिया
बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'परविंदर सिंह झोटा मानसा में लंबे समय से नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। एक मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर चिट्टा की बिक्री का लाइव प्रसारण के दौरान खुलासा करते हुए उनकी हत्या कर दी गई। भगवंत मान, क्या अब आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति को मार दिया जाएगा? पंजाब के लोगों, एकजुट हों और इस सरकार से जवाब तथा इस्तीफे की माँग करें।'
शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने भी राज्य सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई पुलिस थानों और चौकियों पर ग्रेनेड हमले हो चुके हैं। इससे पहले खुफिया मुख्यालय पर रॉकेट लॉन्चर से हमला हुआ था। कम समय में ड्यूटी से घर लौटते वक्त सात पुलिस सहायक उपनिरीक्षकों (ASI) की हत्या हुई और हाल ही में अमृतसर के एक यूट्यूबर की भी हत्या हुई।' चीमा ने जोड़ा, 'नशे की बिक्री का विरोध करने पर एक केमिस्ट किसी को गोली मार रहा है — इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि तस्कर क्या कर रहे होंगे।'
कांग्रेस की माँग
कांग्रेस नेता अर्शदीप गागोवाल ने इस घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा, 'वह पिछले चार-पाँच वर्षों से लोगों के लिए लड़ाई लड़ रहे थे और इसी संघर्ष में उन्होंने अपनी जान गंवा दी। उनके पीछे छोटे बच्चे हैं। मैं प्रशासन से आग्रह करता हूँ कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की जाए।'
आम जनता और कार्यकर्ताओं पर असर
इस हत्या ने राज्यभर में नशा विरोधी अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संगठनों में भय का माहौल बना दिया है। आलोचकों का कहना है कि जब एक कार्यकर्ता को लाइव प्रसारण के दौरान भी सुरक्षा नहीं मिल पाती, तो ज़मीनी स्तर पर काम करने वालों का हौसला टूटता है। यह वही पंजाब है जहाँ नशे की समस्या एक दशक से अधिक से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है और हर सरकार इसे खत्म करने का वादा करती आई है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार से घटना की उच्च स्तरीय जाँच और दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार करने की माँग की है। राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और पुलिस की कार्रवाई की गति अगले कुछ घंटों में स्पष्ट होने की उम्मीद है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या की यह घटना पंजाब विधानसभा और सड़कों दोनों पर विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती दिख रही है।